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                    <title><![CDATA[आज है निर्जला एकादशी, जानें पारण का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
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                    <description><![CDATA[रायपुर। हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी हर साल ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। निर्जला एकादशी का व्रत सबसे कठिन व्रत होता है क्योंकि इसमें पानी पीना भी वर्जित होता है। मान्यताओं के मुताबिक पांडवों में भीमसेन ने भी निर्जला एकादशी का व्रत रखा था। जिस कारण से इसे भीमसेनी एकादशी भी [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-34.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी हर साल ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। निर्जला एकादशी का व्रत सबसे कठिन व्रत होता है क्योंकि इसमें पानी पीना भी वर्जित होता है। मान्यताओं के मुताबिक पांडवों में भीमसेन ने भी निर्जला एकादशी का व्रत रखा था। जिस कारण से इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से सभी एकादशियों के बराबर फल मिलता है।
<h2><strong>पारण का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
यह व्रत धर्म और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। इस दिन श्रद्धा और विधिपूर्वक व्रत रखने से आपको अच्छा स्वास्थ्य भी मिलता है। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। हिंदू पंचांग के मुताबिक एकादशी तिथि की शुरुआत 6 जून की रात में 2 बजकर 15 मिनट पर होगी। वहीं इसकी समाप्ति 7 जून को सुबह 4 बजकर 47 मिनट पर होगी। उदयातिथि के मुताबिक 6 जून को ही निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। निर्जला एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि को किया जाएगा। ऐसे में निर्जला एकादशी व्रत का पारण 7 जून को होगा। व्रत का पारण करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 44 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 31 मिनट तक का है।
<h3><strong>एकादशी की पूजा विधि</strong></h3>
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करें। उन्हें पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें। साथ ही श्री हरि और मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें। किसी गरीब को जल, अन्न या किसी वस्तु का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। जरूरत पड़ने पर इस दिन जल या फल का सेवन कर सकते हैं। सुबह और शाम के समय अपने गुरु या भगवान विष्णु की आराधना करें। संभव हो तो रात के समय जागरण करें। इस दिन ज्यादा से ज्यादा समय मंत्र जाप करने और ध्यान में लगाएं। जल के पात्र का दान करना विशेष शुभ होता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 10:14 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[आज से खुले केदारनाथ धाम के कपाट, बड़ी संख्या में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/the-doors-of-kedarnath-dham-opened-from-today-devotees-arrived-in-large-numbers-to-visit/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। उत्तराखंड के चारधाम में से एक केदारनाथ धाम के द्वार आज से खोले जा रहे हैं। श्रद्धालु शुक्रवार यानी आज से धाम में आराधना कर सकते हैं। केदारनाथ धाम भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। बाबा केदारनाथ के कपाट हर साल शीतकाल में भारी बर्फबारी की वजह से बंद कर दिए [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-34.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> उत्तराखंड के चारधाम में से एक केदारनाथ धाम के द्वार आज से खोले जा रहे हैं। श्रद्धालु शुक्रवार यानी आज से धाम में आराधना कर सकते हैं। केदारनाथ धाम भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। बाबा केदारनाथ के कपाट हर साल शीतकाल में भारी बर्फबारी की वजह से बंद कर दिए जाते हैं।
<h2><strong>7 बजे खुले मंदिर के कपाट</strong></h2>
ग्रीष्म ऋतु के आने के साथ ही केदारनाथ के कपाट खुलते हैं। बाबा केदारनाथ अपने भक्तों को आशीर्वाद देने आते हैं। आइए जानते हैं कि इस बार बाबा केदारनाथ धाम के द्वार खुलने का समय क्या है? बाबा के दरबार में दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इस बार केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई यानी आज से खोल जाएंगे। सुबह 7 बजे ही कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। इस खास अवसर पर भक्त बाबा केदारनाथ का आशीर्वाद लेने पहुंचे हैं। मंदिर परिसर में जयकारों की गूंज और ढोल-नगाड़ों की मधुर ध्वनि से मंदिर गूंज उठा।
<h3><strong>मंदिर को 108 क्विंटल से सजाया गया</strong></h3>
इस साल केदारनाथ मंदिर को खास तरीके से सजाया गया है। मंदिर को 108 क्विंटल फूलों से सजाया गया है। इसका नजारा देखते ही बनता है। मंदिर की इस आकर्षक सजावट को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। रंग-बिरंगे फूलों की सुगंध और भव्यता मंदिर को और भी दिव्य बना रही है। कपाट खुलने से पहले बाबा केदारनाथ की पवित्र डोली निकाली जाती है। 27 अप्रैल को ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में भैरवनाथ जी की पूजा के साथ इस यात्रा की शुरुआत हुई थी। इसके बाद बाबा केदार की डोली ने केदारनाथ धाम के लिए रवाना हुई।
<h3><strong>मंदिर को पुरानी विधि से खोला जाता है</strong></h3>
बाबा केदार की डोली 28 अप्रैल को गुप्तकाशी पहुंची। गुप्तकाशी से निकलने के बाद 29 अप्रैल को फाटा और 30 अप्रैल को गौरीकुंड पहुंची। 1 मई को बाबा केदार की डोली केदारनाथ पहुंची। केदारनाथ मंदिर के कपाट खोलने की विधि पुरानी परंपराओं के मुताबिक निश्चित की जाती है। द्वार खोले जाने के समय मंदिर परिसर में मौजूद भक्त बाबा के जयकारे लगाते हैं। साथ ही ढोल नगाड़े बजाकर खुशी मनाते हैं। इसके बाद भक्तों को बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए अंदर भेजा जाता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 10:14 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[आज है हनुमान जयंती, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
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                    <description><![CDATA[रायपुर। 12 अप्रैल यानी आज पूरे देश में हनुमान जयंती मनाई जा रही है। इस दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। हनुमान जन्मोत्सव का पर्व हिंदू धर्म में धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान हनुमान को शक्ति, भक्ति और सेवा का प्रतीक माना जाता है। हनुमान जयंती के दिन बजरंगबली की विधि-विधान से पूजा [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-34.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> 12 अप्रैल यानी आज पूरे देश में हनुमान जयंती मनाई जा रही है। इस दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। हनुमान जन्मोत्सव का पर्व हिंदू धर्म में धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान हनुमान को शक्ति, भक्ति और सेवा का प्रतीक माना जाता है। हनुमान जयंती के दिन बजरंगबली की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
