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       <title>Today Festivals News in Hindi News | Latest Festivals News in Hindi News | Breaking Festivals News in Hindi News in English | Latest Festivals News in Hindi News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Festivals News in Hindi समाचार:Today Festivals News in Hindi News ,Latest Festivals News in Hindi News,Aaj Ka Samachar ,Festivals News in Hindi समाचार ,Breaking Festivals News in Hindi News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/tag/festivals-news-in-hindi</link>
        <lastBuildDate>May 4, 2026, 7:37 pm</lastBuildDate>
        <copyright>Chhattisgarh Inkhabar</copyright>
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            <title>Chhattisgarh Inkhabar</title>
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        </image><item><title>Kamika Ekadashi 2024: आज है कमिका एकादशी, जानिए इसका महत्व और पूजन विधि</title><link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/kamika-ekadashi-2024-today-is-kamika-ekadashi-know-its-importance-and-method-of-worship/</link><pubDate>July 31, 2024, 3:41 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/07/्िप.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>रायपुर। पंचांग के मुताबिक आज यानी 31 जुलाई को कामिका एकादशी व्रत (Kamika Ekadashi 2024 Date) है। सनातन धर्म में एकादशी तिथि का बहुत महत्व होता है। एकादशी की तिथि जगत के नाथ भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन श्रीहरि और धन की देवी मां लक्ष्मी की...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;रायपुर।&lt;/strong&gt; पंचांग के मुताबिक आज यानी 31 जुलाई को कामिका एकादशी व्रत (Kamika Ekadashi 2024 Date) है। सनातन धर्म में एकादशी तिथि का बहुत महत्व होता है। एकादशी की तिथि जगत के नाथ भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन श्रीहरि और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही श्रीहरि के मंदिरों में भजन-कीर्तन किया जाता है। कामिका एकादशी व्रत का उल्लेख विष्णु पुराण में किया गया है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक सच्चे मन से इस व्रत को करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। साथ ही जीवन सदैव खुशियों से भरा रहता है। एकादशी के दिन तुलसी से जुड़े उपाय करने से सभी तरह की परेशानी दूर होती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कमिका एकादशी की पूजा विधि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;कामिका एकादशी के मौके पर सुबह सारे काम निपटा कर स्नान करना चाहिए। स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इसके बाद तुलसी के पौधे पर लाल चुनरी अर्पित पूजा करनी चाहिए। भगवान विष्णु और देवी पार्वती की पूजा-अर्चना करें। अंत में जीवन में सुख-शांति की कामना करें। कमिक एकादशी के दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, जिससे आर्थिक समस्याएं जल्द दूर होती हैं। इस दिन का व्रत करने से दांपत्य जीवन में प्रेम बना रहता है। अगर आप धन की प्राप्ति तो कामिका एकादशी पर किया गया उपाय बेहद फलदायी साबित होता है। इस दिन तुलसी की मंजरी को लाल कपड़े में बांधकर अलमारी में रख दें। माना जाता है कि इस उपाय को करने से साधक को जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती है। कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु के पास देशी घी का दीपक जलाना चाहिए, और सच्चे मन प्रार्थना कर 11 परिक्रमा लगानी चाहिए।