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                    <title><![CDATA[आज है कामदा एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
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                    <description><![CDATA[रायपुर। आज चैत्र शुक्ल एकादशी है। इसे कामदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस कामदा एकादशी का खास महत्व होता है। यह हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी होती है। ऐसा माना जाता है कि कामदा एकादशी पर व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इस दिन व्रत [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> आज चैत्र शुक्ल एकादशी है। इसे कामदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस कामदा एकादशी का खास महत्व होता है। यह हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी होती है। ऐसा माना जाता है कि कामदा एकादशी पर व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इस दिन व्रत करने से पापों का भी नाश होता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है। अगर आप भी कामदा एकादशी का व्रत रख रहे हैं, तो आपको कामदा एकादशी के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में जानना चाहिए।
<h2><strong>कामदा एकादशी का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
कामदा एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त की शुरुआत सुबह 4 बजकर 32 मिनट पर होगी। वहीं इसकी समाप्ति 5 बजकर 18 मिनट पर होगी। अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 58 मिनट पर शुरू होगा और 12 बजकर 48 मिनट पर खत्म होगा। विजय मुहूर्त की बात करें तो विजय मुहूर्त दोपहर को ढाई बजे शुरू होगा और इसकी समाप्ति 3 बजकर 20 मिनट पर होगी। कामदा एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर करने का विधान है। कामदा एकादशी का पारण करने का शुभ मुहूर्त 09 अप्रैल को सुबह 06 बजकर 02 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 34 मिनट तक के बीच का है।
<h2><strong>कामदा एकादशी की पूजा विधि</strong></h2>
ब्रह्म मुहूर्त में सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। स्नान करने के बाद पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए। इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ होता है। अगर आप व्रत रखना चाहते हैं तो व्रत का संकल्प लें। मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करें। उनकी प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करें। इसके बाद उन्हें पीले रंग के वस्त्र, चंदन, तिलक और पीले फूल अर्पित करें। प्रतिमा पर तुलसी जरूर चढ़ाएं। कामदा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें। आखिर में भगवान की आरती उतारें। उन्हें मीठे का भोग लगाएं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[कई राज्यों में आज मनाई जा रही होली, जानें इसके पीछे का मुख्य कारण]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/holi-is-being-celebrated-in-many-states-today-know-the-main-reason-behind-it/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। भारत में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया गया, लेकिन देश में कई जगह 15 मार्च 2025 को भी होली का त्योहार मनाया जा रहा है। होली का त्योहार खुशी और हर्षोल्लास लेकर आता है। यह त्योहार रंगों, प्रेम और आपसी भाईचारे का प्रतीक है। हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली मनाई [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> भारत में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया गया, लेकिन देश में कई जगह 15 मार्च 2025 को भी होली का त्योहार मनाया जा रहा है। होली का त्योहार खुशी और हर्षोल्लास लेकर आता है। यह त्योहार रंगों, प्रेम और आपसी भाईचारे का प्रतीक है। हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली मनाई जाती है। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हैं।
<h2><strong>उदया तिथि को मनाई जाएगी होली</strong></h2>
साथ ही खुशियों बांटते हैं। झारखंड, छत्तीसगढ़ में त्योहारों का आयोजन आमतौर पर उदया तिथि के मुताबिक किया जाता है। इसी कारण इस साल भी 15 मार्च को होली मनाई जा रही है। मिथिला पंचांग के विशेषज्ञों ने बताया कि बनारस में होली आमतौर पर एक दिन पहले मनाई जाती है। इसके बाद बिहार में होली का उत्सव मनाया जाता है। बिहार में होली चैत्र प्रतिपदा के दिन मनाई जाती है, जो कि 14 मार्च को थी। 14 मार्च को होली 12:26 बजे से प्रारंभ हो गई। इस संदर्भ में विद्वानों ने यह निर्णय लिया है कि 15 मार्च को उदया तिथि के मौके पर होली का पर्व मनाया जाएगा।
<h2><strong>होली से जुड़ी पौराणिक कथा</strong></h2>
होली का संबंध पौराणिक कथाओं से संबंधित है। जिसमे से एक पौराणिक कथा भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु से जुड़ा है। इस त्योहार का सबसे प्रसिद्ध प्रसंग हिरण्यकशिपु एक अहंकारी राजा था, जो अपने पुत्र प्रह्लाद की भगवान विष्णु के प्रति भक्ति से चिंतित था। उसने अपनी बहन होलिका की मदद से प्रह्लाद को मारने के बारे में सोचा। होलिका के पास एक ऐसा वरदान था कि वह आग में नहीं जल सकती।
<h2><strong>रंगों से खेलते है होली</strong></h2>
वह प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ गई, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से होलिका जल गई लेकिन प्रह्लाद बच गए। तभी से होलिका दहन की परंपरा शुरू हुई, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। होली का मुख्य आकर्षण रंगों से खेली जाने वाली होली है, इसे धुलेंडी भी कहा जाता हैं। इस दिन लोग एक-दूसरे पर रंग लगाकर इस त्योहार को मनाते हैं। बच्चे पिचकारी और पानी के गुब्बारों से होली खेलते हैं। वहीं बड़े लोग एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर त्योहार की शुभकामनाएं देते हैं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[छोटी होली में छाएगा भद्रा का साया, जानें किस समय करें होलिका दहन]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/religious/bhadras-shadow-will-prevail-on-choti-holi-know-when-to-burn-holika/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। हर साल फाल्गुन पूर्णिमा की रात को होलिका दहन की जाती है। इस साल होलिका दहन 13 मार्च यानी आज की जाएगी। होलिका दहन को छोटी होली भी कहते है। होलिका दहन का त्योहार बुराई की अच्छाई पर जीत प्रतीक है। नकारात्मकता को समाप्त करने के लिए भी होलिका को दहन किया जाता है। [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><strong>रायपुर।</strong> हर साल फाल्गुन पूर्णिमा की रात को होलिका दहन की जाती है। इस साल होलिका दहन 13 मार्च यानी आज की जाएगी। होलिका दहन को छोटी होली भी कहते है। होलिका दहन का त्योहार बुराई की अच्छाई पर जीत प्रतीक है। नकारात्मकता को समाप्त करने के लिए भी होलिका को दहन किया जाता है। होलिका दहन को संवत जलाना भी कहा जाता है।
<h2><strong>भद्रा काल का साया</strong></h2>
इस बार होलिका दहन के दिन भद्रा का साया है। इसलिए होलिका दहन के मुहूर्त को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन पैदा हो रही है। आइए आज जानते हैं कि होलिका दहन पर भद्रा का साया कब से कब तक रहेगा। भद्रा लगने की वजह से होलिका दहन का मुहूर्त क्या है, होलिका दहन से पूर्व पूजा का क्या विधान है।
<h2><strong>होलिका दहन का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होता है। इस बार भद्रा काल लगने की वजह से खास ध्यान दिया जा रहा है। भद्रा के साए में होलिका दहन करना अशुभ माना जाता है। इस बार पूर्णिमा तिथि 13 मार्च यानी आज सुबह 10.36 से लेकर 14 मार्च को दोपहर 12.23 तक रहेगी। पूर्णिमा के साथ ही भद्रा काल की शुरूआत हो जाएगी। भद्रा काल रात 11.26 तक रहेगा। भद्रा काल से बचते हुए 13 मार्च की रात को 11.27 के बाद होलिका को दहन किया जाएगा।
<h2><strong>होलिका दहन की पूजा विधि</strong></h2>
पूजा की थाली लेकर होलिका दहन वाली जगह पर जाएं। उस भूमि को चुमकर माथे से लगाएं। भूमि पर थोड़ा सा जल चढ़ाएं। इसके बाद उसी स्थान पर घी का दीपक जलाकर रखें। गोबर के उपले, हल्दी और काले तिल के दाने होलिका में चढ़ाएं। होलिका की तीन बार परिक्रमा करते हुए कलावा बांधें। फिर होलिका में सूखा हुआ नारियल चढ़ाएं। आखिर में घर के लोगों को और स्वयं को रोली या हल्दी का तिलक लगाएं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[वैलेंटाइन डे पर रायपुर समेत कई जगहों पर गुलाबों की किल्लत, महंगे दामों में बिक रहे खूब रोज]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/top-news/there-is-a-shortage-of-roses-in-many-places-including-raipur-on-valentines-day-many-of-them-are-being-sold-at-expensive-prices/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर: आज देश भर में वैलेंटाइन डे मनाया जा रहा है। इस डे को कपल्स अलग-अलग अंदाज में मना रहे हैं। इसका खुमार देश-दुनिया में जमकर छाया हुआ है। ऐसे में छत्तीसगढ़ भी इस खास दिन को बेहतरीन बनाने में जुटा हुआ है। राजधानी रायपुर हो या बिलासपुर, गुलाब की लगातार मांग बढ़ रही है। [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><strong>रायपुर:</strong> आज देश भर में वैलेंटाइन डे मनाया जा रहा है। इस डे को कपल्स अलग-अलग अंदाज में मना रहे हैं। इसका खुमार देश-दुनिया में जमकर छाया हुआ है। ऐसे में छत्तीसगढ़ भी इस खास दिन को बेहतरीन बनाने में जुटा हुआ है। राजधानी रायपुर हो या बिलासपुर, गुलाब की लगातार मांग बढ़ रही है। इस वजह से इस साल वैलेंटाइन डे पर गुलाबों के दाम आसमान छू चुके हैं। फिर भी कपल्स गुलाब की खरीदारी जमकर कर रहे हैं।
<h2>
<strong>आम दिनों में दाम कम</strong></h2>
बता दें कि रायपुर, नागपुर और पुणे जैसे शहरों से आने वाला गुलाब इस वैलेंटाइन डे पर 30 रूपये पर पीस बिक रहा है। आम दिनों में इसकी कीमत महज 10 रूपये के आसपास रहती है। वहीं बेंगलुरु से आने वाला गुलाब 30 से 40 रुपये प्रति पीस तक पहुंच गया है. प्रेमी जोड़ों से लेकर दोस्त और परिवार वाले भी अपने प्रियजनों को फूल देकर इस दिन को खास बनाएंगे. फूल विक्रेताओं के मुताबिक वैलेंटाइन वीक के दौरान सबसे ज्यादा बिक्री रोज डे, प्रपोज डे और वैलेंटाइन डे पर होती है. युवाओं के साथ-साथ शादीशुदा जोड़े भी लाल गुलाब की खरीदारी कर रहे हैं।
<h2><strong>बाजारों में फूलों की दुकानें</strong></h2>
बिलासपुर में मुख्य रूप से जेल रोड, बृहस्पति बाजार, देवकीनंदन चौक, गोलबाजार और मंगला सहित बुधवारी बाजार में फूलों की दुकानें सजी हुई हैं। इसके अलावा लिंक रोड, सीएमडी कॉलेज और पुराना बस स्टैंड में भी अस्थायी स्टॉल लगाए गए हैं। बुधवारी बाजार रेलवे क्षेत्र के फूल विक्रेता समीर कुमार कहते हैं कि हर साल वैलेंटाइन डे पर गुलाब की मांग बढ़ जाती है. इस बार सप्लाई कम होने से कीमतें बढ़ी हैं. रायपुर, नागपुर और पुणे से आने वाले गुलाब की कीमत 30 रुपए है।

&nbsp;

&nbsp;]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[इस दिन मनाई जाएगी बसंत पंचमी, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/basant-panchami-will-be-celebrated-on-this-day-know-the-auspicious-time-importance-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। हिंदू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्योहार हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है। बसंत पंचमी को वसंत पंचमी और श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। देवी सरस्वती से लोग बुद्धि, शिक्षा और [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> हिंदू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का त्योहार हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है। बसंत पंचमी को वसंत पंचमी और श्री पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। देवी सरस्वती से लोग बुद्धि, शिक्षा और सफलता के लिए प्रार्थना करते हैं। इसके अलावा वसंत ऋतु की शुरुआत: यह त्यौहार सुहावने मौसम और खिलते सरसों के खेतों का स्वागत करता है। फसल उत्सव: किसान नई फसल के मौसम के आगमन का जश्न मनाते हैं। आइए जानते हैं बसंत पंचमी की सही डेट, शुभ मुहूर्त, महत्व?</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बसंत पंचमी का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बसंत पंचमी के दिन से ऋतु परिवर्तन होता है और बसंत ऋतु का आगमन होता है। इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है, जो विद्या, संगीत, कला, विज्ञान और शिल्प-कला की अधिष्ठात्री देवी हैं। मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती की पूजा करने से विद्यार्थियों को ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन देश भर में शिक्षक और छात्र मां सरस्वती की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान बनाने की प्रार्थना करते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सही तिथि और शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बसंत पंचमी, जिसे सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है, हर वर्ष माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। साल 2025 में यह पर्व 2 फरवरी को मनाया जाएगा। पंचमी तिथि की शुरुआत 2 फरवरी 2025 को सुबह 7:14 बजे होगी और इसका समापन 3 फरवरी 2025 को सुबह 6:52 बजे होगा। सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त 2 फरवरी को सुबह 7:08 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बसंत पचंमी की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:list {"ordered":true} -->
<ol class="wp-block-list"><!-- wp:list-item -->
<li>प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की सफाई करें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाकर मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>मां को पीले वस्त्र पहनाएं और रोली, चंदन, हल्दी, केसर, पीले या सफेद फूल, पीली मिठाई और अक्षत अर्पित करें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>पूजा स्थल पर वाद्य यंत्र, पुस्तकें या कलम रखें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>घी का दीपक जलाकर मां सरस्वती की आरती करें और सरस्वती वंदना का पाठ करें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>अंत में प्रसाद का वितरण करें।</li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