<h2><strong>हनुमान जयंती की पूजा विधि</strong></h2>
हनुमान जयंती के दिन बजरंगबली की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं, क्योंकि उन्हें अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों का वरदान की प्राप्ति है। यह पावन पर्व हर साल चैत्र महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक इस साल हनुमान जन्मोत्सव की शुरुआत 12 अप्रैल यानी आज से है।जयंती के दिन भगवान संकटमोचन की आराधना करने के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 3 बजकर 21 मिनट से शुरू होगा, जिसकी समाप्ति 13 अप्रैल यानी कल सुबह 5 बजकर 51 मिनट होगी।
<h2><strong>हनुमान जयंती के लाभ</strong></h2>
हनुमान जी को भगवान राम का परम भक्त माना जाता है। वे सभी के संकटों को हर लेते हैं, इसलिए उन्हें संकटमोचन कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक उनकी पूजा करने से भय, नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों का विनाश होता है। आज के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना लाभ देता है। इस दिन हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।
<h2><strong>हनुमान जयंती की पूजा विधि</strong></h2>
हनुमान जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ होता है। इसके बाद हनुमान को सिंदूर, लाल रंग के फूल, तुलसी अर्पित करनी चाहिए। इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। इस दिन पूजा करते समय भगवान से अपनी गलतियों के लिए माफी मांगें। कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं। भगवान हनुमान की आरती उतारें। आरती उतारने के बाद उन्हें मीठी बूंदी का भोग लगाएं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 10:14 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[आज है महावीर जयंती, जानें पूजा विधि और उनके संस्कार]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/today-is-mahavir-jayanti-know-the-method-of-worship-and-his-rituals/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। जैन धर्म में महावीर जयंती का बहुत महत्व होता है। इस पावन पर्व को बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। भगवान महावीर जैन धर्म के आखिरी आध्यात्मिक लीडर  थे। भगवान महावीर का जन्म 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व में बिहार की धरती पर हुआ था। भगवान महावीर रानी त्रिशला और राजा सिद्धार्थ के [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-34.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> जैन धर्म में महावीर जयंती का बहुत महत्व होता है। इस पावन पर्व को बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। भगवान महावीर जैन धर्म के आखिरी आध्यात्मिक लीडर  थे। भगवान महावीर का जन्म 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व में बिहार की धरती पर हुआ था। भगवान महावीर रानी त्रिशला और राजा सिद्धार्थ के बेटे थे। 30 साल की उम्र में उन्होंने सब कुछ त्यागकर आध्यात्मिक का रास्ता अपना लिया।
<h2><strong>महावीर जयंती की पूजा विधि</strong></h2>
जैन धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है महावीर जयंती। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर महावीर जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान महावीर की मूर्ति के साथ जुलूस निकाला जाता है। साथ ही धार्मिक गीत गाए जाते हैं। इस साल 10 अप्रैल, गुरुवार को भगवान महावीर जयंती मनाई जा रही है। इस पर्व को जैन समुदाय के लोग बड़े ही धूमधाम के साथ मनाते हैं।
<h2><strong>भगवान महावीर के 5 संस्कार</strong></h2>
महावीर जयंती के शुभ मुहूर्त की बात करें तो 9 अप्रैल 2025 को सुबह 10 बजकर 55 मिनट पर शुभ मुहूर्त की शुरुआत होगी। इस मुहूर्त में भगवान महावीर की विधिपूर्वक पूजा की जाएगी। वहीं इस शुभ मुहूर्त की समाप्ति 11 अप्रैल 2025 को 1 बजे समाप्त होगी। अहिंसा, ईमानदारी, सत्य, ब्रह्मचर्य, गैर भौतिक चीजों से दूरी। महावीर जयंती के दिन जैन धर्म के लोग व्रत रखते हैं। साथ ही जैन ग्रंथों का पाठ करते हैं। अहिंसा और शाकाहारी भोजन को बढ़ावा देते हैं।
<h2><strong>शांति को बढ़ावा देने का कदम</strong></h2>
इसके लिए वह कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। महावीर जयंती का जैन धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार है। यह त्योहार केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है बल्कि मानवता, शांति और नैतिक जीवन को बढ़ावा देने के लिए एक अहम कदम है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 10:14 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[मंगलवार के दिन भूलकर भी न करें ये काम, वरना हनुमान जी हो सकते हैं नाराज]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/dont-do-this-work-on-tuesday-otherwise-hanuman-ji-may-get-angry/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित होता है। मंगलवार के दिन हनुमान जी विधिपूर्वक पूजा की जाती है। इस दिन व्रत करने और हनुमान जी की पूजा करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। इसके अतिरिक्त, इस दिन व्रत रखने से कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति में सुधार होता है। मंगलवार के [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-34.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित होता है। मंगलवार के दिन हनुमान जी विधिपूर्वक पूजा की जाती है। इस दिन व्रत करने और हनुमान जी की पूजा करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। इसके अतिरिक्त, इस दिन व्रत रखने से कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति में सुधार होता है। मंगलवार के व्रत में महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना जरूरी है। अगर इन बातों का ध्यान नहीं रखा जाए तो हनुमान जी नाराज हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि मंगलवार के दिन क्या नहीं करना चाहिए।
<h2><strong>तामसिक भोजन का परहेज</strong></h2>
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा की जाती है। ऐसे में जो व्यक्ति हनुमान की आराधना या व्रत रखते हैं, उन्हें तामसिक भोजन जैसे मांस- मछली, लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए। हनुमान जी ब्रह्मचारी और सात्विक भगवान हैं, इसलिए मंगलवार के दिन केवल सात्विक भोजन का ही सेवन करना चाहिए।
<h2><strong>गंदगी नहीं करनी चाहिए</strong></h2>
हनुमान जी की पूजा के लिए शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से शुद्ध होना जरूरी है। बिना स्नान किए इनकी पूजा नहीं करना चाहिए। साथ ही मंदिर को गंदा नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से भगवान हनुमान नाराज हो जाते हैं। ऐसे में पूजा से पहले मन और तन को शुद्ध करना चाहिए। साथ ही स्नान करके मंदिर को साफ करें।