&lt;br&gt;इससे व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और श्री हरि खुश होते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कमिका एकादशी का महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पुराण के मुताबिक जो मनुष्य शिव के प्रिय श्रावण मास में भगवान श्रीधर का पूजा करते है। उसके द्वारा गंधर्वों और नागों सहित सभी देवताओं की पूजा हो जाती है। यह एकादशी स्वर्गलोक तथा महान पुण्यफल प्रदान करने वाली है। इस दिन भगवान विष्णु&lt;br&gt;और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक समस्याएं नहीं होती। मनुष्य श्रद्धा के साथ इसकी महिमा का श्रवण करता है। वह सब पापों से मुक्त हो जाता है। उसे स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से, इस दिन तुलसी के पत्ते का प्रयोग करने&lt;br&gt;से व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Bhai Dooj 2023: भाई दूज आज, इस विधि से लगाएं टीका</title><link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/bhai-dooj-2023-today-is-bhai-dooj-get-vaccinated-with-this-method/</link><pubDate>November 15, 2023, 8:52 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/11/download-2-3-300x169.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>रायपुर। देश भर में फेस्टिव सीजन चल रहा है। ऐसे में आज पुरे देश भर में भाई दूज का त्योहार मनाया जा रहा है। जैसा की हिंदू शास्त्र में भी कहा गया है कि दिवाली पर्व की आरंभ धनतेरस से होती है लेकिन इसका समापन भाई दूज के साथ होता है। गोवर्धन पूजा के ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;रायपुर।&lt;/strong&gt; देश भर में फेस्टिव सीजन चल रहा है। ऐसे में आज पुरे देश भर में भाई दूज का त्योहार मनाया जा रहा है। जैसा की हिंदू शास्त्र में भी कहा गया है कि दिवाली पर्व की आरंभ धनतेरस से होती है लेकिन इसका समापन भाई दूज के साथ होता है। गोवर्धन पूजा के अगले सुबह भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। तो चलिए ऐसे में हम आपको इस पर्व से जुड़ी तमाम जानकारी देंगे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;माथे पर लाल टिका &lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हिन्दू शास्त्रों के अनुसार हर पर्व का अपना अलग पहचान होता है। बता दें कि दिवाली पर्व की शुरुआत भले ही धनतेरस से होता है लेकिन इसका समापन भाई दूज से ही होता है। भाई दूज के शुभ अवसर पर बहनें अपने भाइयों के माथे पर लाल टिका लगाती है। इसके पीछे का कारण बताया गया है कि बहन अपने भाइयों की लंबी उम्र के लिए भाई के माथे पर तिलक लगा कर उसकी दीर्घ आयु की कामना करती है। इस पर्व को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाते है। इस साल यह पर्व 15 नवंबर यानी आज बुधवार को मनाया जा रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सफल जीवन के लिए फास्टिंग&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों की दीर्घ आयु और सफल जीवन के लिए फास्टिंग रखती है। आपको बता दें कि हिन्दू शास्त्र में हर पर्व के लिए कुछ न कुछ नियम बताया गया हुआ है, ऐसे में भाई दूज के लिए भी कुछ नियम है जो हम आपको बतायेंगे &amp;#8211; माना जाता है कि भाई दूज पर अगर हम नियमानुसार भाई के लिए फास्टिंग के साथ तिलक लगाते है तो ऐसे में हमें शुभ फलों की प्राप्ति होती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;तिलक के समय रखें इन बातों का ख्याल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;भाई दूज के अवसर पर सभी बहनों को भाई को तिलक करने से पहले कुछ नियम का पालन जरूर करना चाहिए, जैसे में हिन्दू शास्त्र में भी कहा गया हुआ है कि अगर हम भाई दूज पर अपने भाइयों को शुभ मुहूर्त में तिलक करें तो यह अधिक शुभ माना जाता है। भाई दूज का शुभ मुहूर्त आज यानी 15 नवंबर को दोपहर 1:10 बजे से 3:19 बजे तक रहेगा। इस शुभ मुहूर्त में बहनें अपने भाइयों को तिलक कर सकती है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Govardhan Puja 2023: कब है गोवर्धन पूजा? जानिए पूजा की श्रेष्ठ मुहूर्त</title><link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/govardhan-puja-2023-when-is-govardhan-puja-know-the-best-time-for-worship/</link><pubDate>November 13, 2023, 1:44 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/11/download-9-4-300x169.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>रायपुर। देश भर में फेस्टिव सीजन की शुरआत हो चुकी है। ऐसे में 12 नवंबर को दिवाली मनाई गई है और अब बात करें गोवर्धन पूजा की तो चलिए जानते है कब है गोवर्धन पूजा? 