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400 रुपए बिक रहे है छत्तीसगढ़ के चावल ,विदेशों में भी बढ़ी मांग

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिलों के चावल आज कल काफी चर्चा में है। धान के कटोरे के नाम से जाना जाने वाला राज्य आजकल सोने के भाव बिक रहा है। जी हां आप सही पढ़ रहे है है दरअसल कोरबा जिला में काला चावल की खेती की जा रही है जिसकी डिमांड आजकल ना सिर्फ […]

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  • February 2, 2023 10:38 pm Asia/KolkataIST, Updated 2 years ago

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिलों के चावल आज कल काफी चर्चा में है। धान के कटोरे के नाम से जाना जाने वाला राज्य आजकल सोने के भाव बिक रहा है। जी हां आप सही पढ़ रहे है है दरअसल कोरबा जिला में काला चावल की खेती की जा रही है जिसकी डिमांड आजकल ना सिर्फ देशों में बल्कि विदेशों में भी बहुत डिमांड बढ़ती जा रही है।

जानें काला चावल की खासियत


बता दें कि कोवीड -19 के बाद सब लोग अपने रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना चाहते है ऐसे में लोग स्वस्थ और पोषक तत्वों वाले अन्न को खाना चाहते है। ऐसे ही कुछ औषधीय गुण इस चावल में भी है। जिसकी वजह से इसका देश-विदेश चारो तरफ डिमांड बढ़ रहा है।

130 एकड़ से शुरू हुई खेती

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के किसान काले चावल की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे है। इस साल 150 किसानों ने करीब 130 एकड़ में इसकी खेती की है। 2 साल पहले मात्र 10 एकड़ में इसकी शुरुआत हुई थी। जिले के करतला ब्लॉक में रहने वाले गिनती के किसानों ने दस एकड़ में काला चवल की फसल लगाई। फसल की बाजार में मांग बढ़ी और हाथों-हाथ फसल सामान्य धान से दोगुने कीमत पर बिक गई। इससे प्रोत्साहित होकर और किसानों ने खेती की। बीते वर्ष 100 एकड़ में करीब 25 टन काला चावल का उत्पादन किया गया। इसे कोलकाता की एक ट्रेडिंग कंपनी ने खरीदा है।

विदेशों में अब मांग बढ़ी

समिति के सदस्य व किसान इतवार बंजारे ने बताया कि इंडोनेशिया समेत कई देशों में भी काला चावल की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। कोरोना काल की वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की सलाह विशेषज्ञ दे रहे हैं। ऐसे में काला चावल स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी और पौष्टिक है। इसलिए न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी इस चावल की खपत बढ़ गई है। विदेशों से अभी तक कई डिमांड भी हमें मिले हैं।


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