<h2><strong>दिखावे के लिए पूजा न करें</strong></h2>
कई व्यक्ति केवल दिखावे या दूसरों को प्रभावित करने के लिए हनुमान जी की पूजा करते हैं। हनुमान जी को सच्ची भक्ति और विनम्रता ही खुश कर सकती है। ऐसे में पूजा करते समय मन में भक्ति का भाव रखना चाहिए। न कि दिखावे के लिए पूजा करनी चाहिए।
<h2><strong>हनुमान चालीसा का पाठ करें</strong></h2>
हनुमान चालीसा का पाठ दिन के किसी भी समय कर सकते हैं, लेकिन रात के समय इसे करने के लिए कुछ खास नियमों का पालन करना होता है। रात में इसे ऊंचे स्वर में नहीं पढ़ना चाहिए। साथ ही पढ़ते समय ध्यान केंद्रित करना चाहिए। हो सके तो किसी शांत स्थान पर ही इसका पाठ करें।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 10:14 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[आज है कामदा एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/today-is-kamada-ekadashi-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। आज चैत्र शुक्ल एकादशी है। इसे कामदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस कामदा एकादशी का खास महत्व होता है। यह हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी होती है। ऐसा माना जाता है कि कामदा एकादशी पर व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इस दिन व्रत [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-34.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> आज चैत्र शुक्ल एकादशी है। इसे कामदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस कामदा एकादशी का खास महत्व होता है। यह हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी होती है। ऐसा माना जाता है कि कामदा एकादशी पर व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इस दिन व्रत करने से पापों का भी नाश होता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है। अगर आप भी कामदा एकादशी का व्रत रख रहे हैं, तो आपको कामदा एकादशी के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में जानना चाहिए।
<h2><strong>कामदा एकादशी का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
कामदा एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त की शुरुआत सुबह 4 बजकर 32 मिनट पर होगी। वहीं इसकी समाप्ति 5 बजकर 18 मिनट पर होगी। अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 58 मिनट पर शुरू होगा और 12 बजकर 48 मिनट पर खत्म होगा। विजय मुहूर्त की बात करें तो विजय मुहूर्त दोपहर को ढाई बजे शुरू होगा और इसकी समाप्ति 3 बजकर 20 मिनट पर होगी। कामदा एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर करने का विधान है। कामदा एकादशी का पारण करने का शुभ मुहूर्त 09 अप्रैल को सुबह 06 बजकर 02 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 34 मिनट तक के बीच का है।
<h2><strong>कामदा एकादशी की पूजा विधि</strong></h2>
ब्रह्म मुहूर्त में सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। स्नान करने के बाद पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए। इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ होता है। अगर आप व्रत रखना चाहते हैं तो व्रत का संकल्प लें। मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करें। उनकी प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करें। इसके बाद उन्हें पीले रंग के वस्त्र, चंदन, तिलक और पीले फूल अर्पित करें। प्रतिमा पर तुलसी जरूर चढ़ाएं। कामदा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें। आखिर में भगवान की आरती उतारें। उन्हें मीठे का भोग लगाएं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 10:14 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[आज है नवरात्रि का सातवां दिन, इस दिन मां कालरात्रि की पूजा विधि और स्वरूप]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/today-is-the-seventh-day-of-navratri-on-this-day-the-worship-method-and-form-of-maa-kalratri/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। आज नवरात्रि का चौथा दिन है। यह दिन मां कालरात्रि को समर्पित होता है। इस दिन मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा की जाती है। उन्हें अंधकार को मिटाने वाली देवी भी कहा जाता है। जिन लोगों के घरों में अष्टमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है। वह लोग आज यानी 4 अप्रैल [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-34.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> आज नवरात्रि का चौथा दिन है। यह दिन मां कालरात्रि को समर्पित होता है। इस दिन मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा की जाती है। उन्हें अंधकार को मिटाने वाली देवी भी कहा जाता है। जिन लोगों के घरों में अष्टमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है। वह लोग आज यानी 4 अप्रैल के दिन व्रत करते हैं।
<h2><strong>मां कालरात्रि का स्वरुप</strong></h2>
ऐसा माना जाता है कि माता कालरात्रि की पूजा करने से सभी तरह की नकारात्मक शक्तियों का नाश होता हैं। मां कालरात्रि दुर्गा के शक्तिशाली स्वरूप में से एक हैं। मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना का खास महत्व होता है। मां कालरात्रि का स्वरूप बेहद उग्र है। ऐसी मान्यता है कि देवी की पूजा करने और व्रत करने से सभी प्रकार के भय का नाश होता है। जब धरती पर पाप बढ़ जाता है, तब वे पापियों को नाश करने के लिए अवतार लेती हैं। जो भक्त उनकी सच्चे दिल से पूजा करते हैं, उन पर मां कालरात्रि की कृपा हमेशा बनी रहती हैं और उन्हें अकाल मृत्यु का कोई भय नहीं रहता।
<h2><strong>मां कालरात्रि की पूजा विधि</strong></h2>
आज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। स्नान करने के बाद मां कालरात्रि की प्रतिमा को स्थापित करना चाहिए। प्रतिमा के सामने दीप प्रज्वलित करना चाहिए। माता को रोली, फल, अक्षत, पुष्प आदि अर्पित करना चाहिए। इस दिन मां दुर्गा के साथ देवी कालरात्रि के स्वरूप का भी ध्यान करें। देवी को लाल रंग के फूल अधिक प्रिय होत हैं, इसलिए गुड़हल या गुलाब का फूल चढ़ाने से वह प्रसन्न होती हैं। माता को गुड़ का भोग लगाना चाहिए। इसके बाद दीप, धूप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करना चाहिए। मां काली के मंत्र का उच्चारण करें।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 10:14 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