12 नवंबर को देश में दिवाली तो मनाया गया लेकिन गोवर्धन पूजा की तिथि को लेकर दूसरी तरफ ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;रायपुर। &lt;/strong&gt;देश भर में फेस्टिव सीजन की शुरआत हो चुकी है। ऐसे में 12 नवंबर को दिवाली मनाई गई है और अब बात करें गोवर्धन पूजा की तो चलिए जानते है कब है गोवर्धन पूजा? 12 नवंबर को देश में दिवाली तो मनाया गया लेकिन गोवर्धन पूजा की तिथि को लेकर दूसरी तरफ लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से आपका भ्रम दूर करेंगे तो चलिए जानते है पूजा से जुड़ी तमाम जानकारी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;दिवाली पर्व के चौथे दिन गोवर्धन पूजा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;गोवर्धन पूजा पांच दिवसीय दिवाली पर्व के चौथे दिन की जाती है। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। घरों में इस दिन गोवर्धन पर्वत बनाया जाता है और इसके साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा तैयार की जाती है। इसके बाद गोवर्धन पर्वत और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा शाम के समय होती है और अन्नकूट और कढ़ी चावल का उन्हें भोग लगाया जाता है। इस साल लोगों में गोवर्धन पूजा की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। तो आइए आपको बताते हैं कि गोवर्धन पूजा कब की जाएगी और इस पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानें सही डेट और शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस बार 13 नवंबर दिन सोमवार को दोपहर 2:56 बजे से कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की आरंभ हो रही है और 14 नवंबर दिन मंगलवार को दोपहर 2:36 बजे समापन होगा। उदया तिथि को हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में 14 नवंबर को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाएगा। द्रिक पंचांग के मुताबिक प्रातः काल 14 नवंबर को सुबह 6:43 बजे से 08:52 बजे के बीच शुभ गोवर्धन पूजा का मुहूर्त है। ऐसे में दो घंटे नौ मिनट तक गोवर्धन पूजा के लिए पूजा का मुहूर्त रहेगा। घर के आंगन में गोवर्धन पूजा पर गोबर से गोवर्धन बनाकर पूजा की जाती है। प्रकृति की पूजा भी गोवर्धन पूजा को कहा जाता है, स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने इसकी शुरुआत की थी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह योग बन रहा है गोवर्धन पूजा पर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस बार शुभ योग गोवर्धन पूजा के दिन बन रहे हैं। गोवर्धन पूजा पर प्रात:काल से लेकर दोपहर 01 बजकर 57 मिनट तक शोभन योग है। अतिगंड योग उसके बाद से शुरू हो जाएगा। अतिगंड योग को शुभ नहीं माना जाता है। हालांकि एक शुभ योग शोभन योग को माना जाता है। इसके अलावा सुबह से ही गोवर्धन पूजा के दिन अनुराधा नक्षत्र होगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानें गोवर्धन पूजा की विधि&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुबह जल्दी उठकर गोवर्धन पूजा के दिन स्नानादि करें।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;फिर गाय के गोबर से शुभ मुहूर्त में गिरिराज गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं और इसके साथ ही गाय, बछड़े आदि की आकृति भी बनाएं।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;इसके बाद विधिवत पूजा धूप-दीप आदि से करें।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;दुग्ध से भगवान कृष्ण को स्नान कराने के बाद उनका पूजा-अर्चना करें।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;इसके बाद भगवान कृष्ण को अन्नकूट का प्रसाद अर्पित करें।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानिए गोवर्धन पूजा का महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;प्रकृति को समर्पित पर्व गोवर्धन पूजा को ही कहते है। माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन इंद्रदेव का घमंड तोड़ा था और अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। प्रकृति की सेवा और पूजा करने का संदेश लोगों को दिया था। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा का यह दिन था। उस दौरन से से ही इस दिन पर लोग गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना करते है और इस अवसर पर सभी तरह की मौसमी सब्जियों से तैयार अन्नकूट का प्रसाद भगवान को चढ़ाते है।