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                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Rail: फैस्टिव सीजन के दौरान रेलवे की बड़ी सौगात, अब कंफर्म सीट का झंझट खत्म]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/rail-big-gift-from-railways-during-the-festive-season-now-the-hassle-of-confirmed-seat-is-over/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। फैस्टिव सीजन के दौरान लोगों को ट्रेन में कंफर्म सीट मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसे में रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए एक अहम फैसला लिया है। दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ पूजा के दौरान यात्रियों को कंफर्म सीट उपलब्ध कराने के लिए रेलवे ने इस साल 6556 स्पेशल ट्रेनों को [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> फैस्टिव सीजन के दौरान लोगों को ट्रेन में कंफर्म सीट मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसे में रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए एक अहम फैसला लिया है। दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ पूजा के दौरान यात्रियों को कंफर्म सीट उपलब्ध कराने के लिए रेलवे ने इस साल 6556 स्पेशल ट्रेनों को चलाने का फैसला लिया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कई विशेष ट्रेनों का संचालन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ये स्पेशल ट्रेने 1 अक्टूबर से 30 नवंबर के बीच पटरी पर दौड़ेंगी। रेलवे मंडल के अधिकारी का कहना है कि हर साल त्योहारों के मौके पर रेलवे द्वारा स्पेशल ट्रेनों को चलाया जाता है। इस साल इन स्पेशल ट्रेनों की संख्या में भारी वृद्धि की गई है। दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ पूजा जैसे त्योहारों के दौरान लाखों की संख्या में यात्री ट्रेनों से सफर करते हैं। यात्रियों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए उन्हें सुगम व आरामदायक यात्रा कराने के लिए रेलवे ने यह फैसला लिया है। रेलवे ने इस साल भी फैस्टिव सीजन में कई विशेष ट्रेनों को चलाने की तैयारी कर ली है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>परिवार से मिलने का मौका</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>2 महीने की अवधि के दौरान ये स्पेशल ट्रेनें 6556 फेरे लगाएंगी और बड़ी संख्या में यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने का काम करेंगी। पिछले साल भी भारतीय रेल द्वारा बड़ी संख्या में फैस्टिव स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया गया था और इन ट्रेनों ने कुल 4,429 फेरे लगाए थे, जिनके माध्यम से लाखों की संख्या में यात्रियों को आरामदायक यात्रा की मिली थी। जाहिर है कि हर साल दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ पूजा के मौके पर देश भर से बड़ी संख्या में लोग यूपी, बिहार और झारखंड समेत कई अन्य राज्यों के लिए यात्रा करते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>टिकट वेटिंग लिस्ट में</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के लिए ये त्योहार न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि परिवारों से मिलने का भी एक खास मौका देता है। हर साल त्योहारों के दौरान यात्रियों की भीड़ के कारण अधिकांश ट्रेनों में 2-3 महीने पहले से ही टिकट वेटिंग लिस्ट में चली जाती है। इसी को देखते हुए इस साल भी त्योहारों के मौके पर स्पेशल ट्रेनों का संचालन रेलवे कर रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/rail-big-gift-from-railways-during-the-festive-season-now-the-hassle-of-confirmed-seat-is-over/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[एक नहीं, 4 नवंबर से मनाया जाएगा राज्योत्सव, इस वजह से साय सरकार ने लिया ये निर्णय]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/top-news/not-just-one-rajyotsav-will-be-celebrated-from-4th-november-this-is-why-the-government-took-this-decision/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर: राज्योत्सव के साथ दिवाली पड़ने के कारण इस बार छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने राज्योत्सव का मुख्य कार्यक्रम 4 से 6 नवंबर तक तीन दिन आयोजित करने का निर्णय लिया है. राज्य स्तरीय राज्योत्सव एवं राज्य अलंकरण समारोह का आयोजन नवा मेला स्थल पर एक साथ किया जाएगा। मुख्य सचिव अमिताभ जैन की अध्यक्षता [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर</strong>: राज्योत्सव के साथ दिवाली पड़ने के कारण इस बार छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने राज्योत्सव का मुख्य कार्यक्रम 4 से 6 नवंबर तक तीन दिन आयोजित करने का निर्णय लिया है. राज्य स्तरीय राज्योत्सव एवं राज्य अलंकरण समारोह का आयोजन नवा मेला स्थल पर एक साथ किया जाएगा। मुख्य सचिव अमिताभ जैन की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>4 नवंबर को राज्योत्सव का शुभारंभ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>संस्कृति विभाग के सचिव अन्बलगन पी. ने कहा कि प्रदेश स्तरीय राज्योत्सव की शुरुआत 4 नवंबर 2024 को नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव मेला स्थल में आयोजित होगा. जो 6 नवंबर 2024 को समाप्त होगा. समापन समारोह के आखिरी दिन राजकीय अलंकरण समारोह का भी आयोजन किया जाएगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>NRDA एवं CSIDC करेगी मेला स्थल का लेआउट</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मेला स्थल की व्यवस्था के अंतर्गत आयोजन स्थल का लेआउट एवं स्टॉल आवंटन NRDA एवं CSIDC द्वारा किया जायेगा। इसमें विभिन्न विभागों द्वारा शिल्पग्राम, वनोपज, हर्बल उत्पाद एवं शासकीय योजनाओं की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। राज्य अलंकरण समारोह के लिए संबंधित विभागों से पुरस्कारों की सूची, चयनित व्यक्तियों का परिचय और सम्मान राशि के संबंध में जानकारी मांगी गई है। इसकी जानकारी समय सीमा के अंदर संस्कृति विभाग को दी जायेगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे प्रस्तुत</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>तीन दिवसीय राज्योत्सव समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये जायेंगे। राज्योत्सव स्थल पर मंच, पंडाल एवं साज-सज्जा का कार्य लोक निर्माण विभाग एवं सीएसआईडीसी के सहयोग से किया जायेगा। साथ ही फूड कोर्ट, पार्किंग एवं स्टॉल की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जायेगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मेला स्थल पर होगी इन चीजों की व्यवस्था</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मेला स्थल पर पेयजल, साफ-सफाई, चिकित्सा सहायता, पार्किंग एवं सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी NRDA, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा नगर निगम रायपुर को दी गई है। कार्यक्रम स्थल पर 24 घंटे बिजली आपूर्ति की व्यवस्था ऊर्जा विभाग एवं NRDA द्वारा होगी। । 5 नवंबर को जिला मुख्यालय पर 1 दिन के लिए जिला स्तरीय राज्योत्सव का भी आयोजन होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/top-news/not-just-one-rajyotsav-will-be-celebrated-from-4th-november-this-is-why-the-government-took-this-decision/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Durga Puja: श्रद्धालुओं के लिए खुला मां का दरबार, 4 अक्टूबर से कर सकेंगे दर्शन]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/durga-puja-mothers-court-opened-for-devotees-will-be-able-to-visit-from-october-4/</link>
                    <description><![CDATA[रायुर। जांजगीर नैला में इस बार दुर्गा पूजा में अरुण देव मंदिर का पंडाल अग्रसेन भवन नैला के सामने मैदान में तैयार किया गया है। इस बार के दुर्गा पूजा में पांच शेरों में सवार मां दुर्गा की 35 फीट ऊंची प्रतिमा तैयार की गई है। दुर्गा पूजा की तैयारी जोरों पर इस बार दुर्गा [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायुर।</strong> जांजगीर नैला में इस बार दुर्गा पूजा में अरुण देव मंदिर का पंडाल अग्रसेन भवन नैला के सामने मैदान में तैयार किया गया है। इस बार के दुर्गा पूजा में पांच शेरों में सवार मां दुर्गा की 35 फीट ऊंची प्रतिमा तैयार की गई है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दुर्गा पूजा की तैयारी जोरों पर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस बार दुर्गा पूजा पर्व को लेकर खास लाइटिंग का उपयोग किया गया है, जिसे दुबई के बुर्ज खलीफा की तरह लाइट और साउंड इफेक्ट के साथ प्रदर्शित किया जाएगा। श्रद्धालु नवरात्र की द्वितीया तिथि 4 अक्टूबर से दुर्गा मां के दर्शन कर सकते है और आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। शारदीय नवरात्रि की तैयारियां जोरों- शोरों से की जा रही हैं। देवी मंदिरों से लेकर शहरों और गांवों तक मां दुर्गा के भव्य पंडाल सजाए जा रहे हैं। यह पंडाल अलग-अलग थीम पर तैयार किए जा रहे हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>4 अक्टूबर से मां के दर्शन होंगे</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>श्री दुर्गा सेवा उत्सव समिति के सदस्य राजेश पालीवाल का कहना है कि 41 साल से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। इस साल थाईलैंड के विश्व प्रसिद्ध शांति के प्रतीक अरुण देव मंदिर की तर्ज पर भव्य 160 फीट ऊंचा और 150 फीट चौड़ा पंडाल का निर्माण किया गया है। जिसे बंगाल के 35 से 40 कारीगर ने मिलकर तैयार किया है। श्रद्धालु नवरात्र की द्वितीया तिथि चार अक्टूबर से मां के दर्शन कर पाएंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>35 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भव्य पंडाल में स्थापना के लिए मां दुर्गा की 35 फीट ऊंची मूर्ती का निर्माण किया गया है। मां दुर्गा पांच शेरों में सवार होकर सोना चांदी, हीरा मोती से जड़ित स्टोन से सजे रथ पर विराज मान होगी। मां दुर्गा की प्रतिमा भटगांव के मूर्तिकार प्रदीप देवांगन और उसके सहयोगियों के द्वारा बनाया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/durga-puja-mothers-court-opened-for-devotees-will-be-able-to-visit-from-october-4/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Team: नवरात्रि के शुभ अवसर पर पुलिस की नई पहल, महिला सुरक्षा के लिए टीम का गठन]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/team-new-initiative-of-police-on-the-auspicious-occasion-of-navratri-formation-of-team-for-women-safety/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। शक्ति की आराधना के पर्व नवरात्रि के दौरान बिलासपुर पुलिस ने महिला सुरक्षा को लेकर एक नई पहल की है। महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए महिला पुलिस की एक खास टीम का गठन किया है। जिसका नाम ‘शक्ति’नाम रखा गया है। यह टीम नवरात्रि पर्व के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न धार्मिक [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> शक्ति की आराधना के पर्व नवरात्रि के दौरान बिलासपुर पुलिस ने महिला सुरक्षा को लेकर एक नई पहल की है। महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए महिला पुलिस की एक खास टीम का गठन किया है। जिसका नाम ‘शक्ति’नाम रखा गया है। यह टीम नवरात्रि पर्व के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करेगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सुरक्षा व्यवस्था को मजूबत करना</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ASP उमेश कश्यप का कहना है कि शक्ति टीम के महिला सदस्य शहर के सभी पूजा पंडालों, डांडिया और गरबा कार्यक्रमों में तैनात रहेंगे। टीम का मकसद असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगरानी रखना और अव्यवस्था या शांति भंग करने वाले तत्वों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करना है। इस टीम में महिला पुलिसकर्मियों के साथ पुरुष पुलिसकर्मियों को भी शामिल किया गया है। इससे सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत मिलेगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अव्यवस्था की स्थिति में पुलिस को सूचित करें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ASP ने शहरवासियों से अपील की है कि वे नवरात्रि के दौरान आयोजनों में सहयोग दें और आयोजन स्थल पर अपने स्वयंसेवक को तैनात करें। स्वयंसेवक श्रद्धालुओं के लिए सरल यातायात व्यवस्था को सुनिश्चित करें। साथ ही भीड़ प्रबंधन में पुलिस की मदद भी करें। आयोजनकर्ताओं को किसी भी असामाजिक गतिविधि या अव्यवस्था की स्थिति में तुरंत शक्ति टीम या पुलिस को सूचित करने निर्देश दिए गए हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/team-new-initiative-of-police-on-the-auspicious-occasion-of-navratri-formation-of-team-for-women-safety/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Sarva Pitru Amavasya: सर्वपितृ पक्ष अमावस्या पर करें पितरों का श्राद्ध, प्राप्त होगा 16 दिनों के तर्पण का फल]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/sarva-pitru-amavasya-perform-shraddha-of-ancestors-on-sarva-pitru-paksha-amavasya-you-will-get-the-results-of-16-days-of-tarpan/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। पूरे भारत में इन दिनों पितृ पक्ष मनाया जा रहा है। लोग अपने पितरों को प्रसन्न करने और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए जलाशयों और घरों में तर्पण कर श्राद्ध कर रहे हैं। गरीबों, जरूरतमंदों को भोजन करा रहे हैं। साथ ही गोशालाओं में भी जमकर गोसेवा कर रहे है। सर्वपितृ मोक्ष [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> पूरे भारत में इन दिनों पितृ पक्ष मनाया जा रहा है। लोग अपने पितरों को प्रसन्न करने और उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए जलाशयों और घरों में तर्पण कर श्राद्ध कर रहे हैं। गरीबों, जरूरतमंदों को भोजन करा रहे हैं। साथ ही गोशालाओं में भी जमकर गोसेवा कर रहे है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सर्वपितृ मोक्ष के दिन करें तर्पण</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जो लोग किसी कारणवश इन दिनों नित्य जलाशयों में पहुंचकर तर्पण नहीं कर पा रहे हैं। वह सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर तर्पण कर सकते है। सर्वपितृ मोक्ष पर श्राद्ध कर पूरे 16 दिन का फल प्राप्त कर सकते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित संजय पुरोहित के मुताबिक 2 अक्टूबर को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या का दिन है। इस दिन सभी तरह के ज्ञात और अज्ञात पितरों का तर्पण किया जा सकता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कई संयोग बन रहे हैं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वैसे तो पितरों का प्रतिदिन ही श्राद्ध करना चाहिए, लेकिन किसी वजह से यदि 16 दिन तर्पण नहीं कर पा रहे हैं, तो आखिरी दिन पितरों का तर्पण और श्राद्ध कर सकते हैं। पंडित संजय का कहना है कि इस साल कई ऐसे संयोग बन रहे हैं। जिनके चलते सर्व पितृमोक्ष अमावस्या पर किए गए श्राद्ध का पुण्य कई गुना होगा। इस दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र है। देश के विभिन्न शहरों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए नि:शुल्क श्राद्ध और तर्पण की व्यवस्था की गई है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गरीबों को भोजन कराएं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इतना ही नहीं इन दिनों बड़ी संख्या में गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराया जा रहा है। कई जगह अमावस्या पर न्यास द्वारा भोजन करने वाले लोगों को वस्त्र भी भेंट के रुप में दिए जाएंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/sarva-pitru-amavasya-perform-shraddha-of-ancestors-on-sarva-pitru-paksha-amavasya-you-will-get-the-results-of-16-days-of-tarpan/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Durga festival: कोलकाता की तर्ज पर बिलासपुर में मनाया जाता है दुर्गौत्सव]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/durga-festival-durga-festival-is-celebrated-in-bilaspur-on-the-lines-of-kolkata/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। बंगाल की दुर्गा पूजा पूरी दुनिया में प्रसद्धि है। कोलकाता की तर्ज पर बिलासपुर में भी साल 1923 से मां की पूजा की जाती है। दुर्गा उत्सव मनाने के लिए हर साल कई राज्यों से लोग यहां आते हैं। यहां के पंडालों में बंगाली संस्कृति और उत्सव की झलक दिखाई देती है। मां दुर्गा [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> बंगाल की दुर्गा पूजा पूरी दुनिया में प्रसद्धि है। कोलकाता की तर्ज पर बिलासपुर में भी साल 1923 से मां की पूजा की जाती है। दुर्गा उत्सव मनाने के लिए हर साल कई राज्यों से लोग यहां आते हैं। यहां के पंडालों में बंगाली संस्कृति और उत्सव की झलक दिखाई देती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मां दुर्गा की पूजा करते है</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पंचमी तिथि से विजय दशमी तक यहां का माहौल देखने लायक होता है। संस्कारधानी में पंडाल निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है। हर साल दुर्गा पूजा मनाने सभी लोग बेसब्री से इंतजार करते है। नवरात्र के पंचमी तिथि से मां दुर्गा को पंडालों में स्थापित किया जाता है। पंचमी तिथि 7 अक्टूबर को है। हर साल बंगाल से बड़ी संख्या में पुजारी बिलासपुर आते हैं, जो पंडालों में विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की पूजा करते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अलग-अलग थीम से तैयार पंडाल</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पहले दिन शाम को बोधन पूजा की परंपरा को पूरा किया जाता है। पंडितों द्वारा बेल की डगाल पर माता को स्थापित करने की प्रार्थना की जाती है। बंगाल में दुर्गा प्रतिमा और पंडाल की कला अनूठी होती है। हर साल कलाकार पारंपरिक व आधुनिक शैलियों का इस्तेमाल करके मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं तैयार करते हैं, जो शक्ति, सौंदर्य और करुणा की प्रतीक होती हैं। पंडालों को अलग-अलग थीमों के तहत सजाया जाता है। जिनमें पर्यावरण, संस्कृति और समकालीन मुद्दों की झलक दिखाई देती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दुर्गोत्सव की पहल बंगाली एसोसिएशन ने की</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शिल्पकारों की रचनात्मक कार्यशैली पंडालों में कला और वास्तुकला के संगम को प्रदर्शित करती है। जो लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षक का केंद्र बनती हैं। ठीक उसी प्रकार बिलासपुर में भी यह संगम दिखाई देता है। यह पर्व आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत उदाहरण पेश करती है। हेमूनगर निवासी भानू रंजन प्रधान का कहना है कि बिलासपुर में दुर्गोत्सव का आरंभ बंगाली एसोसिएशन ने की थी। साल 1923 में जब बिलासपुर केवल रेल परिचालन के लिए जाना जाता था।