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                    <title><![CDATA[चैत्र नवरात्र में भूलकर भी न करें ये काम, वरना मां दुर्गा हो जाएंगी नाराज]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/do-not-do-this-work-even-by-mistake-during-chaitra-navratri-otherwise-maa-durga-will-get-angry/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। आज चैत्र नवरात्र का चौथा दिन है। यह दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरुप मां कूष्मांडा को समर्पित होता है। इन दिन मां कूष्मांडा की विधि-विधान से पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्र में लोग 9 दिन व्रत रखते हैं। 10वे दिन यानी दशमी को पारण किया जाता है। इस बार 8 दिन की [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-34.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> आज चैत्र नवरात्र का चौथा दिन है। यह दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरुप मां कूष्मांडा को समर्पित होता है। इन दिन मां कूष्मांडा की विधि-विधान से पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्र में लोग 9 दिन व्रत रखते हैं। 10वे दिन यानी दशमी को पारण किया जाता है। इस बार 8 दिन की नवरात्रि है। चैत्र नवरात्रि में कुछ काम होते हैं, जिन्हें करने से बचना चाहिए। चैत्र नवरात्रि के दिन अगर इन कामों को करते है तो मां दुर्गा नाराज हो जाती है। आइए जानते हैं कि किन कामों को करने से बचना चाहिए।
<h2><strong>बाल- नाखून न काटें</strong></h2>
चैत्र नवरात्रि में 9 दिनों का पर्व होता है। इन 9 दिनों में बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए। ऐसा करने से मां दुर्गा नाराज हो जाती हैं। अगर आप चाहें तो 9 दिनों के बाद बाल और नाखून काट सकते है। ऐसा माना जाता है कि ये 9 दिन काफी पवित्र होते हैं। इन दिनों मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा की जाती है। ये 9 दिन तपस्या का समय होता है। ऐसे में नाखून और बाल काटने से ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा आने की संभावना होती है।
<h2><strong>मास-मदिरा खाने से बचें</strong></h2>
चैत्र नवरात्रि के दौरान भूलकर भी मास-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इन 9 दिनों में तामसिक भोजन का सेवन करने से मां दुर्गा और धन देवी लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। ये दिन व्रत और तप को समर्पित होते हैं। ऐसे में तामसिक भोजन यानी नॉनवेज व्यक्ति के अंदर क्रोध, अहंकार, आलस, ललसा की भावना पैदा करता है। नवरात्र में इनका सेवन करना पाप माना जाता है।
<h2><strong>घर में गंदगी- अंधेरा न रखें</strong></h2>
चैत्र नवरात्र में घर में गंदगी और अंधेरा नहीं रखना चाहिए। इन दिनों घरों में मां दुर्गो का स्थापित किया जाता है। जहां घर में गंदगी और अंधेरा होता है वहां मां दुर्गा वास नहीं करतीं। साथ ही घरों में गंदगी करने से मां दुर्गा नाराज हो जाती है और वापस चली जाती है। घर में गंदगी या अंधेरा रखना मां दुर्गा को नाराज करना है। मां दुर्गा के आगमन के लिए घरों में साफ-सफाई और रोशनी की व्यवस्था की जाती है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 10:14 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
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                    <title><![CDATA[सूर्य ग्रहण के बाद इस तरह करें घर का शुद्धिकरण, नहीं पड़ेगा नकारात्मक असर]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/after-the-solar-eclipse-purify-the-house-in-this-way-it-will-not-have-any-negative-effect/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। भारत में ग्रहण लगना न केवल एक खगोलीय घटना होती है, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी इसे महत्वपूर्ण माना जाता है। जब सूर्य या चंद्र ग्रहण लगता है, तो इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, जिसे कम करने के लिए खास नियमों का पालन किया जाता है। इस साल [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-34.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> भारत में ग्रहण लगना न केवल एक खगोलीय घटना होती है, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी इसे महत्वपूर्ण माना जाता है। जब सूर्य या चंद्र ग्रहण लगता है, तो इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, जिसे कम करने के लिए खास नियमों का पालन किया जाता है। इस साल का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च 2025 को लगेगा।
<h2><strong>दुनिया के कई हिस्सों में दिखेगा प्रभाव</strong></h2>
यह एक आंशिक सूर्य ग्रहण होगा, जो भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए, इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। हालांकि दुनिया के कई हिस्सों में यह ग्रहण कुछ घंटों तक प्रभावी रहेगा।
हिंदू धर्मशास्त्रों के मुताबिक ग्रहण समाप्त होने के बाद घर, मंदिर और स्वयं का शुद्धिकरण आवश्यक होता है ताकि वातावरण की नकारात्मकता समाप्त हो जाए। आइए जानते हैं ग्रहण समाप्त होने के बाद किन परंपराओं का पालन करना चाहिए।
<h2><strong>पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें</strong></h2>
ग्रहण समाप्त होते ही सबसे पहले पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। मान्यता है कि गंगाजल शुद्ध और पवित्र होता है और इस पर ग्रहण का कोई असर नहीं पड़ता। इसलिए ग्रहण के प्रभाव को समाप्त करने के लिए घर के हर कोने, मंदिर और पूजा स्थान पर गंगाजल का छिड़काव किया जाता है। साथ ही, मंदिर की सफाई भी की जाती है, उसे भी पहले स्वयं पर गंगाजल छिड़ककर खुद को शुद्ध करें।
<h2><strong>मूर्तियों की सफाई करें</strong></h2>
ग्रहण समाप्त होने के बाद घर के मंदिर में स्थापित सभी देवी-देवताओं की मूर्तियों को अच्छे से धोना जरूरी होता है। मूर्तियों की सफाई के लिए नींबू, चंदन, दही और गाय के दूध का इस्तेमाल कर सकते है। यदि मूर्तियों पर वस्त्र चढ़ाए गए हैं, तो उन्हें बदलना जरूरी होता है। सूतक काल के दौरान भगवान पर जो वस्त्र रहते हैं, उन्हें दोबारा नहीं पहनाया जाता, बल्कि उन्हें विसर्जित कर दिया जाता है।
<h2><strong>वस्त्र को विसर्जित करें</strong></h2>
ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर में उपयोग किए जाने वाले सभी बर्तनों की अच्छे से सफाई करें। भगवान को भोग लगाने वाले थाल, कलश, दीपक, शंख, त्रिशूल, घंटी, आदि सभी पूजा सामग्रियों को अच्छे से शुद्धि करना जरूरी होता है। यदि ग्रहण के दौरान मंदिर को किसी वस्त्र से ढका गया था, तो उसे बहते पानी में प्रवाहित करने की परंपरा होती है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 10:14 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[शनि अमावस्या पर करें ये टोटके, मिलेगी जीवन में सफलता]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/do-these-tricks-on-shani-amavasya-you-will-get-success-in-life/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। शनि अमावस्‍या 29 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन बेहद शुभ योग बन रहा है। शनि अमावस्‍या के दिन इस बार शनि का राशि परिवर्तन होने जा रहा है। शनिदेव करीब ढाई साल बाद अपनी राशि को छोड़कर मीन राशि में प्रवेश कर रहे हैं। शनि अमावस्‍या का महत्‍व पितरों को प्रसन्न करने के [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-34.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> शनि अमावस्‍या 29 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन बेहद शुभ योग बन रहा है। शनि अमावस्‍या के दिन इस बार शनि का राशि परिवर्तन होने जा रहा है। शनिदेव करीब ढाई साल बाद अपनी राशि को छोड़कर मीन राशि में प्रवेश कर रहे हैं। शनि अमावस्‍या का महत्‍व पितरों को प्रसन्न करने के लिए भी खास माना जाता है।