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Dhanteras 2023: धनतेरस आज, जानें पूजन और खरीदारी का शुभ मुहूर्त</title><link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/dhanteras-2023-dhanteras-today-know-the-auspicious-time-for-worship-and-shopping/</link><pubDate>November 10, 2023, 10:49 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/11/download-4-1-300x225.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>रायपुर। देश भर में त्योहारों की धूम मची है। ऐसे में 10 नवंबर यानी आज लोग हर्षोल्लास के साथ धनतेरस मना रहे है। शुक्रवार से 125 वर्ष बाद दीपोत्सव पर्व की आरंभ पांच से अधिक महांसयोगों में होगी। इस विशेष अवसर पर लोग माता लक्ष्मी, कुबेर देवता और भगव...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;रायपुर।&lt;/strong&gt; देश भर में त्योहारों की धूम मची है। ऐसे में 10 नवंबर यानी आज लोग हर्षोल्लास के साथ धनतेरस मना रहे है। शुक्रवार से 125 वर्ष बाद दीपोत्सव पर्व की आरंभ पांच से अधिक महांसयोगों में होगी। इस विशेष अवसर पर लोग माता लक्ष्मी, कुबेर देवता और भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना करते है। धनतेरस के दिन लोग आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक सामान, प्रॉपर्टी, सोने-चांदी के सिक्के और बर्तन की खरीदारी करेंगे। प्रसिद्ध ज्योतिष पं.दामोदर प्रसाद शर्मा बताते है पर्व की महत्ता के लिए हस्त नक्षत्र, अमृत, प्रीति योग के साथ ही ग्रहों का विशेष महासंयोग खास होगा। शुक्रवार दोपहर 12.36 बजे से लेकर शनिवार दोपहर 1.58 बजे तक त्रयोदशी तिथि रहेगी। वहीं प्रदोष काल में यम के निमित्त दीप दान शाम 5.35 बजे बाद होगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आज मनाई जा रही धनतेरस&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि ज्यार्तिविद पं.घनश्यामलाल स्वर्णकार के अनुसार दीपोत्सव पर्व प्रदोषकाल शाम 5.35 से रात 8.13 बजे के बीच में मनाने की पौराणिक परंपरा है। अत: शुक्रवार यानी आज धनतेरस मनाया जा रहा है। धनतेरस पर अबूझ मुहूर्त बनने से वाहन, बर्तन, चांदी के आभूषण समेत अन्य खरीदारी करना अत्यंत शुभ माना गया है। धातु के बर्तन एवं सोने-चांदी आदि के आभूषण अपराह्न काल में खरीदना विशेष फलदायी रहेगा। आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरी की जयंती शनिवार को रहेगी। शनिवार को त्रयोदशी तिथि रहने से भी इस दिन खरीदारी कर सकते है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;काम की बातें &amp;#8211;&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ऐसे रहेंगे चौघड़िये-&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;चर का – बर्तन, वाहन क्रय, प्रापर्टी – सुबह 6.46 से 8.08 बजे तक&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;अमृत का लाभ – इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन, स्वर्ण आभूषण- सुबह 8.08 से 10.50 बजे तक&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;शुभ का- कपडे, इलेक्ट्रॉनिक सामान, चांदी के सिक्के, स्वर्ण आभूषण, बर्तन- दोपहर 12.11 से दोपहर 1.32 बजे तक&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;चर का – बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक सामान, चांदी के सिक्के, स्वर्ण आभूषण,&lt;br&gt;बर्तन – शाम 4.14 से शाम 5.35 बजे तक&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;प्रदोष काल का समय शाम 5.35 से रात 8.13 बजे तक&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इन मुहूर्तों में आप खरीदारी और दीपदान करते है तो श्रेष्ठ माना जाएगा&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;लाभ का -इलेक्ट्रॉनिक सामान, प्रॉपर्टी, चांदी के सिक्के, स्वर्ण आभूषण, बर्तन- शाम 8.53 बजे से रात 10.31 बजे तक&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूजन का मुहूर्त –&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;धनतेरस का शुभ पूजन मुहूर्त शाम 5:47 से लेकर शाम 7:43 तक रहेगा। इसकी अवधि 1 घंटा 56 मिनट होगी।&lt;/p&gt;
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