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/durga-festival-durga-festival-is-celebrated-in-bilaspur-on-the-lines-of-kolkata/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Vishwakarma Jayanti: विश्वकर्मा जयंती के शुभ अवसर पर स्थापित किए जाएंगे देव शिल्पी]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/vishwakarma-jayanti-dev-shilpi-will-be-established-on-the-auspicious-occasion-of-vishwakarma-jayanti/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। भगवान विश्वकर्मा जंयती के शुभ अवसर पर बिलासपुर में तैयारियां पूरी हो चुकी है। विश्वकर्मा जयंती पर देव शिल्पी भगवान की पूजा-अर्चना की जा रही है। प्रतिमाओं की स्थापना से लेकर पंडालों की सजावट तक की तैयारियां पूरी हो गई है। पंडालों मे देवशिल्पी की प्रतिमाओं की स्थापना की जा रही है। रेलवे विभाग [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> भगवान विश्वकर्मा जंयती के शुभ अवसर पर बिलासपुर में तैयारियां पूरी हो चुकी है। विश्वकर्मा जयंती पर देव शिल्पी भगवान की पूजा-अर्चना की जा रही है। प्रतिमाओं की स्थापना से लेकर पंडालों की सजावट तक की तैयारियां पूरी हो गई है। पंडालों मे देवशिल्पी की प्रतिमाओं की स्थापना की जा रही है। रेलवे विभाग ने कर्मचारियों द्वार रेलवे परिक्षेत्र में बड़ी संख्या में पंडाल का निर्माण करवाया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पंडाल सज गए है</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पंडाल की साज-सज्जा भी की गई। इसी प्रकार एसईसीएल, कुम्हारपारा, मगरपारा समेत कई स्थानों पर विश्वकर्मा पूजा के लिए उत्साह देखने को मिल रहा है। बिलासपुर में अलग-अलग क्षेत्रों में भगवान देवशिल्पी की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाती है। मूर्तिकारों ने दिन-रात कड़ी मेहनत करके मूर्तियों को अंतिम रूप दिया है। पंडालों की सजावट और अन्य तैयारियां पूरी होने के बाद शहर के कई प्रमुख पंडालों में भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित की जा चुकी है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>हवन-पूजन कार्यक्रम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बिलासपुर के कारखानों, फैक्ट्रियों और रेलवे वर्कशॉल में भगवान देवशिल्पी की पूजा के लिए खास तैयारी की जा रही है। पंडाल सज गए है। आज हवन- पूजन का कार्यक्रम किया जाएगा। कारीगरों और कामगारों में भगवान विश्वकर्मा को समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। आज से रेलवे वर्कशॉप, एसईसीएल और अन्य प्रमुख फैक्ट्रियों में भगवान विश्वकर्मा की पूजा विधि-विधान से की जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/vishwakarma-jayanti-dev-shilpi-will-be-established-on-the-auspicious-occasion-of-vishwakarma-jayanti/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Chakradhar Program: रायगढ़ में 39वें चक्रधर समारोह शुरू, CM साय ने लगाए ठुमके]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/top-news/chakradhar-program-39th-chakradhar-ceremony-begins-in-raigarh-cm-sai-dances/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में शनिवार (7 सितंबर) को राज्य के सबसे खास और लोकप्रिय आयोजन चक्रधर समारोह का उद्घाटन हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समारोह का उद्घाटन किया। चक्रधर समारोह के पहले दिन पद्मश्री से सम्मानित हेमा मालिनी ने राधा रास बिहारी नृत्य नाटिका पर अपनी मनमोहक प्रस्तुति दी। [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर :</strong> छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में शनिवार (7 सितंबर) को राज्य के सबसे खास और लोकप्रिय आयोजन चक्रधर समारोह का उद्घाटन हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समारोह का उद्घाटन किया। चक्रधर समारोह के पहले दिन पद्मश्री से सम्मानित हेमा मालिनी ने राधा रास बिहारी नृत्य नाटिका पर अपनी मनमोहक प्रस्तुति दी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>महोत्सव 10 दिनों तक चलेगा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि कला और संगीत की नगरी कहे जाने वाले रायगढ़ में 39वां चक्रधर महोत्सव दस दिनों तक चलेगा। 10 दिवसीय महोत्सव में देश के कोने-कोने से कलाकार हिस्सा लेने आ रहे हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>संगीत के क्षेत्र में विशेष स्थान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा, "संगीत के क्षेत्र में रायगढ़ और संगीत सम्राट महाराज चक्रधर का विशेष स्थान है। संगीत सम्राट महाराज चक्रधर जी ने शास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, उसे नई पहचान दी, संगीत की विरासत को विशाल और समृद्ध बनाया।"</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सीएम साय ने किया कर्मा डांस</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस समारोह में सीएम विष्णुदेव साय अलग ही अंदाज में नजर आए। यहां वे अपने पैतृक गांव बगिया के करमा नर्तकों को मांदर की थाप पर करमा नृत्य करते देख खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने मंच पर ढोलक बजाकर करमा नृत्य किया। इस दौरान उनके साथ कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम और ओपी चौधरी ने भी करमा नृत्य किया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/top-news/chakradhar-program-39th-chakradhar-ceremony-begins-in-raigarh-cm-sai-dances/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Ganesh Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी के मौके पर सजे बाजार, श्रद्धालुओं ने जमकर की खरीदारी]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/ganesh-chaturthi-2024-markets-decorated-on-the-occasion-of-ganesh-chaturthi-devotees-shopped-extensively/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। आज गणेश चतुर्थी है। गणेश चतुर्थी के मौके पर बाजार सजे है। भगवान गणेश की प्रतिमाओं की खरीदारी करने के लिए श्रद्धालु उमड़े है। सदरबाजार, सत्ती बाजार, शास्त्री बाजार, मालवीय रोड, आमापारा जैसे मुख्य बाजारों के अतिरिक्त अनेक इलाकों में रौनक छाई पड़ी है। मंहगी होने के बावजूद भी खरीदारी जारी प्रतिमा मंहगी होने [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> आज गणेश चतुर्थी है। गणेश चतुर्थी के मौके पर बाजार सजे है। भगवान गणेश की प्रतिमाओं की खरीदारी करने के लिए श्रद्धालु उमड़े है। सदरबाजार, सत्ती बाजार, शास्त्री बाजार, मालवीय रोड, आमापारा जैसे मुख्य बाजारों के अतिरिक्त अनेक इलाकों में रौनक छाई पड़ी है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मंहगी होने के बावजूद भी खरीदारी जारी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>प्रतिमा मंहगी होने के बावजूद श्रद्धालुओं ने अपनी पसंद की प्रतिमाओं को खरीदा। रिद्धि-सिद्धि के बीच में विराजे और पगड़ी पहने गणेश की प्रतिमाएं लोगों की पहली पसंद बनी हुई है। बड़े मूषक पर विराजित गणेश जी की प्रतिमा भी खूब बिक रही है। अनेक बड़े पंडालों में 10 से 15 फीट ऊंची प्रतिमाओं को स्थापित किया जा रहा है। विशेषकर महाराष्ट्रीयन स्टाइल में बनाई गई प्रतिमाएं, राजस्थानी पगड़ी वाली प्रतिमाओं और लालबाग के राजा की अधिक मांग है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बप्पा के जयकारे लगाते हुए पहुंचे पंडाल</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>एक दिन पहले ही गाजे-बाजे के साथ गणपति बप्पा मोरिया के जयकारे लगाते हुए युवा पंडालों तक पहुंचे। शनिवार की शाम तक पंडालों में विधिवत प्रतिमाएं स्थापित की जाएगी।मिट्टी की प्रतिमाओं के अतिरिक्त टाफी, नारियल जूट, चाक, कैंडी, क्राफ्ट पेपर, मौली धागा, मोमबत्ती से बनाई गई प्रतिमाएं आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इन मूर्तियों को खास तौर से आर्डर पर तैयार किया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>झांकी का निर्माण जारी</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कालीबाड़ी चौक में शीशमहल, राम दरबार, विक्रांता की थीम पर पंडाल का निर्माण किया गया है। नयापारा में केदारनाथ की झांकी बनाई जा रही है। इसी तरह टिकरापारा में गोवर्धन पर्वत को उठाते कृष्ण की झांकी का निर्माण किया जा रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/ganesh-chaturthi-2024-markets-decorated-on-the-occasion-of-ganesh-chaturthi-devotees-shopped-extensively/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Teacher&#8217;s Day:अंधे होकर भी हजारों दिव्यांगों के जीवन को रोशन करते है ये शिक्षक]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/teachers-day-despite-being-blind-these-teachers-brighten-the-lives-of-thousands-of-disabled-people/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। आज शिक्षक दिवस के मौके पर हम आपकों एक ऐसी खबर बताने जा रहे है जिससे पढ़ने के बाद आप भी भावुक हो उठेंगे। रायपुर के एक दृष्टिबाधित स्कूल में शिक्षक और प्राचार्य दिव्यांग बच्चों को पढ़ाकर उन्हें सक्षम बना रहे हैं और उनके जीवन में नई रोशनी ला रहे हैं। यहां के शिक्षक [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> आज शिक्षक दिवस के मौके पर हम आपकों एक ऐसी खबर बताने जा रहे है जिससे पढ़ने के बाद आप भी भावुक हो उठेंगे। रायपुर के एक दृष्टिबाधित स्कूल में शिक्षक और प्राचार्य दिव्यांग बच्चों को पढ़ाकर उन्हें सक्षम बना रहे हैं और उनके जीवन में नई रोशनी ला रहे हैं। यहां के शिक्षक बच्चों को उनके भविष्य के लिए तैयार कर रहे है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>प्रतिदिन काउंसिलिंग करते है</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दृष्टि और श्रवण बाधितार्थ विद्यालय, मठपुरैना के प्रिंसिपल अमित कुमार त्रिवेदी भले दृष्टिबाधित है, लेकिन उनके हौसले किसी से कम नहीं है। वह बच्चों को उनकी आवाज से ही पहचान लेते हैं। स्कूल के दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के साथ वह उन्हें जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं। दिव्यांग बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए स्कूल के प्रत्येक बच्चे की काउंसिलिंग करते हैं। उनका मानना है कि दिव्यांग होने कारण उन्हें अंदाजा है कि बच्चों को किस तरह से सिखाया जा सकता है। शिक्षक जितने अच्छे तरीके से सिखाने वाला होगा, दिव्यांग बच्चा उतने ही अच्छे ढंग से सीखने वाला होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>विभिन्न गतिविधियों का ज्ञान </strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>प्रिंसिपल अमित त्रिवेदी दृष्टिबाधित बच्चों को मोबाइल एप के जरिए संदेश या दृश्य को आवाज में बदलना सिखाते हैं, जिससे वे चीजों की पहचान कर सकें, किसी के संदेश को पढ़ सकें। पाठ्यक्रम के साथ विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विषयों की जानकारी देते हैं। जिससे वे आसानी से सीख सकें। इसके साथ उनका लक्ष्य होता है कि बच्चों को संगीत, खेल या अन्य गतिविधियों में एक्सपर्ट बना सकें। ताकि बच्चे भविष्य में अपने पैरों पर खड़े हो सकें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बिना छड़ी के स्कूल घूमते है</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>प्रधानाचार्या अमित त्रिवेदी ने यह भी बताया कि स्कूल से पढ़कर निकले कई छात्र विभिन्न शासकीय विभागों में उच्च पद पर कार्य कर रहे हैं। पिछली साल एक पूर्व छात्र असिस्टेंट प्रोफसर के रूप में चुना गया है। जो सामान्य बच्चों को पढ़ा रहे हैं। करीबन 8 सालों से वह स्कूल में सेवा दे रहे है। प्राचार्य अमित कुमार बिना किसी छड़ी और मदद के पूरा स्कूल घूम लेते हैं। समय मिलने पर बच्चों के साथ खेल भी खेलते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/teachers-day-despite-being-blind-these-teachers-brighten-the-lives-of-thousands-of-disabled-people/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Goga Navami: आज है गोगा नवमी, जानिए इसका शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और लाभ]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/goga-navami-today-is-goga-navami-know-its-auspicious-time-worship-method-and-benefits/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। पंचांग के मुताबिक भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि पर श्री गोगा नवमी का त्योहार मनाया जाता है। वाल्मीकि समाज की मान्यताओं के मुताबिक गोगा देव की पूजा सावन माह की पूर्णिमा से ही आरंभ हो जाती है, जो पूरे 9 दिनों तक चलती है। नवमी तिथि पर गोगा देव की पूजा [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> पंचांग के मुताबिक भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि पर श्री गोगा नवमी का त्योहार मनाया जाता है। वाल्मीकि समाज की मान्यताओं के मुताबिक गोगा देव की पूजा सावन माह की पूर्णिमा से ही आरंभ हो जाती है, जो पूरे 9 दिनों तक चलती है। नवमी तिथि पर गोगा देव की पूजा होती है, इसलिए इसे गोग नवमी कहा जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू पंचांग के मुताबिक इस साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि 27 अगस्त को सुबह 02:20 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन अगले दिन यानी 28 सितंबर 2024 को दोपहर 01:33 मिनट पर होगा। ऐसे में गोगा नवमी मंगलवार 27 अगस्त को मनाई जाएगी। गोगा त्योहार को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में धूमधाम से मनाया जाता है। आज के दिन गोगा देव की पूजा की जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन सुबह जल्दी स्नान करना चाहिए। स्नान करने के बाद गोगा देव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। पूजा स्थल पर गोगा देव जी की मिट्टी से बनी मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद गोगा देव को चावल, रोली, वस्त्र और अन्य सामग्री अर्पित करें। इसके बाद गोगा देव जी को खीर, चूरमा और गुलगुले आदि का