<h2><strong>शनि अमावस्या पर करें अचूक उपाय</strong></h2>
मान्‍यता है कि इस दिन पितरों के नाम से दीपदान करने से उनका आशीर्वाद मिलता है। साथ ही उनकी आत्‍मा को शांति मिलती है। आइए जानते हैं शनि अमावस्‍या के कुछ ऐसे उपाय के बारे में जिनको करने से आपको धन वृद्धि के साथ ही सुख- शांति भी मिलेगी।
<h2><strong>प्रतिमा पर तेल चढ़ाएं</strong></h2>
शनि अमावस्या के दिन शनि देव की प्रतिमा पर सरसों या तिल का तेल चढ़ाना चाहिए। तेल चढ़ाते समय "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। ऐसा करने से शनि देव का आशीर्वाद मिलता है। इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस दिन काले तिल और सरसों के तेल का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। इस उपाय को करने से धन में सदैव वृद्धि होती है।
<h2><strong>आटे की गोलियां चीटियों को खिलाएं</strong></h2>
शनि अमावस्या के दिन काले तिल, उड़द की दाल या लोहे का दान करना शुभ होता है। इस दिन गुड़ और आटे की गोलियां बनाकर चीटियों को खिलाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इससे शनि दोष कम होता है और धन लाभ बढ़ता है। इसके साथ ही शनि अमावस्या पर आटे की गोलियां बनाकर तालाब में जाकर मछलियों को खिलाने से आपके ऊपर शनि की अशुभ दशा का प्रभाव कम होता है।
<h2><strong>घी या तेल का दीपक जलाएं</strong></h2>
शनि अमावस्‍या के दिन शाम को एक दीपक पीपल के पेड़ के पास जलाएं। साथ ही एक दीपक घर के मुख्‍य द्वार के बाईं जलाने से भी लाभ होगा। ऐसा माना जाता है कि मुख्‍य द्वार पर दीपक जलाने से मां लक्ष्‍मी आकर्षित होती हैं। शनि अमावस्‍या के दिन शाम को एक दीपक भगवान शिव के मंदिर में जाकर भी रखें। एक दीपक घर में दक्षिण दिशा में जरूर जलाकर रखें। ऐसा करने से आपके पितर आपसे प्रसन्न होते हैं।
<h2><strong>काली वस्तु या जूते का दान करें</strong></h2>
शनि अमावस्‍या पर शनि की प्रिय वस्‍तुएं गरीब या जरूरतमंद को दान करने से शनि महाराज प्रसन्‍न होते हैं। शनि अमावस्‍या पर इस बार सवा किलो काली उड़द का दान करने से आपको फायदा मिलेगा। इसके साथ ही किसी गरीब को काले जूते भी दान कर सकते हैं। इस उपाय को देखकर शनि महाराज आपसे बेहद प्रसन्न होंगे और आपको सुखी रहने का आशीर्वाद देंगे।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 10:14 am</pubDate>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[जिंदगी में कभी ना लें ये चीजें मुफ्त, नहीं तो परिवार का होगा नाश]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/never-take-these-things-for-free-in-life-otherwise-your-family-will-be-destroyed/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। कुछ लोगों में आदत होती है कि वह एक दूसरे से काफी चीजें फ्री में ले लेते हैं। कई बार ऐसा करना ठीक नहीं होता है। कभी-कभी ये आपके लिए परेशानी का कारण बन जाता है। इससे आप बड़ी मुसीबत में फंस सकते है। नमक वास्तु शास्त्र के मुताबिक कुछ ऐसी होती है जिन्हें [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-34.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> कुछ लोगों में आदत होती है कि वह एक दूसरे से काफी चीजें फ्री में ले लेते हैं। कई बार ऐसा करना ठीक नहीं होता है। कभी-कभी ये आपके लिए परेशानी का कारण बन जाता है। इससे आप बड़ी मुसीबत में फंस सकते है।
<h2><strong>नमक</strong></h2>
वास्तु शास्त्र के मुताबिक कुछ ऐसी होती है जिन्हें कभी भी किसी से मुफ्त में नहीं लेनी चाहिए। इन्हीं में से एक चीज है नमक। नमक आपको कभी मुफ्त में नहीं लेना चाहिए। नमक का संबंध शनिदेव से होता है। किसी भी कारण से आपको किसी से मुफ्त में नमक नहीं लेना चाहिए। अगर आप किसी से नमक ले भी रहे तो इसके बदले हमेशा कुछ दान करना चाहिए।
ऐसा माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति फ्री में नमक ले रहा है तो इस वजह से उसके जीवन में रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही आप कर्ज में डूबने लगते है।
<h2><strong>सुई</strong></h2>
किसी से मुफ्त में नमक लेना आपके जीवन की समस्या को बढ़ सकते है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक नमक के अलावा सुई भी है जो कभी भी मुफ्त में नहीं लेना चाहिए। ना ही मुफ्त में ली हुई सुई का इस्तेमाल करना चाहिए। अगर आप दूसरे व्यक्ति से मुफ्त में सुई लेते हो इससे आपके जीवन में नकारात्मकता का संचार होता है। आपके परिवार के प्रेम संबंध खराब होने लगते है। मुफ्त की सुई का इस्तेमाल करने से आपके जीवन की खुशहाल जिंदगी धीरे-धीरे बर्बाद हो जाती है।
<h2><strong>रुमाल</strong></h2>
वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी आदमी को कभी भी किसी का रुमाल नहीं लेना चाहिए। किसी की लिया हुआ रुमाल आपके लिए खतरनाक हो सकता है। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि किसी का मुफ्त में लिया हुआ रुमाल इस्तेमाल भी ना करें वरना आप भारी मुसीबत में पड़ सकते है। किसी का लिया हुआ रुमाल इस्तेमाल करने से दोस्तों और परिवार के बीच गलतफहमी पैदा होने लगती है। रिश्तों में खटास आ जाती है। इतना ही नहीं बने-बनाए रिश्ते बिगड़ जाते है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 10:14 am</pubDate>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[कई राज्यों में आज मनाई जा रही होली, जानें इसके पीछे का मुख्य कारण]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/holi-is-being-celebrated-in-many-states-today-know-the-main-reason-behind-it/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। भारत में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया गया, लेकिन देश में कई जगह 15 मार्च 2025 को भी होली का त्योहार मनाया जा रहा है। होली का त्योहार खुशी और हर्षोल्लास लेकर आता है। यह त्योहार रंगों, प्रेम और आपसी भाईचारे का प्रतीक है। हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली मनाई [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-34.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> भारत में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया गया, लेकिन देश में कई जगह 15 मार्च 2025 को भी होली का त्योहार मनाया जा रहा है। होली का त्योहार खुशी और हर्षोल्लास लेकर आता है। यह त्योहार रंगों, प्रेम और आपसी भाईचारे का प्रतीक है। हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली मनाई जाती है। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हैं।
<h2><strong>उदया तिथि को मनाई जाएगी होली</strong></h2>
साथ ही खुशियों बांटते हैं। झारखंड, छत्तीसगढ़ में त्योहारों का आयोजन आमतौर पर उदया तिथि के मुताबिक किया जाता है। इसी कारण इस साल भी 15 मार्च को होली मनाई जा रही है। मिथिला पंचांग के विशेषज्ञों ने बताया कि बनारस में होली आमतौर पर एक दिन पहले मनाई जाती है। इसके बाद बिहार में होली का उत्सव मनाया जाता है। बिहार में होली चैत्र प्रतिपदा के दिन मनाई जाती है, जो कि 14 मार्च को थी। 14 मार्च को होली 12:26 बजे से प्रारंभ हो गई। इस संदर्भ में विद्वानों ने यह निर्णय लिया है कि 15 मार्च को उदया तिथि के मौके पर होली का पर्व मनाया जाएगा।
