रायपुर। हिंदू पंचांग के मुताबिक होली के साथ ही पुराने संवत्सर की समाप्ति होती है। इसके साथ ही चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नए संवत्सर की शुरुआत होती है। इसे हिंदू नववर्ष कहा जाता है। यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन से ही चैत्र नवरात्रि की शुरूआत होती है। हिंदू धर्म में चैत्र […]
रायपुर। हिंदू पंचांग के मुताबिक होली के साथ ही पुराने संवत्सर की समाप्ति होती है। इसके साथ ही चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नए संवत्सर की शुरुआत होती है। इसे हिंदू नववर्ष कहा जाता है। यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन से ही चैत्र नवरात्रि की शुरूआत होती है। हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि को अत्यंत शुभ और सृजनशीलता से परिपूर्ण माना जाता है।
चैत्र मास के साथ ही वसंत ऋतु का भी आगमन होता है। यह एक नए जीवन का संकेत देता है। इस समय प्रकृति में कई तरह के परिवर्तन होते हैं। वृक्षों में नई कोंपलें फूटती हैं, मौसम सुहावना हो जाता है। वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। ऐसे में नववर्ष की शुरुआत का यह सबसे अनुकूल समय माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही की थी। इसी दिन से कालगणना शुरू हो जाती है, इसलिए इसे नववर्ष के रूप में मनाया जाता है।
हिंदू नववर्ष का आरंभ विक्रम संवत से होता है, जिसकी शुरुआत राजा विक्रमादित्य ने की थी। उन्होंने मालवा में एक बड़े युद्ध में विजय प्राप्त की और इस दिन को नवसंवत्सर के रूप में मनाने का फैसला लिया। कई धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि भगवान राम का राज्याभिषेक भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हुआ था। महाभारत के मुताबिक इसी दिन युधिष्ठिर का राजतिलक भी हुआ था। माता दुर्गा ने राक्षसों का संहार करने के लिए इसी दिन नौ दिनों तक युद्ध किया था, जिससे नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।
चैत्र नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिससे भक्तों को आत्मबल, शक्ति और शुद्धता की प्राप्त होती है। यह समय आध्यात्मिक साधना और आत्मनिरीक्षण के लिए भी सर्वोत्तम माना जाता है।