भोग लगाएं। वहीं उसके घोड़े को मसूर की दाल का भोग लगाना चाहिए। गोगा देव की विधिवत पूजा करने के बाद अंत में गोगा जी कथा का पाठ करें और उनकी आरती उतारें। अब सभी लोगों में प्रसाद वितरित करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गोगा पर्व का महत्व</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>श्री गोगा नवमी राजस्थान का लोकपर्व है। जिसे स्थानीय भाषा में गुग्गा नवमी भी कहते हैं। राजस्थान के अतिरिक्त यह पर्व मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी प्रसिद्ध है। गोगाजी को सांपों के देवता के रुप में पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि गोगादेव के पास नागों को वश में करने की शक्ति थी और जो भी साधक उनकी पूजा करता है उसे सांप के डसने का डर नहीं होता। श्री गोगादेव को गुरु गोरखनाथ का परम शिष्य भी माना जाता है। साथ ही यह भी माना जाता है कि गोगादेव की पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/goga-navami-today-is-goga-navami-know-its-auspicious-time-worship-method-and-benefits/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Janmashtami 2024: रायपुर में जन्माष्टमी की धूम, 501 लीटर दूध से किया जाएगा जलाभिषेक]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/janmashtami-2024-janmashtami-will-be-celebrated-in-raipur-jalabhishek-will-be-done-with-501-liters-of-milk/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। प्रदेश में कृष्ण जन्माष्टमी धूम-धाम से मनाई जा रही है। जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर और बाजार सज चुके है। जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर 45 मिनट के लिए द्वापर युग होगा। राजधानी में 10 से ज्यादा राधा-कृष्ण मंदिरों में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम मची हुई है। मंदिर में राधा रानी और नंदलला का [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर। </strong>प्रदेश में कृष्ण जन्माष्टमी धूम-धाम से मनाई जा रही है। जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर और बाजार सज चुके है। जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर 45 मिनट के लिए द्वापर युग होगा। राजधानी में 10 से ज्यादा राधा-कृष्ण मंदिरों में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम मची हुई है। मंदिर में राधा रानी और नंदलला का श्रृंगार मथुरा-वृंदावन से मंगवाई गई पोशाक से किया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मंदिर को लाल-सफेद गुलाबों से सजाया</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मंदिर परिसर को कोलकाता से लाए गए सफेद और लाल गुलाब से सजाया गया है। विशेष आकर्षण का केंद्र कोतवाली थाना का कारागार होगा। जहां आधी रात को श्रीकृष्ण का जन्म होगा। आधी रात को वासुदेव टोकरी में श्रीकृष्ण के श्रीविग्रह को सिर पर रखकर गोपाल मंदिर लेकर आएंगे। जवाहर नगर स्थित राधाकृष्ण मंदिर में फूलों से कारागार के 7 दरवाजों का निर्माण किया गया हैं। मंदिर में शाम को भजन के दौरान संगीत की धुन से बादल के गरजने, बिजली के चमकने और शिशु के रोने की आवाज सुनाई देगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>महोत्सव में अनेक अनुष्ठान का कार्यक्रम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इससे पहले सुबह 8.30 बजे भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी का 501 लीटर दूध से अभिषेक किया जाएगा। साथ ही महाआरती भी की जाएगी। भक्तों को दही, माखन-मिश्री का प्रसाद बांटा जाएगा। अगले दिन 27 अगस्त को शोभायात्रा निकालकर नंदोत्सव मनाएंगे। राधारासबिहारी के श्रीविग्रह का श्रृंगार मुंबई और वृंदावन से लाए वस्त्रों से किया जाएगा। मंदिर में 3 दिन 25 से 27 अगस्त तक जन्माष्टमी की धूम रहेगी। फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता, नृत्य , भजन संध्या,पूजा महा-महोत्सव और श्री राधाष्टमी महामहोत्सव जैसे अनेक अनुष्ठान और कार्यक्रम होंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/janmashtami-2024-janmashtami-will-be-celebrated-in-raipur-jalabhishek-will-be-done-with-501-liters-of-milk/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Hal Chhata Puja: 25 अगस्त को मनाया जाएगा हल षष्ठी का व्रत, इस बार 2 दिन तक शुभ मुहूर्त]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/hal-chhata-puja-hal-shashthi-fast-will-be-celebrated-on-25th-august-this-time-auspicious-time-will-be-for-2-days/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाने वाला व्रत हलषष्ठी 25 अगस्त को है। हलषष्ठी को कमरछठ के नाम से भी जाना जाता है। हलषष्ठी पर्व को लेकर तैयारी पहले ही शुरू हो गई हैं। शहर के चौक-चौराहों पर पर्व के लिए बाजार सज गए है। शहर में इन दिनों पसहर चावल की [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाने वाला व्रत हलषष्ठी 25 अगस्त को है। हलषष्ठी को कमरछठ के नाम से भी जाना जाता है। हलषष्ठी पर्व को लेकर तैयारी पहले ही शुरू हो गई हैं। शहर के चौक-चौराहों पर पर्व के लिए बाजार सज गए है। शहर में इन दिनों पसहर चावल की बिक्री तेजी से हो रही है। पिछले साल की तुलना में इस बार चावल की बिक्री में 15 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। संतानों की लंबी आयु की कामना के लिए माताएं कमरछठ पर्व पर कठोर व्रत का तप करती है। व्रत रखकर वह भगवान की पूजा-अर्चना करती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>व्रत का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भादो माह के षष्ठी तिथि को कमरछठ का त्योहार मनाया जाता है। इस साल कमरछठ व्रत शुभ मुहूर्त 24 अगस्त को दोपहर 12:30 बजे से से 25 अगस्त को सुबह 10:11 बजे तक का होगा । कमरछठ पर्व को महिलाएं धूम-धाम के साथ मनाती है। हलषष्ठी पर्व पर माताएं सगरी खोदकर भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा करती है। गणेश को पसहर चावल, बेल पत्ती, दूध, दही, घी, कांशी, भौरा,खमार, बांटी समेत कई अन्य सामग्रियां अर्पित की जाती हैं। भगवान की पूजा करने के बाद माताएं घर पर बिना हल के सहारे उपजे अनाज जैसे पसहर चावल,6 तरह की सब्जी को पकाकर प्रसाद के रूप में लोगों में बांटती है और अपना व्रत तोड़ती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पसहर चावल की ब्रिक्री</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस पर्व पर उपवास तोडकर खास अन्न पसहर (फसही) चावल का सेवन किया जाता है। यह चावल सप्ताह भर पहले से ही बाजार में बिकना शुरू हो जाता है। शहर की कई दुकानों पर पसहर चावल की ब्रिकी हो रही है। इस चावल की विशेष बात यह है कि इस चावल की पैदावार बिना हल की सहायता से की जाती है। हलषष्ठी के पर्व पर इस चावल की मांग अधिक होती है। मान्यता है कि,सदियों पहले से ही इस चावल का सेवन करके ही व्रत को तोड़ा जाता है। बाजार में पसहर चावल की कीमत 20 से 30 रुपए पाव है। इसमें भी भिन्न-भिन्न किस्म के पसहर चावलों की ब्रिक्री बाजार में हो रही है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/hal-chhata-puja-hal-shashthi-fast-will-be-celebrated-on-25th-august-this-time-auspicious-time-will-be-for-2-days/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Narali Purnima: आज है नारली पूर्णमा, जानिए इसका महत्व]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/narali-purnima-today-is-narali-purnima-know-its-significance/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। नारली पूर्णिमा का अपना महत्व होता है। देश के कई राज्यों में नराली पूर्णिमा मनाई जाती है। श्रावणी पूर्णिमा, रक्षा बंधन और कजरी पूर्णिमा की तरह ही नारली पूर्णिमा मनाई जाती है। इस त्योहार खास तौर पर दक्षिण भारत में मनाया जाता है। नारली (Narali) शब्द का मतलब नारियल होता है और पूर्णिमा शब्द [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> नारली पूर्णिमा का अपना महत्व होता है। देश के कई राज्यों में नराली पूर्णिमा मनाई जाती है। श्रावणी पूर्णिमा, रक्षा बंधन और कजरी पूर्णिमा की तरह ही नारली पूर्णिमा मनाई जाती है। इस त्योहार खास तौर पर दक्षिण भारत में मनाया जाता है। नारली (Narali) शब्द का मतलब नारियल होता है और पूर्णिमा शब्द का अर्थ पूर्णिमा का दिन होता है। नारली पूर्णिमा के दिन भगवान को नारियल अर्पित किया जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक इस साल ये त्योहार 19 अगस्त 2024 सोमवार को मनाया जाएगा। आइए जानते है नारली पूर्णिमा से जुड़ी जानकारी?</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>तटीय क्षेत्र के लोग </strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नारली पूर्णिमा का त्योहार दक्षिण भारत के साथ-साथ महाराष्ट्र में काफी लोकप्रिय है। हिंदी कैलेंडर के मुताबिक सावन को बेहद पवित्र महीना माना जाता है। इस वजह से पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है. नारली पूर्णिमा के दिन लोग मुख्य रुप से समुद्र के देवता, वरुण की पूजा-अर्चना करते है। इसके साथ ही समुद्र देवता को नारियल आर्पित किया जाता है। ऐसा करने से समुद्र देवता प्रसन्न होते हैं और समुद्र के खतरों से रक्षा करते हैं। मुख्य रुप से इस पर्व को तटीय क्षेत्र के आस पास रहने वाले मछुआरें मनाते हैं। नारली पूर्णिमा के दिन भगवान शिव की भी विधि-विधान से पूजा की जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>नौकरी और भगवान का पर्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ऐसा माना जाता है कि नारियल में तीन छिद्रों को त्रिनेत्रधारी का प्रतीक माना जाता है। सावन का महीना भगवान शिव के लिए काफी प्रिय होता है। इस दिन शिव भगवान को नारियल और भांग धतुरा अर्पित किया जाता है। इस दिन मछुआरे समुद्र में इस्तेमाल में आने वाले सभी तरह के औजारों की मरम्मत करते हैं ताकि समुद्र में मछली पकड़ते समय उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े। ये त्योहार पूरी तरीके से मछुआरों का अपने भगवान और नौकरी के प्रति सम्मान देने का पर्व है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/narali-purnima-today-is-narali-purnima-know-its-significance/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Raksha Bandhan: आज है रक्षाबंधन का त्योहार, जाने शुभ मूर्हूत और विधि]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/top-news/raksha-bandhan-today-is-the-festival-of-rakshabandhan-know-the-auspicious-time-and-method/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। सनातन धर्म में रक्षाबंधन के त्योहार को बहुत होता है। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन का रिश्ते का प्रतीक होता है। सावन पूर्णिमा पर बहनें अपने भाई को राखी बांधती हैं और उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं। ऐसे में भाई अपनी बहन को गिफ्ट या पैसे देते हैं। यह त्योहार काफी लंबे से [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> सनातन धर्म में रक्षाबंधन के त्योहार को बहुत होता है। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन का रिश्ते का प्रतीक होता है। सावन पूर्णिमा पर बहनें अपने भाई को राखी बांधती हैं और उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं। ऐसे में भाई अपनी बहन को गिफ्ट या पैसे देते हैं। यह त्योहार काफी लंबे से मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की उपासना की जाती है। इसके बाद रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। आइए जानते हैं रक्षाबंधन का शुभ मूर्हूत और पूजा विधि</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रक्षाबंधन का शुभ मूर्हूत</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>रक्षाबंधन के त्योहार में शुभ मूहूर्त का बहुत महत्व होता है। रक्षाबंधन वाले दिन मूर्हूत के मुताबिक ही राखी को बांधा जाता है। पंचांग के मुताबिक सावन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 19 अगस्त को शुभ मुहूर्त 03 बजकर 43 मिनट से शुरू होगा। इसके बाद पूर्णिमा तिथि का आरंभ हो जाएगा। सरल भाषा में बताएं तो अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक सावन पूर्णिमा तिथि 19 अगस्त को 03 बजकर 43 मिनट पर आरंभ हो जाएगी। वहीं, इस तिथि का समापन 19 अगस्त को रात 11 बजकर 55 मिनट पर होगा। ऐसे में रक्षाबंधन का पर्व 19 अगस्त को मनाया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रक्षाबंधन की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन सुबह स्नान करने के बाद चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित करें। इसके बाद भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। मां लक्ष्मी को श्रृंगार की चीजें अर्पित करें। भगवान विष्णु-लक्ष्मी की प्रतिमा के आगे दीपक जलाएं। इसके बाद देवी-देवता को रोली या हल्दी का तिलक लगाएं और राखी बांधे। इसके बाद अपने भाई को तिलक लगाएं और दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधें। भाई को मिठाई खिलाएं। साथ ही भगवान उनके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना करें। अंत में अपने बड़े भाई के चरण स्पर्श करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/top-news/raksha-bandhan-today-is-the-festival-of-rakshabandhan-know-the-auspicious-time-and-method/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Independence Day: रायपुर मे आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम सायं, प्रदेशवासियों को दी बधाई]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/independence-day-cm-attended-the-program-organized-in-raipur-congratulated-the-people-of-the-state/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। छत्‍तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने आज 78वें स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सीएम साय रहें। समारोह में सीएम साय ने ध्वजारोहण किया। उन्होंने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दीl सीएम साय ने [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> छत्‍तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने आज 78वें स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सीएम साय रहें। समारोह में सीएम साय ने ध्वजारोहण किया। उन्होंने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दीl</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सीएम साय ने किया ध्वजारोहण</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सीएम विष्णुदेव साय ने रायपुर में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित मुख्य समारोह में ध्वजारोहण के बाद परेड की सलामी ली। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला मुख्यालय में उप मुख्यमंत्री अरुण साव बिलासपुर और डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बस्तर में आयोजित मुख्य समारोह में तिरंगा फहराया। मुख्‍य समारोह में सांस्‍कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्‍तुत किए गए। इसी तरह विधानसभा में भी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विधानसभा कार्यक्रम में अध्यक्ष डा. रमन सिंह राजनांदगांव, मंत्री दयालदास बघेल,मंत्री रामविचार नेता सरगुजा, मंत्री केदार कश्यप दुर्ग, महासमुंद जैसे तमाम नेता शामिल हए। कार्यक्रम में डिप्टी सीएम ने ध्वजारोहण किया। साथ ही परेड की सलामी ली।