<h2><strong>होली से जुड़ी पौराणिक कथा</strong></h2>
होली का संबंध पौराणिक कथाओं से संबंधित है। जिसमे से एक पौराणिक कथा भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु से जुड़ा है। इस त्योहार का सबसे प्रसिद्ध प्रसंग हिरण्यकशिपु एक अहंकारी राजा था, जो अपने पुत्र प्रह्लाद की भगवान विष्णु के प्रति भक्ति से चिंतित था। उसने अपनी बहन होलिका की मदद से प्रह्लाद को मारने के बारे में सोचा। होलिका के पास एक ऐसा वरदान था कि वह आग में नहीं जल सकती।
<h2><strong>रंगों से खेलते है होली</strong></h2>
वह प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ गई, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से होलिका जल गई लेकिन प्रह्लाद बच गए। तभी से होलिका दहन की परंपरा शुरू हुई, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। होली का मुख्य आकर्षण रंगों से खेली जाने वाली होली है, इसे धुलेंडी भी कहा जाता हैं। इस दिन लोग एक-दूसरे पर रंग लगाकर इस त्योहार को मनाते हैं। बच्चे पिचकारी और पानी के गुब्बारों से होली खेलते हैं। वहीं बड़े लोग एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर त्योहार की शुभकामनाएं देते हैं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 10:14 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/holi-is-being-celebrated-in-many-states-today-know-the-main-reason-behind-it/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
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                    <title><![CDATA[होली के बाद ही क्यों शुरू होता है हिंदू नववर्ष, जानें इसके पीछे की वजह]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/why-does-the-hindu-new-year-start-only-after-holi-know-the-reason-behind-it/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। हिंदू पंचांग के मुताबिक होली के साथ ही पुराने संवत्सर की समाप्ति होती है। इसके साथ ही चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नए संवत्सर की शुरुआत होती है। इसे हिंदू नववर्ष कहा जाता है। यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन से ही चैत्र नवरात्रि की शुरूआत होती है। हिंदू धर्म में चैत्र [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-34.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> हिंदू पंचांग के मुताबिक होली के साथ ही पुराने संवत्सर की समाप्ति होती है। इसके साथ ही चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नए संवत्सर की शुरुआत होती है। इसे हिंदू नववर्ष कहा जाता है। यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन से ही चैत्र नवरात्रि की शुरूआत होती है। हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि को अत्यंत शुभ और सृजनशीलता से परिपूर्ण माना जाता है।
<h2><strong>प्रकृति में आते हैं कई परिवर्तन</strong></h2>
चैत्र मास के साथ ही वसंत ऋतु का भी आगमन होता है। यह एक नए जीवन का संकेत देता है। इस समय प्रकृति में कई तरह के परिवर्तन होते हैं। वृक्षों में नई कोंपलें फूटती हैं, मौसम सुहावना हो जाता है। वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। ऐसे में नववर्ष की शुरुआत का यह सबसे अनुकूल समय माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही की थी। इसी दिन से कालगणना शुरू हो जाती है, इसलिए इसे नववर्ष के रूप में मनाया जाता है।
<h2><strong>क्यों मनाई जाती है नवरात्रि</strong></h2>
हिंदू नववर्ष का आरंभ विक्रम संवत से होता है, जिसकी शुरुआत राजा विक्रमादित्य ने की थी। उन्होंने मालवा में एक बड़े युद्ध में विजय प्राप्त की और इस दिन को नवसंवत्सर के रूप में मनाने का फैसला लिया। कई धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि भगवान राम का राज्याभिषेक भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हुआ था। महाभारत के मुताबिक इसी दिन युधिष्ठिर का राजतिलक भी हुआ था। माता दुर्गा ने राक्षसों का संहार करने के लिए इसी दिन नौ दिनों तक युद्ध किया था, जिससे नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।
<h2><strong>नौ स्वरूपों की पूजा </strong></h2>
चैत्र नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिससे भक्तों को आत्मबल, शक्ति और शुद्धता की प्राप्त होती है। यह समय आध्यात्मिक साधना और आत्मनिरीक्षण के लिए भी सर्वोत्तम माना जाता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 10:14 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[जीवन में आ रही है मुश्किलें, होलिका में दहन करें ये चीजें, दूर होंगे सारे कष्ट]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/difficulties-are-coming-in-life-burn-these-things-in-holika-all-troubles-will-go-away/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। भारतीय नव संवत्सर चैत्र शुक्ल की शुरूआत हो जा रही है। इसके लिए पुराने संवत्सर को विदाई देने और इसकी नकारात्मकता को समाप्त करने के लिए &#8220;होलिका दहन&#8221; किया जाता है। होली से पहले होलिका दहन का पर्व आता है। होलिका दहन इस बार 13 मार्च यानी आज है। इसे संवत जलाना के नाम [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-34.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> भारतीय नव संवत्सर चैत्र शुक्ल की शुरूआत हो जा रही है। इसके लिए पुराने संवत्सर को विदाई देने और इसकी नकारात्मकता को समाप्त करने के लिए "होलिका दहन" किया जाता है। होली से पहले होलिका दहन का पर्व आता है। होलिका दहन इस बार 13 मार्च यानी आज है। इसे संवत जलाना के नाम से भी जाना जाता है। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत है।
<h2><strong>बुराई पर अच्छाई की जीत</strong></h2>
ऐसा माना जाता है कि बुराई पर अच्छाई के विजय के रुप में होलिका दहन की जाती है। होलिका दहन में किसी वृक्ष की शाखा को जमीन में गाड़ कर उसके चारों ओर से लकड़ी कंडे उपले से घेर कर दिया जाता है, जिसे शुभ मुहूर्त में जलाया जाता है। होलिका दहन में छेद वाले गोबर के उपले, गेंहू की नयी बालियां और उबटन को दहन किया जाता है, ताकि वर्षभर व्यक्ति को आरोग्य की प्राप्ति हो। साथ जीवन की सारी बुरी बलाएं आग में जलकर भस्म हो जाए।
<h2><strong>चैतन्य महाप्रभु का जन्म</strong></h2>
होलिका जलने के बाद उसकी राख को घर में लाया जाता है। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन श्री चैतन्य महाप्रभु का जन्म हुआ था, उनको श्री कृष्ण का अवतार माना जाता है। इस दिन श्री चैतन्य महाप्रभु की विधि-विधान से पूजा करने से कई तरह के लाभ मिलते हैं। होलिका दहन के दिन इन राशियों को इन चीजों को आग में डालना चाहिए।
<h2><strong>इस राशि के लोग करें इन चीजों को अर्पित</strong></h2>
<strong>मेष</strong>- मेष राशि वालों को होलिका में काला तिल डालना चाहिए। इससे स्वास्थ्य में बेहतरी आती है।

<strong>वृष</strong>- वृष राशि वालों को आग में मक्के का लावा डालना चाहिए। ऐसा करने से दांपत्य जीवन बेहतर होता है।

<strong>मिथुन</strong>- मिथुन राशि के लोगों को आग में गुड़ अर्पित करना चाहिए। गुड़ अर्पित करने से अपने नौकरी में आ रही मुश्किलें दूर होती है।

<strong>कर्क</strong>- होलिका में कर्क राशि वालों को अनाज की बालियां अर्पित करनी चाहिए। ऐसा करने से मन की समस्याएं दूर होती है।

<strong>सिंह</strong>- आपको होलिका में चन्दन की लकड़ी डालनी चाहिए और अपनी नौकरी व स्वास्थ्य में सुधार की प्रार्थना करनी चाहिए

<strong>कन्या</strong>- कन्या राशि वाले लोगों को अग्नि में काला तिल और गुड़ डालना चाहिए। इससे आत्मरक्षा बढ़ती है।

<strong>तुला</strong>- तुला राशि वालों होलिका में पीली सरसों अर्पित करनी चाहिए। इससे चंचल मन शांत होता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 10:14 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[छोटी होली में छाएगा भद्रा का साया, जानें किस समय करें होलिका दहन]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/bhadras-shadow-will-prevail-on-choti-holi-know-when-to-burn-holika/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। हर साल फाल्गुन पूर्णिमा की रात को होलिका दहन की जाती है। इस साल होलिका दहन 13 मार्च यानी आज की जाएगी। होलिका दहन को छोटी होली भी कहते है। होलिका दहन का त्योहार बुराई की अच्छाई पर जीत प्रतीक है। नकारात्मकता को समाप्त करने के लिए भी होलिका को दहन किया जाता है। [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-34.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> हर साल फाल्गुन पूर्णिमा की रात को होलिका दहन की जाती है। इस साल होलिका दहन 13 मार्च यानी आज की जाएगी। होलिका दहन को छोटी होली भी कहते है। होलिका दहन का त्योहार बुराई की अच्छाई पर जीत प्रतीक है। नकारात्मकता को समाप्त करने के लिए भी होलिका को दहन किया जाता है। होलिका दहन को संवत जलाना भी कहा जाता है।
<h2><strong>भद्रा काल का साया</strong></h2>
इस बार होलिका दहन के दिन भद्रा का साया है। इसलिए होलिका दहन के मुहूर्त को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन पैदा हो रही है। आइए आज जानते हैं कि होलिका दहन पर भद्रा का साया कब से कब तक रहेगा। भद्रा लगने की वजह से होलिका दहन का मुहूर्त क्या है, होलिका दहन से पूर्व पूजा का क्या विधान है।
<h2><strong>होलिका दहन का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होता है। इस बार भद्रा काल लगने की वजह से खास ध्यान दिया जा रहा है। भद्रा के साए में होलिका दहन करना अशुभ माना जाता है। इस बार पूर्णिमा तिथि 13 मार्च यानी आज सुबह 10.36 से लेकर 14 मार्च को दोपहर 12.23 तक रहेगी। पूर्णिमा के साथ ही भद्रा काल की शुरूआत हो जाएगी। भद्रा काल रात 11.26 तक रहेगा। भद्रा काल से बचते हुए 13 मार्च की रात को 11.27 के बाद होलिका को दहन किया जाएगा।
<h2><strong>होलिका दहन की पूजा विधि</strong></h2>
पूजा की थाली लेकर होलिका दहन वाली जगह पर जाएं। उस भूमि को चुमकर माथे से लगाएं। भूमि पर थोड़ा सा जल चढ़ाएं। इसके बाद उसी स्थान पर घी का दीपक जलाकर रखें। गोबर के उपले, हल्दी और काले तिल के दाने होलिका में चढ़ाएं। होलिका की तीन बार परिक्रमा करते हुए कलावा बांधें। फिर होलिका में सूखा हुआ नारियल चढ़ाएं। आखिर में घर के लोगों को और स्वयं को रोली या हल्दी का तिलक लगाएं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 10:14 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[शनिवार के दिन करें ये उपाय, शनि दोष में आएगी कमी]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/follow-these-remedies-on-saturday-shani-dosh-will-decrease/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। हिंदू धर्म में शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित होता है। इस दिन शनि देव की खास पूजा की जाती है। शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से शनि देव की पूजा करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं। साथ ही लोग शनिवार के दिन व्रत भी [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-34.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> हिंदू धर्म में शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित होता है। इस दिन शनि देव की खास पूजा की जाती है। शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से शनि देव की पूजा करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं। साथ ही लोग शनिवार के दिन व्रत भी रखते है ताकि परेशानियों से छुटकारा पा सके। ऐसे में अगर आप भी अपने जीवन में सुख, शांति, समृद्धि चाहते हैं, तो शनिवार के दिन ये 5 खास उपाय जरूर करें। आइए जानते है वो 5 उपाय

<strong>पत्तों से माला बनाए</strong>

शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के 11 पत्तों को इकट्ठा करके एक माला बनानी चाहिए। इस माला को शनि देव के मंदिर में चढ़ानी चाहिए। साथ ही उनके मंत्रों का जाप करना चाहिए। ‘ऊँ श्रीं ह्रीं शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करना। इस मंत्र का जाप करने से साढेसाती से निजात मिलता है।

<strong>धागे को पेड़ पर लपेटे</strong>

शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के चारों ओर कच्चे सूत का धागा लपेटना चाहिए। कच्चे सूत के धागे को 7 बार पीपल के पेड़ पर लपेटना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और वह आपके जीवन की सारी परेशानियों को दूर करते है और जीवन में सुधार लाते हैं।

<strong>काली चीजें अर्पित करें</strong>

शनिवार के दिन भगवान शनि को काला चने, काला कपड़ा और काली उड़द अर्पित करने चाहिए। साथ ही किसी गरीब और जरूरतमंद को दान करना चाहिए। यह बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे नकारात्मकता दूर चली जाती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

<strong>सरसों के तेल का दीपक जलाएं</strong>

शनिवार के दिन शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। शाम के समय शनि देव की प्रतिमा के आगे तेल का दीपक जलाना बहुत फायदेमंद होता है। इससे शनि देव प्रसन्न होकर घर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। दीपक जलाने से शनि दोष में भी कमी आती है।