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कई जगह कार्यक्रमों का आयोजन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सांसद बृजमोहन अग्रवाल गरियाबंद में, सांसद संतोष पाण्डेय खैरागढ़-गंडई-छुईखदान,सांसद विजय बघेल बालोद में, सांसद रूपकुमारी चौधरी बेमेतरा में,सांसद चिंतामणी महाराज जशपुर में,सांसद राधेश्याम राठिया रायगढ़ में, सांसद महेश कश्यप दंतेवाड़ा में,सांसद कमलेश जांगड़े सक्ती में, सांसद भोजराज नाग कांकेर में, सांसद देवेन्द्र प्रताप सिंह नारायणपुर जिला मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ध्वजारोहण किया। साथ ही कार्याक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/independence-day-cm-attended-the-program-organized-in-raipur-congratulated-the-people-of-the-state/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Hariyali Teej 2024:आज है हरियाली तीज, जाने शुभ मुर्हूत और पूजन विधि]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/hariyali-teej-2024-today-is-hariyali-teej-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। इस साल हरियाली तीज 7 अगस्त, बुधवार यानी आज मनाई जाएगी। हरियाली तीज को छोटी तीज व श्रावण तीज के नाम भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक श्रावण शु्क्ल पक्ष की तृतीया तिथि को सौभाग्य प्राप्ति के लिए तीज मनाते हैं। इसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति वाला व्रत माना जाता है। इस [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> इस साल हरियाली तीज 7 अगस्त, बुधवार यानी आज मनाई जाएगी। हरियाली तीज को छोटी तीज व श्रावण तीज के नाम भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक श्रावण शु्क्ल पक्ष की तृतीया तिथि को सौभाग्य प्राप्ति के लिए तीज मनाते हैं। इसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति वाला व्रत माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। वहीं कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत को रखती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong> तीज का शुभ मुर्हूत</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन मां पार्वती और भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को अपनी कठोर तपस्या से प्राप्त किया था। हरियाली तीज की तृतीया तिथि की शुरुआत 6 अगस्त को रात 7 बजकर 52 मिनट पर होगा और तिथि का समापन 7 अगस्त को रात 10 बजकर 05 मिनट पर होगा। उदयातिथि के मुताबिक इस बार हरियाली तीज 7 अगस्त को ही मनाई जाएगी। हरियाली तीज पर इस बार परिघ योग, शिव योग और रवि योग बनने जा रहा है । हरियाली तीज के मौके पर रवि योग रात 8:30 से अगले दिन 8 अगस्त को सुबह 5:47 तक रहेगा। वहीं, परिघ योग सुबह से लेकर 11:42 तक है और शिव योग अगले दिन से शुरू होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>व्रत की पूजन विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हरियाली तीज के दिन उपवास रखना बेहद लाभकारी होता है। अगर व्रत ना रख पाएं तो, इस दिन केवल सात्विक भोजन ही ग्रहण करें। इस दिन महिलाओं को श्रृंगार जरूर करना चाहिए, साथ ही मां पार्वती को श्रृंगार की सामग्री जरूर अर्पित करनी चाहिए। किसी सुहागिन स्त्री को श्रृंगार की सामग्री को उपहार में दें। इस दिन महिलाओं को काले, सफेद भूरे कपड़े नहीं पहनने चाहिए। हरियाली तीज पर प्रदोष काल में ही पूजा करना सबसे उत्तम होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/hariyali-teej-2024-today-is-hariyali-teej-know-the-auspicious-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Kamika Ekadashi 2024: आज है कमिका एकादशी, जानिए इसका महत्व और पूजन विधि]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/kamika-ekadashi-2024-today-is-kamika-ekadashi-know-its-importance-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। पंचांग के मुताबिक आज यानी 31 जुलाई को कामिका एकादशी व्रत (Kamika Ekadashi 2024 Date) है। सनातन धर्म में एकादशी तिथि का बहुत महत्व होता है। एकादशी की तिथि जगत के नाथ भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन श्रीहरि और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही श्रीहरि [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> पंचांग के मुताबिक आज यानी 31 जुलाई को कामिका एकादशी व्रत (Kamika Ekadashi 2024 Date) है। सनातन धर्म में एकादशी तिथि का बहुत महत्व होता है। एकादशी की तिथि जगत के नाथ भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन श्रीहरि और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही श्रीहरि के मंदिरों में भजन-कीर्तन किया जाता है। कामिका एकादशी व्रत का उल्लेख विष्णु पुराण में किया गया है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक सच्चे मन से इस व्रत को करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। साथ ही जीवन सदैव खुशियों से भरा रहता है। एकादशी के दिन तुलसी से जुड़े उपाय करने से सभी तरह की परेशानी दूर होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कमिका एकादशी की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कामिका एकादशी के मौके पर सुबह सारे काम निपटा कर स्नान करना चाहिए। स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इसके बाद तुलसी के पौधे पर लाल चुनरी अर्पित पूजा करनी चाहिए। भगवान विष्णु और देवी पार्वती की पूजा-अर्चना करें। अंत में जीवन में सुख-शांति की कामना करें। कमिक एकादशी के दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, जिससे आर्थिक समस्याएं जल्द दूर होती हैं। इस दिन का व्रत करने से दांपत्य जीवन में प्रेम बना रहता है। अगर आप धन की प्राप्ति तो कामिका एकादशी पर किया गया उपाय बेहद फलदायी साबित होता है। इस दिन तुलसी की मंजरी को लाल कपड़े में बांधकर अलमारी में रख दें। माना जाता है कि इस उपाय को करने से साधक को जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती है। कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु के पास देशी घी का दीपक जलाना चाहिए, और सच्चे मन प्रार्थना कर 11 परिक्रमा लगानी चाहिए।<br>इससे व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और श्री हरि खुश होते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कमिका एकादशी का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पुराण के मुताबिक जो मनुष्य शिव के प्रिय श्रावण मास में भगवान श्रीधर का पूजा करते है। उसके द्वारा गंधर्वों और नागों सहित सभी देवताओं की पूजा हो जाती है। यह एकादशी स्वर्गलोक तथा महान पुण्यफल प्रदान करने वाली है। इस दिन भगवान विष्णु<br>और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक समस्याएं नहीं होती। मनुष्य श्रद्धा के साथ इसकी महिमा का श्रवण करता है। वह सब पापों से मुक्त हो जाता है। उसे स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से, इस दिन तुलसी के पत्ते का प्रयोग करने<br>से व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/kamika-ekadashi-2024-today-is-kamika-ekadashi-know-its-importance-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Sawan Somwar: सावन के पहले सोमवार को शिवालयों में उमड़ी लोगों की भीड़]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/sawan-somwar-crowds-of-people-gathered-in-shiva-temples-on-the-first-monday-of-sawan/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। आज से सावन मास की शुरूआत हो गई है। शहर में भगवान भोलेनाथ की भक्ति की धूम मची हुई है। इस अवसर शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। जो भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए उत्साहित होंगे। सावन सोमवार होने के नाते घर-घर में और मंदिरों में शंख और घंटी की ध्वनि गूंजेगी। जो [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> आज से सावन मास की शुरूआत हो गई है। शहर में भगवान भोलेनाथ की भक्ति की धूम मची हुई है। इस अवसर शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। जो भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए उत्साहित होंगे। सावन सोमवार होने के नाते घर-घर में और मंदिरों में शंख और घंटी की ध्वनि गूंजेगी। जो इस पवित्र माह के आगमन की सूचना देगी। सावन का पहला सोमवार 22 जुलाई से प्रारंभ होकर 19 अगस्त को समापन होगा। इस साल चार के बजाए पांच सावन सोमवार होंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बिलासपुर के प्रसिद्ध शिवालयों में सावन के दौरान भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी। शिव भक्त विशेष रूप से बिलासपुर के शिवालयों में जाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करेंगे। सावन में शिवालयों में भक्तों के लिए विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएंगा, जिसमें भजन-कीर्तन और रुद्राभिषेक शामिल हैं। शिव मंदिर शंकर नगर के पुजारी पं.रमेश तिवारी ने बताया कि इस बार सावन के महीने में कई अद्भुत संयोग बन रहे हैं। इस बार सावन के कृष्ण पक्ष में दो सोमवार और शुक्ल पक्ष में तीन सोमवार पड़ रहे हैं, जो भक्तों के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। यह संयोग भक्तों के जीवन में सुख,समृद्धि और शांति लाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बाजारों में लगा लोगों का तांता</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सावन मास के आगमन के साथ ही बाजार भी सजने लगे है। पूजन सामग्री,फूल, बेलपत्र, धतूरा और फल-फूल की मांग बढ़ जाती है। इस दौरान हर तरफ रंग-बिरंगे फूलों और पूजन सामग्री के लिए दुकानों पर भीड़ दिखाई देती है। रविवार को बिलासपुर के बाजारों में ऐसा ही नजारा देखने को मिला। बाजार व चौक-चौराहों में खरीदारी करने भक्त पहुंचे। बाजारों में पूजा सामग्री की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ आमतौर पर देखी जा सकती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/sawan-somwar-crowds-of-people-gathered-in-shiva-temples-on-the-first-monday-of-sawan/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Rath Yatra 2024: आज से रथ यात्रा की शुरुआत, कितने दिन रुकते हैं भगवान जगन्नाथ मौसी के घर]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/top-news/rath-yatra-2024-rath-yatra-starts-from-today-how-many-days-does-lord-jagannath-stay-at-auntys-house/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर : आज रविवार, 7 जुलाई से भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत होगी। आज से लेकर पूरे 10 दिनों तक भगवान जनमानस के बीच रहेंगे. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितिया तिथि को रथ यात्रा मनाई जाती है। मान्यता है कि रथ यात्रा के दौरान भगवान अपने भाई बलराम [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर </strong>: आज रविवार, 7 जुलाई से भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत होगी। आज से लेकर पूरे 10 दिनों तक भगवान जनमानस के बीच रहेंगे. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितिया तिथि को रथ यात्रा मनाई जाती है। मान्यता है कि रथ यात्रा के दौरान भगवान अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ मौसी के घर जाते हैं। इस पर्व को देश भर में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन ओड़िशा के पूरी शहर में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में भव्य रथयात्रा निकाली जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गुंडीचा भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि यह यात्रा दुनियाभर में प्रशिद्ध है। इस दौरान देश विदेश से लोग पहुंचते हैं। ऐसा इसलिए करते है क्योंकि माना जाता है कि रथ यात्रा के दर्शन मात्र से व्यक्ति को हजारों यज्ञों के पुण्य प्राप्त होते हैं। आज तीनों भगवान रथ में सवार होकर गुंडीचा मंदिर की तरफ प्रस्थान करेंगे इसके बाद सोमवार या मंगलवार तक भगवान गुंडीचा मंदिर पहुंच जाएंगे और 15 जुलाई तक यहीं रुकेंगे, फिर 16 जुलाई को सभी देवी-देवता को वापस जगन्नाथ मंदिर लाया जाएगा। यह परंपरा सदियों से चलती आ रही है। यहां भगवान के लिए तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। बता दें कि गुंडीचा को मौसी का घर माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्यों खास है रथ यात्रा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भक्तों के लिए रथयात्रा इसलिए अधिक खास होता है कि इस दौरान भगवान मंदिर से बाहर निकल कर भक्तों को दर्शन देते हैं। इस वजह से रथयात्रा को अधिक खास बताया गया है। वहीं इस पर्व को भाई बहन की पूजा का पर्व माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज से शुरू होगी यात्रा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>-वैदिक पंचांग के मुताबिक, जगन्नाथ रथ यात्रा 07 जुलाई को सुबह 8:05 बजे से शुरू हो चुकी है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>– यह यात्रा सुबह 09 बजकर 27 मिनट तक निकाली गई है.<br>– इसके बाद यात्रा दोपहर 12 बजकर 15 मिनट से फिर से शुरू होगी.<br>– इस बार यात्रा 01 बजकर 37 मिनट पर विश्राम लेगी.<br>– इसके बाद शाम 04 बजकर 39 मिनट से यात्रा शुरू होगी.<br>– अब यह यात्रा 06 बजकर 01 मिनट तक चलेगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/top-news/rath-yatra-2024-rath-yatra-starts-from-today-how-many-days-does-lord-jagannath-stay-at-auntys-house/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Diwali 2024 Date: दिवाली और छठ के लिए कराना है टिकट बुक, जान लें कब है त्योहार]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/diwali-2024-date-tickets-have-to-be-booked-for-diwali-and-chhath-know-when-is-the-festival/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर: इंडिया में होली के बाद कोई बड़ा पर्व है तो वो है दिवाली, वहीं बिहार और झारखंड वासियों के लिए महापर्व तो छठ पूजा है। ऐसे में आप भी अपने घर जाने का प्लान कर रहे होंगे और आप भी ट्रेन की टिकट लेने की इंतजार में होंगे तो ये ख़बर आपके लिए बहुत [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर</strong>: इंडिया में होली के बाद कोई बड़ा पर्व है तो वो है दिवाली, वहीं बिहार और झारखंड वासियों के लिए महापर्व तो छठ पूजा है। ऐसे में आप भी अपने घर जाने का प्लान कर रहे होंगे और आप भी ट्रेन की टिकट लेने की इंतजार में होंगे तो ये ख़बर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। तो चलिए जानते है इस साल दिवाली व महापर्व छठ पूजा कब है?</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बिहारियों के लिए छठ पूजा इमोशन की तरह</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि छठ पूजा ऐसा पर्व है जिससे हर एक बिहारी का इमोशन जुड़ा होता है। वह कही भी रहे लेकिन दिवाली व छठ आते ही उन्हें अपने घर जाना ही होता है। अगर किसी कारण से वो अपने घर नहीं जा पाते है तो उनका दिल जरूर टूटता है। ये जानकारी तो होगी ही कि छठ और दिवाली में ट्रेन की टिकट मिलना कितना मुश्किल होता है। त्योहार नजदीक आते ही लोगों को ट्रेन में टिकट नहीं मिल पाता है। ऐसे में आप अभी ही अपना टिकट बुक कर लें तो आप फ्री माइंड अपने घर त्योहार पर पहुंच सकते है। ऐसे में चलिए जानते है कब हैं दिवाली व छठ।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दिवाली 1 नवंबर दिन शुक्रवार</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या ति​थि को हर वर्ष दिवाली मनाया जाता हैं. इस शुभ दिन के प्रदोष काल में माता लक्ष्मी और श्री गणेश जी की पूजा अर्चना करते हैं. देश भर में इस साल दिवाली 1 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>धनतेरस 29 अक्टूबर दिन मंगलवार</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धनतेरस का पर्व दिवाली से एक या दो दिन पहले मनाया जाता हैं. धनतेरस कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी ति​थि को मनाया जाता है. इस पर्व को धन त्रयोदशी पर्व भी कहा जाता हैं. इस साल धनतेरस 29 अक्टूबर दिन मंगलवार को मनाया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>भाई दूज 3 नवंबर दिन रविवार</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा और उसके बाद भाई दूज मनाते हैं. इस साल गोवर्धन पूजा 2 नवंबर दिन शनिवार को मनाया जाएगा. इस दिन अन्नकूट का पर्व भी मनाया जाता है. इस साल भाई दूज 3 नवंबर दिन रविवार को मनाया जाएगा। भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>छठ पूजा 7 नवंबर दिन गुरुवार</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दिवाली के 6 दिन बाद छठ पूजा का महापर्व मनाया जाता है. बता दें कि पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीना के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि छठ पूजा होता हैं. इस साल छठ पूजा 7 नवंबर दिन गुरुवार को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस व्रत को सबसे कठिन व्रतों में से एक कहा गया है. क्योंकि इस व्रत में 36 घंटे तक बिना अन्न और जल के उपवास रखा जाता है</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/diwali-2024-date-tickets-have-to-be-booked-for-diwali-and-chhath-know-when-is-the-festival/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[भाग्य पर होगा बड़ा असर अगर कर लिया ये दिव्य उपाय, शनि की बरसेगी कृपा]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/if-you-do-this-divine-remedy-it-will-have-a-big-impact-on-your-luck-shani-will-shower-his-blessings/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर: शनि देव कर्मफल के देवता माने जाते हैं। उनकी पूजा से व्यक्ति के बुरे कर्मों का प्रभाव कम हो सकता है। शनि की कृपा से जीवन में स्थिरता आती है और परेशानियाँ कम होती हैं। परंतु शनि भगवान की अराधना करने के लिए कुछ विधि-विधान बनाए गए हैं, जिनका पालन करने से शनि भगवान [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर:</strong> शनि देव कर्मफल के देवता माने जाते हैं। उनकी पूजा से व्यक्ति के बुरे कर्मों का प्रभाव कम हो सकता है। शनि की कृपा से जीवन में स्थिरता आती है और परेशानियाँ कम होती हैं। परंतु शनि भगवान की अराधना करने के लिए कुछ विधि-विधान बनाए गए हैं, जिनका पालन करने से शनि भगवान की अति कृपा होती है। आइए जानते हैं कुछ ऐसे दिव्य उपायों के बारे में..</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ये हैं कुछ प्रमुख उपाय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:list {"ordered":true} -->
<ol><!-- wp:list-item -->
<li>शनिवार का व्रत: शनिवार को व्रत रखें और काले तिल, उड़द, तेल या सरसों का दान करें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>शनि मंत्र का जाप: "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का या फिर नीलांजना समाभासं रविपुत्रम यमराजन, छाया मार्तंड संभुतम, तम नमामि शनैश्चरम का जाप करें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>नीलम धारण करना: शनि की शांति के लिए नीलम रत्न धारण करें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>शनि देव की पूजा: शनिवार को शनिदेव की मूर्ति या तस्वीर की पूजा करें। काले पुष्प, तेल, काला तिल अर्पित करें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>हनुमान चालीसा का पाठ: शनि दोष निवारण के लिए हनुमान चाली‎ का पाठ करें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>पीपल के वृक्ष की पूजा: शनिवार को पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करें और जल चढ़ाएं।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>काले वस्त्र धारण करना: शनिवार को काले रंग के वस्त्र पहनें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>शनि स्तोत्र का पाठ: शनि स्तोत्र का नियमित पाठ करें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>दान: लोहे की वस्तुएं, काला चना, तेल, या कंबल का दान करें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>शनि शांति पूजा: किसी अनुभवी पंडित से शनि शांति पूजा करवाएं।</li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शनि भगवान की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:list {"ordered":true} -->
<ol><!-- wp:list-item -->
<li>स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>शनि देव की प्रतिमा या तस्वीर के सामने बैठें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>काले तिल, तेल या सरसों का तेल चढ़ाएं।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>काले पुष्प, नीलम रत्न या लोहे की वस्तु अर्पित करें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>शनि मंत्र का जाप करें: "ॐ शं शनैश्चराय नमः"</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>शनि चालीसा या शनि स्तोत्र का पाठ करें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>काले रंग के वस्त्र या उड़द की दाल दान करें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>शनिवार को व्रत रखना भी लाभदायक माना जाता है।</li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन बाधाओं को करें शनि की पूजा से दूर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कन्या विवाह -यदि आपको परिवार में किसी कन्या के विवाह की देरी को लेकर चिंता है तो बेसन की एक मोटी रोटी बनाकर हस्पतिवार को उसपर शुद्ध देशी घी से चुपडकर उस पर थोडा गुड रखें और भूरे रंग की गाय को खिला दें। इसके अलावा इस दिन केले के वृक्ष की पूजा करने से काफी लाभ मिलेगा। विवाह में हो रही देरी की समस्या दूर होगी और अच्छे घर और अच्छे वर से रिश्ता तय होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दांपत्य में आएगी मिठास- पति पत्नी के बीच अगर मनमुटाव है तो बृहस्पतिवार को 20 ग्राम बेसन के लड़डू, आटे के दो पेडे, तीन केले लेकर ऐसी गाय को खिलाएं जिसका बछडा न हो। वहां ऐसी गाय मिल जाएगी,जो लोग गायें पालते हैं। 7 बृहस्पतिवार ऐसा करें, दाम्प्तय हंसी खुशी से भर जाएगा</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p></p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/if-you-do-this-divine-remedy-it-will-have-a-big-impact-on-your-luck-shani-will-shower-his-blessings/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Snan Purnima: आज मनाई जाएगी देव स्नान पूर्णिमा, हजारों की संख्या में उमड़े श्रद्धालु]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/snan-purnima-dev-snan-purnima-will-be-celebrated-today-thousands-of-devotees-gathered/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। 22 जून यानी आज देव स्नान पूर्णिमा मनाई जाएगी। यह दिन भगवान जगन्नाथ,देव बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए खास माना जाता है। देव स्नान पूर्णिमा के दिन ओडिशा और अलग-अलग मंदिरों में स्थापित भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों की खास तरीके से स्नान कराया जाएगा। स्नान से पूर्व भगवान जगन्नाथ और उनके भाई [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> 22 जून यानी आज देव स्नान पूर्णिमा मनाई जाएगी। यह दिन भगवान जगन्नाथ,देव बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए खास माना जाता है। देव स्नान पूर्णिमा के दिन ओडिशा और अलग-अलग मंदिरों में स्थापित भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों की खास तरीके से स्नान कराया जाएगा। स्नान से पूर्व भगवान जगन्नाथ और उनके भाई -बहनों की भव्य यात्रा निकाली जाती है। इसलिए इसे स्नान पूर्णिमा कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि रथ यात्रा से पहले स्नान पूर्णिमा एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>विधिपूर्वक की जाएगी स्नान प्रक्रिया</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन रायपुर के मंदिरों में भगवान जगन्नाथ उनकी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र की आज विधिपूर्वक स्नान कराने की परंपरा निभाई जाएगी। मान्यताओं के मुताबिक इस दिन भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ जाते है। अगले 15 दिनों तक भगवान जगन्नाथ को काढ़ा पिलाने की रस्म निभाई जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन बलभद्र और सुभद्रा रथ यात्रा के दिन तक पूरी तरह से ठीक हो जाए। मान्यताओं के मुताबिक भगवान जगन्नाथ ज्येष्ठ पूर्णिमा की भीषण गर्मी से बचने के लिए अत्यधिक स्नान करते है। जिस कारण वह बीमार पड जाते है। बीमारी से राहत दिलाने के लिए भगवान जगन्नाथ को 15 दिनों तक काढ़ा पिलाया जाता है। लगातार 15 दिनों तक औषधियुक्त काढ़ा पिलाने से भगवान जगन्नाथ स्वस्थ हो जाते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>108 कलशों द्वारा कराया जाएगा स्नान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पुरानी बस्ती के टुरी हटरी इलाके में स्थित 400 साल से ज्यादा पुराने जगन्नाथ मंदिर में हर साल ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ की देव स्नान पूर्णिमा मनाई जाती है। इस दिन भगवान को स्नान कराने की परंपरा का पालन किया जाता है। ऐतिहासिक दूधाधारी मठ द्वारा संचालित जगन्नाथ मंदिर के पुजारी पंडित तिलकदास बताते है कि मठ के महंत राजेश्री रामसुंदरदास के नेतृत्व में पुराने कुएं से कलश में जल भरकर मूर्तियों को स्नान कराया जाता है। मंदिर के गर्भगृह से मूर्तियों को निकालकर कुएं के पास रखा जाता है और स्नान की प्रक्रिया आरंभ की जाती है। पूरे 108 कलशों के जल से भगवान जगन्नाथ और देव बलभद्र और बहन सुभद्रा को स्नान कराया जाता है। इन कलशों में गंगा, यमुना समते कई सारी नदियों का जल होता है। जिसमें गुलाब की पत्तियां, चंदन, सुंगंधित इत्र डाला जाता है। भगवान जगन्नाथ की स्नान पूर्णिमा के शूभ अवसर पर श्रद्धालुओं का भीड़ लगी पड़ी है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/snan-purnima-dev-snan-purnima-will-be-celebrated-today-thousands-of-devotees-gathered/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Jagannath Rath Yatra: बहन सुभद्रा के साथ रथ पर यात्रा करेंगे भगवान जगन्नाथ, पहनेंगे खास तरह के वस्त्र]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/lord-jagannath-will-travel-on-a-chariot-with-his-sister-subhadra-will-wear-special-clothes/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को हर साल धूम -धाम से निकाला जाता है। इस यात्रा में देश में भर से हजारों भक्त इस रथ यात्रा में शामिल होते हैं। इस बार गुजरात के अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की 147 वीं रथयात्रा 7 जुलाई को निकाली जाएगी। इस कार्यक्रम में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को हर साल धूम -धाम से निकाला जाता है। इस यात्रा में देश में भर से हजारों भक्त इस रथ यात्रा में शामिल होते हैं। इस बार गुजरात के अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की 147 वीं रथयात्रा 7 जुलाई को निकाली जाएगी। इस कार्यक्रम में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा शहर के दौरे पर निकलेंगे। छत्तीसगढ़ में भी भगवान जगन्नाथ  की रथ यात्रा निकाली जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पारंपरिक जल यात्रा का आयोजन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भगवान जगन्नाथ अलग-अलग मैटीरियल कपड़े से बने विशेष पोशाक पहनकर मंदिर के बाहर आएंगे। भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा पूरे विश्व प्रसिद्ध है। यात्रा के समय भगवान श्रीकृष्ण, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं। इस बार रथयात्रा के लिए गुजरात, मथुरा और वृंदावन से आवश्यक सामग्री और कपड़े भी मंगाए गए हैं। रथयात्रा से पहले 22 जून की सुबह मंदिर में पारंपरिक जल यात्रा का आयोजन किया जाएगा। सरसपुर के मोसल यानी श्रीरण छोड़राय जी मंदिर में आषाढ़ी बीज के शुभ दिन पर भगवान श्री जगन्नाथ जी, बहन श्री सुभद्रा जी और श्री बलभद्र जी की नगर यात्रा पारंपरिक भक्तिमय माहौल में जमालपुर जगदीश मंदिर से शुरू होगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रथ यात्रा में शामिल होने पर पूरी होंगी मनोकामनाएं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पुराणों की माने तो रथ-यात्रा में जो व्यक्ति श्री जगन्नाथ जी के नाम का कीर्तन करता हुआ गुंडीचा नगर तक पहुंचता है वह पुनर्जन्म के बंधन से पूरी तरह से मुक्त हो जाता है। जो व्यक्ति भगवान जगन्नाथ के नाम का कीर्तन करता हुआ रथयात्रा में शामिल होता है। उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। ऐसा माना जाता है रथ यात्रा में भाग लेने लोगो में संतान संबंधी सारी समस्याएं दूर हो जाती है। रथयात्रा की तैयारी महीनो पहले से हो जाती है। रथ यात्रा की भव्य तैयारियों के साथ सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए है। रथ यात्रा मार्ग और जमालपुर जगन्नाथ मंदिर में भी पुलिस की तैनाती की जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/lord-jagannath-will-travel-on-a-chariot-with-his-sister-subhadra-will-wear-special-clothes/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[World Blood Donor Day: छत्तीसगढ़ की ब्लड डोनर संस्था बनी जीवन रक्षक, बचाई 25 हजार लोगों की जान]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/world-blood-donor-daychhattisgarhs-blood-donor-organization-became-a-lifesaver-saved-the-lives-of-25-thousand-people/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। रक्तदान को महादान(World Blood Donor Day माना जाता है। किसी जरूरतमंद को खून देकर उसकी जान बचाई जा सकती है। इंसानियत के इस सेवा भाव लिए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायुर में के कई तरह के स्वयंसेवी किसी भी समय रक्त दान के लिए तत्पर होते हैं। रक्तदान को बढ़ावा देने और रक्तदान को प्रति [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> रक्तदान को महादान(World Blood Donor Day माना जाता है। किसी जरूरतमंद को खून देकर उसकी जान बचाई जा सकती है। इंसानियत के इस सेवा भाव लिए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायुर में के कई तरह के स्वयंसेवी किसी भी समय रक्त दान के लिए तत्पर होते हैं। रक्तदान को बढ़ावा देने और रक्तदान को प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 14 जून को पूरी दुनिया में विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस वर्ष की थीम- धन्यवाद रक्तादाता</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस वर्ष धन्यवाद रक्तदाता के थीम पर यह दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रस्तुत है रक्तदताओं के ऐसे समूह से आे आज समाज के लिए वरदान बन चुका है। रक्तदाताओं का यह समूह जरूरतमंद तक पहुंचाकर जीवन रक्षक बन चुकें है। जिसे आज समाज भी "धन्यवाद हीरोज" कह रहे हैं। शहर के विवेक कुमार साहू भी पिछले 12 सालों से घायल या जरूरतमंद लोगों तक रक्त पहुंचाकर उनको नया जीवन देने का काम कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ ब्लड डोनर संस्था के माध्यम से अब तक 25 हजार जरूरतमंद लोगो तक मुफ्त ब्लड पहुंचाया जा चुका हैं। ब्लड डोनर संस्था के सदस्य विवेक व उनकी टीम ऐसे लोगों को भी ब्लड उपलब्ध मुहैया करा रहे हैं, जिनका ब्लड ग्रुप सबसे रेयर माना जाता है। अब तक 30 लोगों को बांबे ब्लड ग्रुप पहुंचाकर उनकी जान बचा चुके हैं। पूरे प्रदेश में लगभग 20 लोगों का बांबे ब्लड ग्रुप है।