<strong>गुन और चने का भोग रखें</strong>

शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे गुड़ और चने का भोग रखें। इस भोग को आप कौवों, कुत्तों या गरीबों में बांट सकते हैं। ऐसा करने से भाग्य चमकता है। करियर में आई सारी अड़चने दूर हो जाती है। और इससे शनि देव की कृपा प्राप्त होती है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 10:14 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[किस्मत बदलने से पहले आते हैं ये सपने, समझ जाइए दूर होने वाली है सभी परेशानी]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/these-dreams-come-before-the-change-in-fate-understand-that-all-the-problems-are-going-to-go-away/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर: स्वप्न शास्त्र के अनुसार कुछ सपने अच्छे समय के आने का संकेत देते हैं। वहीं, कुछ आपको भविष्य में आने वाली समस्याओं के प्रति भी आगाह करते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे सपनों के बारे में बताने जा रहे हैं जो आप अच्छा समय शुरू होने से पहले देखते हैं। भगवान का दिखना [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-34.jpg"/><strong>रायपुर:</strong> स्वप्न शास्त्र के अनुसार कुछ सपने अच्छे समय के आने का संकेत देते हैं। वहीं, कुछ आपको भविष्य में आने वाली समस्याओं के प्रति भी आगाह करते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे सपनों के बारे में बताने जा रहे हैं जो आप अच्छा समय शुरू होने से पहले देखते हैं।
<h2><strong>भगवान का दिखना</strong></h2>
शास्त्रों का मानना है कि सपने में भगवान को देखना एक शुभ संकेत देता है। ऐसे में अगर आप सपने में अपने इष्ट देव को खुश या मुस्कुराते हुए देखते हैं तो यह बहुत अच्छा संकेत माना जाता है। इसका मतलब है कि आपको जल्द ही कोई बड़ी खुशखबरी मिलने वाली है। वहीं अगर आप सपने में भगवान कृष्ण को बांसुरी बजाते हुए देखते हैं तो यह एक शुभ संकेत माना जाता है। क्योंकि स्वप्न शास्त्र में बताया गया है कि आपके जीवन में कुछ अच्छे बदलाव आने वाले हैं।
<h3><strong>शंख का दिखना</strong></h3>
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार शंख को बहुत ही पवित्र वस्तु माना जाता है। इसका संबंध धन की देवी यानी मां लक्ष्मी से माना जाता है। ऐसे में सपने में शंख देखना एक अच्छा संकेत माना जाता है। स्वप्न शास्त्र में इसे एक दुर्लभ सपना माना गया है, जिसे देखने का मतलब है कि जल्द ही आप पर देवी लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान विष्णु की भी कृपा होने वाली है।
<h3><strong>हाथी का दिखना</strong></h3>
अगर आप अपने सपनों में हाथी का सपना देखते हैं तो आपके जीवन में कुछ जल्द ही शुभ होने वाला है। इसका मतलब है कि आप जल्द ही धनवान बनने वाले हैं। इसी तरह अगर आप अपने सपने में खुद को उड़ते हुए देख रहे हैं तो आने वाले दिन में आपका समय काफी अच्छा होने वाला है। इसका एक मतलब यह भी है कि आपके साथ चल रही सभी परेशानी जल्द ही समाप्त हो जाएंगी।
<h3><strong>बारिश होते दिखना</strong></h3>
अगर आपको भी अपने सपने में बारिश होते हुए दिखता है तो यह काफी शुभ माना गया है। कहा जाता है कि यह सपना आपके लिए कोई न कोई गुड न्यूज़ ले कर आने वाला है। आपका रुका हुआ काम जल्द ही पूरा होने वाला है। जिसका आपको काफी लंबे से इंतजार हैं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 10:14 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[मस्तिष्क के विषाक्त होने का प्रमुख कारण, गंदा दिमाग पैदा करता है ये बीमारियां]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/the-main-reason-for-brain-getting-toxic-dirty-mind-causes-these-diseases/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। मस्तिष्क हमारे शरीर का सबसे ज्यादा उपयोगी अंग है। इसकी सुरक्षा हमारे जीवन की सुरक्षा है, लेकिन हम में से कितने लोग है जो इसका सही इस्तेमाल करते हैं। अधिकांश मनुष्य अज्ञानतावश मस्तिष्क का गलत इस्तेमाल करते हैं और उसकी महान सामर्थ्य के द्वारा मिलने वाले असाधारण से वंचित रह जाते हैं। विष पैदा [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-34.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> मस्तिष्क हमारे शरीर का सबसे ज्यादा उपयोगी अंग है। इसकी सुरक्षा हमारे जीवन की सुरक्षा है, लेकिन हम में से कितने लोग है जो इसका सही इस्तेमाल करते हैं। अधिकांश मनुष्य अज्ञानतावश मस्तिष्क का गलत इस्तेमाल करते हैं और उसकी महान सामर्थ्य के द्वारा मिलने वाले असाधारण से वंचित रह जाते हैं।
<h2><strong>विष पैदा करने वाले कारण</strong></h2>
मस्तिष्क को विष बना देने वाले कारणों में से एक चिंता है। माना जाता है कि चिन्ता चिता के समान होता है, जो जीवित मनुष्य को शुभ विचारों को जला देते है। चिन्ता के कारण मस्तिष्क में गर्मी बहुत बढ़ जाती है,जिससे सरलता और कोमलता को नष्ट कर देता है। चिंता दाह एवं उष्णता उत्पन्न करती है। चिन्ताशील मनुष्य का मस्तिष्कीय परीक्षण करने पर पाया गया है कि श्वेत बालुका और ग्रे मैटर सूखकर कड़े और ठोस हो जाते हैं। समस्त शरीर का शासन दिमाग द्वारा होता है, जब शासन-कर्ता जीर्ण-शीर्ण हो रहा हो तो राज्य में अव्यवस्था फैल जाना स्वभाविक है।
<h2><strong>निर्बल मस्तिष्क का दर्बल शरीर</strong></h2>
चिन्ता-ग्रस्त और निर्बल मस्तिष्क वाले शरीर का रोगी और दुर्बल होना स्वाभाविक है। ऐसे मनुष्य अधिक दिन जी सकेंगे, इस पर कौन विश्वास करेगा? जलन, गर्मी और खुश्की के कारण ऑक्सीजन जलता हैं और वे विषाक्त वायु (कार्बन) के रूप में परिवर्तत हो जाते हैं। चिंता के कारण भुनते हुए मस्तिष्क में से विषैले पदार्थों का प्रवेश होता है। वे पदार्थ खून के साथ मिलकर शरीर की अन्य धातुओं को भी जहरीला बना देते हैं।
<h3><strong>चिंता से बढ़ती है ये बीमारी</strong></h3>
पहले ही दिन वे मंदाग्नि उत्पन्न करते हैं, जिससे अन्य रोगों को बुलाते हुए। अंत में संग्रहणी, मधुमेह, कुष्ठ, क्षय, प्रमेह या ऐसे ही अन्य भयंकर रोगों तक को उत्पन्न करता है। लोग अपनी परेशानी को उस खुर्दबीन शीशे से देखते हैं, जिसमें से छोटी-सी चीज़ कई गुना बड़ी होकर दिखती है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 10:14 am</pubDate>
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