जिसमें से 11 लोग इस समूह से जुड़े हुए है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>थैलेसेमिया बच्चों के लिए हर माह ब्लड उपलब्ध कराया जाता है</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>विवेक बताते हैं कि छत्तीसगढ़ ब्लड डोनर संस्था की शुरुआत वर्ष 2012 में 10 लोगों के साथ हुई थी। अब वाट्सग्रुप समूह में राज्य भर से पांच हजार लोग इस संस्था से जुड़े हुए है। जो एक सूचना पर तुरंत रक्तदान के लिए पहुंच जाते हैं। संस्था के माध्यम से रक्तदान करने वाला डोनर संस्था का सदस्य बन जाता है। पिछले एक साल से 100 थैलेसेमिया बच्चों के लिए प्रति माह रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है। विवेक ने बताया कि वे अधिकतर जरूरतमंद तक इंटरनेट मीडिया के माध्यम से पहुंच रहे हैं। उनके बनाएं वाट्सएप ग्रुप में 20 हजार से अधिक लोग जुड़े हुए है। यह वेबसाइट www.cgblooddoner.com है, जिस पर प्रतिदिन दो-तीन लोग संपर्क करते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/world-blood-donor-daychhattisgarhs-blood-donor-organization-became-a-lifesaver-saved-the-lives-of-25-thousand-people/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Jagannath Rath Yatra: 108 कलश जल, पंचामृत और गंगाजल से किया जाएगा महाप्रभु जगन्नाथ का जलाभिषेक]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/jagannath-rath-yatra-jalabhishek-of-mahaprabhu-jagannath-will-be-done-with-108-kalash-water-panchamrit-and-ganga-water/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। रथयात्रा(Jagannath Rath Yatra) 7 जुलाई को है। इसके पहले, ज्येष्ठ पूर्णिमा पर महाप्रभु भगवान जगन्नाथ 22 जून को 108 कलश जल,पंचामृत और गंगाजल से स्नान किया जाएगा। मान्यता के अनुसार, इस स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ बीमार हो जाएंगे और 15 दिनों के विश्राम के बाद रथयात्रा के दिन पुनः भक्तों को दर्शन देंगे। [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p>रायपुर। रथयात्रा(Jagannath Rath Yatra) 7 जुलाई को है। इसके पहले, ज्येष्ठ पूर्णिमा पर महाप्रभु भगवान जगन्नाथ 22 जून को 108 कलश जल,पंचामृत और गंगाजल से स्नान किया जाएगा। मान्यता के अनुसार, इस स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ बीमार हो जाएंगे और 15 दिनों के विश्राम के बाद रथयात्रा के दिन पुनः भक्तों को दर्शन देंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जगन्नाथ स्नान व रथयात्रा के लिए उत्साहित लोग</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>रथयात्रा के लिए तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है और भक्तजन भगवान जगन्नाथ के भव्य स्नान और आगामी रथयात्रा के उत्सव को लेकर उत्साहित हैं। इस पवित्र अवसर पर रेलवे कॉलोनी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु इकट्ठे होकर महाप्रभु के दर्शन और उनकी आराधना करेंगे। बिलासपुर में भक्तों का उत्साह चरम सीमा पर है। शहर में विभिन्न जगहों पर अलग-अलग तरह के कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। भक्तजन भगवान जगन्नाथ के भव्य स्नान और आगामी रथयात्रा के उत्सव को लेकर बहुत उत्साहित हैं। इस पवित्र अवसर पर, बिलासपुर के श्रद्धालु महाप्रभु के दर्शन करने की तैयारी में हैं। वहीं मंदिर में विशेष तरह के आयोजन होंगे। रेलवे परीक्षेत्र स्थित श्रीजगनाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ को महास्नान 22 जून को कराया जाएगा। सुबह आठ बजे से पूजा से महाप्रभु की पूजा- अर्चना प्रारंभ हो जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>7 जुलाई को निकाली जाएगी रथ यात्रा</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>स्नान के बाद महाप्रभु बीमार हो जाएंगे और उनका जड़ी बूटी से उपचार किया जाएगा। इसके बाद भोग का वितरण शुरू होगा। मंदिर के पट 15 दिनों के लिए बंद हो जाएगा ताकि महाप्रभु 15 दिनों तक आराम करें। वहीं, महास्नान के बाद महाप्रभु के मंदिर का पट अमावस्या पांच जुलाई तक बंद रहेगा। इसके बाद छह जुलाई को नेत्रोत्सव के साथ मंदिर का पट खुलेगा। सुबह 9.30 से 10.30 बजे तक पूजा-अर्चना होगी। भगवान भक्तों को दर्शन देंगे। सात जुलाई को रथयात्रा निकाली जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/jagannath-rath-yatra-jalabhishek-of-mahaprabhu-jagannath-will-be-done-with-108-kalash-water-panchamrit-and-ganga-water/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[अगर आपके अंदर भी है ये आदतें तो जल्द करें ठीक, नहीं तो हो सकते है ग्रह दोष के शिकार]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/if-you-also-have-these-habits-then-correct-them-soon-otherwise-you-may-become-a-victim-of-planetary-defects/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर : इंसानी जीवन में ज्योतिष शास्त्र को बहुत महत्व दिया जाता है। साथ में यह भी कहा जाता है कि अगर आपके अंदर बुरी आदतें है तो ऐसे में आप हमेशा मानसिक तौर पर परेशान रहते होंगे। क्योंकि बुरी आदतें हमारे स्वास्थ्य के साथ-साथ मानशिक स्थिति को भी प्रभावित करती ही हैं. बुरी आदतें [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर : </strong>इंसानी जीवन में ज्योतिष शास्त्र को बहुत महत्व दिया जाता है। साथ में यह भी कहा जाता है कि अगर आपके अंदर बुरी आदतें है तो ऐसे में आप हमेशा मानसिक तौर पर परेशान रहते होंगे। क्योंकि बुरी आदतें हमारे स्वास्थ्य के साथ-साथ मानशिक स्थिति को भी प्रभावित करती ही हैं. बुरी आदतें एक अभिशाप की तरह है जो आपके जीवन की खुशियों को छीन लेता है. ऐसे में ज्योतिष शास्त्र का मानना है कि कुंडली में ग्रहों की स्थिति के साथ व्यक्ति की कुछ आदतें जीवन की उन्नति में रूकावट बन सकती है. इसके लिए सभी व्यक्ति को अपनी डेली रूटीन में कुछ आदतों पर अधिक ध्यान देने की जरुरत है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कुछ आदतों को छोड़ने से परेशानी होगी दूर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दरअसल, हिंदू शास्त्रों में बुरी आदतें को ग्रह दोष उत्तपन्न करने का कारण बताया गया है। जिस वजह से लोगों को जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. यहां तक की जातकों के बनते हुए काम भी बिगड़ सकते हैं. तो चलिए ऐसे में विस्तार से जानते हैं कि किन बुरी आदतों की वजह से ग्रह दोष की स्थिति उत्पन्न होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शराब का सेवन करने से बचें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दरअसल, कुछ ज्योतिष इसको लेकर बताते हैं कि ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक अगर व्यक्ति में मदिरा पीने की आदत है तो यह ग्रह दोष की वजह बन सकती है. दरअसल ऐसा बताया गया है कि शराब के नशे में युवक गरीबों को सताता है और उसके साथ बुरा व्यवहार भी करता है. ऐसा करने से कुंडली में शनि ग्रह कमजोर हो जाता है. इसके साथ ही यदि किसी युवक की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती चल रही हो तो उसे कभी भी शराब नहीं पीना चाहिए.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सुबह जल्दी छोड़े बिस्तर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>साथ ही शास्त्रों के अनुसार बताया गया है कि अगर आप सुबह देर से बिस्तर छोड़ते हैं तो यह भी ग्रह दोष की सबसे बड़ी वजह बन सकती है. माना जाता है कि जो लोग सुबह में देरी से उठते है, उनकी कुंडली में सूर्य दोष को उत्तपन्न करने का काम करता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गुरु का अपमान करने से बचें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>माना जाता है कि अगर आपके अंदर बड़ों या फिर गुरु का अपमान करने की आदत है तो यह भी कुंडली में ग्रह दोष की वजह बन सकती है. दरअसल यह कुंडली में गुरु दोष को उत्पन्न करने का काम करती है. यदि युवक की कुंडली में गुरु दोष आ जाए तो करियर में उसे हमेशा हताशा ही हाथ लगेगी. इसलिए कहा जाता है कि हमेशा अपनों से बड़ों का सम्मान करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/if-you-also-have-these-habits-then-correct-them-soon-otherwise-you-may-become-a-victim-of-planetary-defects/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Pitra Dosh : अगर आप भी पितृ दोष से है परेशान तो ज्येष्ठ अमावस्या के दिन करें ये उपाय, होगी धन में वृद्धि]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/pitr-dosh-if-you-are-also-troubled-by-pitr-dosh-then-do-these-remedies-on-the-day-of-jyeshtha-amavasya-your-wealth-will-increase/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर : अक्सर आपने सुना होगा कि हमारे जीवन में समृद्धि और धन धान्य की बढ़ोतरी में पितृ आशीर्वाद का अहम योगदान होता है, इसलिए कहा भी जाता है कि पितृ को खुश रखें. ऐसे में अमावस्या की तिथि बेहद शुभ बताई गई है. बता दें कि 6 जून को अमवास्या है, जिसे हम ज्येष्ठ [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर : </strong>अक्सर आपने सुना होगा कि हमारे जीवन में समृद्धि और धन धान्य की बढ़ोतरी में पितृ आशीर्वाद का अहम योगदान होता है, इसलिए कहा भी जाता है कि पितृ को खुश रखें. ऐसे में अमावस्या की तिथि बेहद शुभ बताई गई है. बता दें कि 6 जून को अमवास्या है, जिसे हम ज्येष्ठ अमावस्या भी कहते है. इस तिथि पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और पितृ की पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है। अगर आपके घर में पितृ दोष है या पितृ नाराज हैं या घर में बरकत नहीं हो रही है, तो कुछ ऐसे आसान उपाय हैं जो ज्येष्ठ अमावस्या के तिथि पर जरूर करें। तो आइए जानते है क्या है वो उपाय।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>06 जून को ज्येष्ठ अमावस्या की तिथि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य बताते है कि 06 जून को ज्येष्ठ अमावस्या की तिथि है. इस दिन कई वर्षों के बाद एक साथ कई शुभ संयोग बन रहे हैं. साथ ही ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शिववास के अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग और धृत योग भी है. जेठ अमावस्या के दिन पितृ को खुश करने के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है. इस दिन गंगा स्नान करने के बाद पितरों की पूजा करें. साथ ही बताते है कि अगर पितृ की कृपा आपके ऊपर होगी तो हर काम में आपको सफलता मिलेगी और साथ में सब दुःख खत्म हो जाएंगे. इसके साथ ही यह दिन पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए सबसे बढ़िया दिन बताया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गंगाजल मिलाकर स्नान करें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्योतिष बताते हैं कि अगर आप इस दिन गंगा स्नान नहीं कर पाते हैं तो घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद पितृ को याद करें. पितृ पूजन में घी, जौ, अक्षत होना अति जरुरी होता है. साथ ही पितृ को सफेद पुष्प चढ़ाएं। उसके बाद पितृ कवच का पाठ करें, ऐसा आप करेंगे तो आपके पितृ प्रसन्न हो जाएंगे और आपको पितृ दोष से मुक्ति मिलेगी। साथ ही पितृ की आशीर्वाद से सारे दुखों से मुक्ति मिलेगी और घर मे कभी भी क्लेश नहीं होगा. हमेशा घर में सुख समृद्धि बनी रहेगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/pitr-dosh-if-you-are-also-troubled-by-pitr-dosh-then-do-these-remedies-on-the-day-of-jyeshtha-amavasya-your-wealth-will-increase/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Somwar Ke Upay: सोमवार को करें ये 3 उपाय, जल्द बदलेगी किस्मत]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/somwar-ke-upay-do-these-3-remedies-on-monday-luck-will-change-soon/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर : सोमवार का दिन भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित हैं। इस दिन भक्त निमित्त व्रत रख विधि-विधान से पूजा पाठ करते है। शिव पुराण में भी कहा गया है कि जो भक्त सोमवार को भगवान शिव की पूजा करता है, उस साधक के जीवन से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर : </strong>सोमवार का दिन भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित हैं। इस दिन भक्त निमित्त व्रत रख विधि-विधान से पूजा पाठ करते है। शिव पुराण में भी कहा गया है कि जो भक्त सोमवार को भगवान शिव की पूजा करता है, उस साधक के जीवन से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और सकल मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं। साथ ही भक्तों को सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>करें ये कुछ खास उपाय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जो शिव भक्त सोमवार के दिन कुछ विशेष उपाय करते हैं, उन्हें मनचाहा वरदान मिलता है। इस दिन कुछ उपाय करने का भी विधान बताया गया है। इन उपायों को करने से कहा गया है कि लोगों की फूटी किस्मत भी बदल जाती है। तो ऐसे में अगर आप भी जीवन में दुख और संकट से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो सोमवार के दिन जरूर करें ये उपाय। आइए जानते हैं-</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>करें भोलेनाथ की पूजा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अगर आप कुंडली में अशुभ ग्रहों के प्रभाव से परेशान रहते हैं तो सोमवार के दिन स्नान-ध्यान करने के बाद विधि पूर्वक भगवान शिव की पूजा पाठ करें। इस दिन भोलेनाथ पर गंगाजल में काले तिल मिलाकर चढ़ाएं। ऐसा करने से जीवन से दुख और संताप खत्म हो जाते हैं। इतना ही नहीं अगर आप मानसिक तनाव से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो सोमवार को स्नान-ध्यान के बाद भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती की पूजा करें। साथ ही कच्चे दूध से भगवान शिव को चढ़ाएं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शुक्र ग्रह कमजोर है तो करें ये उपाय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शास्त्रों के अनुसार अगर आपकी कुंडली में शुक्र ग्रह कमजोर है, तो सोमवार और शुक्रवार को भगवान भोलेनाथ की पूजा करें। साथ ही भगवान शिव को गंगाजल में शहद और सुगंध मिलाकर अभिषेक करें। माना जाता है कि ये उपाय को करने से कुंडली में शुक्र ग्रह अधिक मजबूत होता है। बता दें कि कुंडली में शुक्र मजबूत रहने से आपके सुखों में वृद्धि होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/somwar-ke-upay-do-these-3-remedies-on-monday-luck-will-change-soon/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Dharma News : ज्येष्ठ मास में होंगे ये बड़े पर्व-त्योहार, यहां जानें सबकुछ]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/dharma-news-these-big-festivals-will-be-held-in-jyeshtha-month-know-everything-here/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर : वैशाख मास की समाप्ति बौद्ध पूर्णिया के साथ हो चुकी है. हिन्दू पंचाग के मुताबिक, ज्येष्ठ माह भगवान सूर्य देव को पूरी तरह समर्पित होता है. माना जाता है कि इस माह में सूर्य देव अधिक बलवान होते है. इस वजह से इस माह में भीषण गर्मी पड़ती है. इसके साथ यह महीना [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर : </strong>वैशाख मास की समाप्ति बौद्ध पूर्णिया के साथ हो चुकी है. हिन्दू पंचाग के मुताबिक, ज्येष्ठ माह भगवान सूर्य देव को पूरी तरह समर्पित होता है. माना जाता है कि इस माह में सूर्य देव अधिक बलवान होते है. इस वजह से इस माह में भीषण गर्मी पड़ती है. इसके साथ यह महीना सूर्य की पूजा और अर्चना के लिए भी बेहद महत्वूर्ण बताया गया है. ऐसे में इस महीने अपरा एकादशी, गायत्री जयंती, गंगा दशहरा, वट सावित्री व्रत जैसे कई व्रत और त्योहार है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज से ज्येष्ठ मास की शुरुआत</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि ज्येष्ठ मास की शुरुआत 24 मई 2024 दिन शुक्रवार से हो रही है. यह माह 21 जून तक रहने वाला है. 22 जून से आषाढ़ माह की शुरुआत हो जाएगी. इस महीने में जल दान का अधिक महत्व बताया गया है.धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस माह में भूजल का स्तर अधिक नीचे चला जाता है इसलिए इस माह में जल की बर्बादी बिल्कुल भी न करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस माह में करें सूर्य देव की पूजा, मिलता है आशीर्वाद</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्येष्ठ माह पूजा,पाठ और अनुष्ठान के लिर अति महत्वपूर्ण बताया गया है. इस माह में सूर्य देव की पूजा करने से आरोग्यता का आशीर्वाद मिलता है और ऐसा करने से परिवार सुख समृद्धि से परिपूर्ण रहता है। तो आइए जानते है ज्येष्ठ मास में कौन-कौन से प्रमुख व्रत है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>26 मई 2024- एकदंत संकष्ठी चतुर्थी व्रत<br>30 मई 2024- मासिक कालाष्टमी व्रत<br>1 जून 2024- हनुमान जयंती (तेलुगु) व्रत<br>2 जून 2024- अपरा एकादशी व्रत<br>4 जून 2024- मासिक शिवरात्रि व्रत<br>6 जून 2024- शनि अमावस्या,वट सावित्री पूजा<br>10 जून 2024- विनायक चतुर्थी व्रत<br>11 जून 2024- स्कन्द षष्ठी व्रत</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>14 जून 2024- मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत<br>15 जून 2024- मिथुन संक्रांति व्रत<br>16 जून 2024- गंगा दशहरा व्रत<br>17 जून 2024- गायत्री जयंती व्रत<br>18 जून 2024- निर्जला एकादशी व्रत<br>19 जून 2024- ज्येष्ठ प्रदोष व्रत<br>21 जून 2024- ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/dharma-news-these-big-festivals-will-be-held-in-jyeshtha-month-know-everything-here/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Shukrawar Upay: शुक्रवार को महिला भूल कर भी ना करें ये काम, नाराज होती हैं मां लक्ष्मी]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/shukrawar-upay-women-should-not-do-this-work-even-by-mistake-on-friday-goddess-lakshmi-gets-angry/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर: शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस वजह से महिलाओं को इस दिन कुछ खास बातों का ध्यान रखना अति आवश्यक है। धन की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना हर इंसान की इच्छा होती है। ऐसे में अगर मां लक्ष्मी रूठ जाएं तो इंसान के ऊपर मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ता [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर: </strong>शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस वजह से महिलाओं को इस दिन कुछ खास बातों का ध्यान रखना अति आवश्यक है। धन की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना हर इंसान की इच्छा होती है। ऐसे में अगर मां लक्ष्मी रूठ जाएं तो इंसान के ऊपर मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ता है। खास तौर पर सभी घरों में महिलाओं को शुक्रवार के दिन कुछ खास उपाय करना चाहिए, जिससे मां लक्ष्मी का आशीर्वाद हमेशा बना रहें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>महिलाओं के लिए कुछ खास उपाय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शुक्रवार के दिन सबसे पहले अपने घर की सफाई करें। माना जाता है कि मां लक्ष्मी का आगमन साफ सफाई वाले घर में होता है, इस वजह से अपने घर को स्वच्छ रखें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी अति प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शुक्रवार के दिन परिवार में मां लक्ष्मी का आशीर्वाद चाहते हैं तो घर के महिलाओं को सुबह सूर्योदय के पहले बिस्तर छोड़ देना चाहिए। कहा जाता है कि जिस घर में सूर्योदय के बाद जागते हैं, वहां मां लक्ष्मी का आशीर्वाद नहीं होता।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन खास कर महिलाओं को दोपहर के समय नहीं सोना चाहिए। क्योंकि मां लक्ष्मी को यह काम पसंद नहीं है। इसलिए महिलाएं दोपहर में सोने की आदत छोड़ दें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शुक्रवार के दिन शाम होते हैं घर के मंदिरों में दीपक जरूर जलाएं। साथ ही मां लक्ष्मी जी की आरती करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और अपना आशीर्वाद बनाएं रखती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>खासकर शुक्रवार के दिन महिलाओं को रसोई घर में रात को झूठे बर्तन नहीं छोड़ना चाहिए। अगर आप रात को झूठे बर्तन रसोई घर में छोड़ते हैं तो मां लक्ष्मी रूठ जाती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अगर आप मां लक्ष्मी का आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो कभी भी झाड़ू को पैर न लगाएं। अगर गलती से कभी पैर लगा भी जाएं तो झाड़ू को प्रणाम कर लें और मां लक्ष्मी से माफी मांगे। ऐसा करने से आपके घर में मां लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/shukrawar-upay-women-should-not-do-this-work-even-by-mistake-on-friday-goddess-lakshmi-gets-angry/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Buddha Purnima: कब रखा जाएगा बुद्ध पूर्णिमा का व्रत? जानें सबकुछ]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/buddha-purnima-when-will-the-fast-of-buddha-purnima-be-observed-know-everything/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर : वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती हैं. इस तिथि पर लोग भगवान विष्णु का पूजा-पाठ करते है. इस दिन महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता हैं. हिन्दू धर्म के साथ-साथ बौद्ध धर्म के लिए भी यह दिन [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर : </strong>वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती हैं. इस तिथि पर लोग भगवान विष्णु का पूजा-पाठ करते है. इस दिन महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता हैं. हिन्दू धर्म के साथ-साथ बौद्ध धर्म के लिए भी यह दिन महत्वपूर्ण होता है. बता दें कि बुद्ध पूर्णिमा पर स्नान, दान और उपवास का एक अलग महत्व होता है. ऐसा बताया गया है कि इस तिथि पर गौतम बुद्ध ने भगवान विष्णु के अवतार मे जन्म धरती लोक में आए थे और इसी दिन गौतम बुद्ध को ज्ञान की भी प्राप्ति हुई थी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>23 मई को बुद्ध पूर्णिमा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू पंचांग के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि 22 मई को शाम 5:50 बजे से शुरू होकर अगले दिन 23 मई को शाम 6:20 बजे तक रहेगी. सनातन धर्म में ऐसे भी उदया तिथि को माना जाता है. इसलिए 23 मई को ही बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाएगी. उस दिन लोग सुबह स्नान करने के बाद दान-पुण्य का कार्य करेंगे. हालांकि पूर्णिमा का उपवास 22 मई को ही रखा जाएगा. इस संबंध में ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि व्रत के लिए पूरे दिन पूर्णिमा तिथि का होना अनिवार्य होता है इसलिए 22 मई को ही पूर्णिमा का उपवास रखा जाएगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बुद्ध पूर्णिमा के दिन जरूर करें ये कार्य</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्योतिष आचार्य के मुताबिक बुद्ध पूर्णिमा के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना गया है. स्नान के बाद भगवान सूर्य को जल जरूर चढ़ाएं और काला तिल जल में प्रवाहित करें। इसके साथ इस दिन जरूरतमंद या ब्राह्मण को अपने क्षमता के हिसाब से दान भी करें. इससे भगवान विष्णु खुश होते हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रात्रि में भगवान चंद्रदेव को दें अर्घ्य</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू धर्म के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा के दिन चंद्रदेव की पूजा-अर्चना करना शुभ बताया गया है. इस दिन रात्रि में चंदोदय के दौरान भगवान चंद्रदेव को अर्घ्य देना चाहिए. इससे आर्थिक परेशानियां खत्म होती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/buddha-purnima-when-will-the-fast-of-buddha-purnima-be-observed-know-everything/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Chaturmas News : इस दिन से शुरू होगा चातुर्मास, 4 महीनों तक गलती से भी ना करें ये काम]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/chaturmas-news-chaturmas-will-start-from-this-day-do-not-do-this-work-even-by-mistake-for-4-months/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर : हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देव उठानी एकादशी का त्यौहार मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस तिथि पर क्षीर सागर में भगवान श्री हरि विष्णु शयन के लिए जाते हैं. इस तिथि पर जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु 4 [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर : </strong>हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देव उठानी एकादशी का त्यौहार मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस तिथि पर क्षीर सागर में भगवान श्री हरि विष्णु शयन के लिए जाते हैं. इस तिथि पर जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु 4 महीने तक शयन मुद्रा में रहते हैं. इसके बाद सृष्टि की देखभाल भगवान भोलेनाथ के हाथों में रहता हैं। बता दें कि भगवान विष्णु के शयन काल से लेकर जागने तक के समय को चातुर्मास कहा जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>17 जुलाई से शुरू है चातुर्मास</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा-पाठ करना शुभ बताया गया है. लेकिन ऐसे में इस दौरान आप किसी भी तरह के शुभ व मांगलिक कार्य नहीं कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं इस साल कितने तारीख से शुरू हो रहा चातुर्मास. दरअसल इसको लेकर कुछ ज्योतिषों ने बताया है कि इस साल चातुर्मास की शुरुआत 17 जुलाई से होने जा रहा है. जिसकी समाप्ति कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की देव उठनी एकादशी के दिन यानी 12 नवंबर को होगा. आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 16 जुलाई दिन मंगलवार को शाम 8:33 से शुरू होगा जो अगले दिन 17 जुलाई बुधवार रात 9:02 पर खत्म होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>चातुर्मास के दौरान इन कामों को करने से परहेज करें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>⦁ चातुर्मास के दौरान गलती से भी तामसिक भोजन, जैसे मांस, मछली, अंडा, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>⦁ चातुर्मास के दौरान लंबी यात्रा करने से भी बचें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>⦁ इस दौरान शराब और किसी भी प्रकार के नशे का परहेज करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>⦁ इस दौरान कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>⦁ इस दौरान किसी भी जीव पर अत्याचार या हिंसा न करें, सभी के साथ प्रेमपूर्वक व शांति से रहें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/chaturmas-news-chaturmas-will-start-from-this-day-do-not-do-this-work-even-by-mistake-for-4-months/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Mohini Ekadashi 2024 : मोहिनी एकादशी पर करें ये तीन उपाय, दूर होंगी सभी परेशानी]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/mohini-ekadashi-2024-do-these-three-measures-on-mohini-ekadashi-all-problems-will-go-away/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का अपना एक अलग महत्व माना गया है. धार्मिक मान्यता के मुताबिक, जो भक्त इस पवित्र तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा-पाठ करते है, उनके जीवन से सभी परेशानी दूर हो जाती है। साथ ही युवकों के जीवन में कभी धन-धान्य की कमी नहीं आती है. बता दें कि [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर:</strong> हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का अपना एक अलग महत्व माना गया है. धार्मिक मान्यता के मुताबिक, जो भक्त इस पवित्र तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा-पाठ करते है, उनके जीवन से सभी परेशानी दूर हो जाती है। साथ ही युवकों के जीवन में कभी धन-धान्य की कमी नहीं आती है. बता दें कि वैशाख मास के शुल्क पक्ष की एकादशी तिथि को मोहिनी एकादशी मनाया जाता है. इस साल 19 मई को मोहिनी एकादशी मनाई जाएगी. माना जाता है कि अगर इस तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा-पाठ की जाएं तो जीवन से सभी प्रकार की कष्ट और दरिद्रता से मुक्ति मिलती है और साथ में भक्तों की जीवन में सुख-समृद्धि में आती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मोहिनी एकादशी पर करें ये उपाय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:list {"ordered":true} -->
<ol><!-- wp:list-item -->
<li><strong>जीवन से खत्म हो जाएंगे सारे कष्ट</strong></li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अगर आप मोहिनी एकादशी पर तुलसी के सामने घी का दीपक जलाते और तुलसी माता के मंत्रों का जाप करते है तो इससे आपकी जिंदगी में खुशियां आएगी। साथ ही इस तिथि पर तुलसी माता की 11 परिक्रमा करें. ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है और सभी पापों से मुक्ति मिलती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:list {"ordered":true,"start":2} -->
<ol start="2"><!-- wp:list-item -->
<li><strong>विवाह में आ रही परेशानी होगी दूर</strong></li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जिन लोगों के विवाह में परेशानी आ रही है. उन लोगों को मोहिनी एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए. इस तिथि पर भगवान विष्णु को पीले फूल चढ़ाएं। माना जाता है कि जो भी व्यक्ति ऐसा करता है, उसकी विवाह में आ रही सभी परेशानीखत्म हो जाती हैं और जल्द ही शादी हो जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:list {"ordered":true,"start":3} -->
<ol start="3"><!-- wp:list-item -->
<li><strong>अगर जीवन में सुख-समृद्धि चाहते हैं तो करें ये उपाय</strong></li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अगर आप अपने जीवन में सुख-समृद्धि चाहते हैं तो मोहिनी एकादशी के शुभ तिथि पर आप अपने घर पर आए किसी भी लोगों को भूखा न जाने दें. उन्हें कुछ न कुछ जरूर खिलाएं। ऐसा करने से भक्तों के परिवार पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/mohini-ekadashi-2024-do-these-three-measures-on-mohini-ekadashi-all-problems-will-go-away/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Ganga Saptami 2024 : गंगा सप्तमी आज, इन चीजों के दान से मिलते है पुण्य]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/ganga-saptami-2024-ganga-saptami-today-you-get-virtue-by-donating-these-things/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर: आज देश भर में गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जा रहा है। (Ganga Saptami 2024भारत में गंगा नदी को सबसे पवित्र नदियों में से एक माना गया है। आज इस शुभ तिथि पर, देवी गंगा की पूजा-अर्चना की जाती है क्योंकि ऐसा माना गया है कि सप्तमी तिथि पर माता गंगा अपने भक्तों को [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर: </strong>आज देश भर में गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जा रहा है। (Ganga Saptami 2024भारत में गंगा नदी को सबसे पवित्र नदियों में से एक माना गया है। आज इस शुभ तिथि पर, देवी गंगा की पूजा-अर्चना की जाती है क्योंकि ऐसा माना गया है कि सप्तमी तिथि पर माता गंगा अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी पर आती हैं। इस पर्व को लोग हर वर्ष सप्तमी तिथि को मनाते है। इस तिथि को वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मनाया जाता है। इस दिन, भक्त पवित्र स्नान करने के बाद माता गंगा का आशीर्वाद लेते है। इस अवसर पर भक्त गंगा नदी के तट पर जुटते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस मुहूर्त में करें पूजा-पाठ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस साल गंगा सप्तमी 14 मई को मनाई जा रही है। गंगा सप्तमी मध्याह्न मुहूर्त 14 मई को सुबह 10:56 बजे से दोपहर 1:39 बजे तक रहेगा। इस दिन, भक्त सुबह जल्दी उठकर माता गंगा की पूजा करते हैं। गंगा नदी में डुबकी लगाते है. इसके बाद वो एक दीपक जलाते हैं और उसे नदी में प्रवाहित करते हैं। साथ ही मां गंगा को माला और मिठाई चढ़ाया जाता हैं। शाम के समय मां गंगा का आशीर्वाद लेने के लिए एक विशेष आरती होती है। भक्त शाम को देवी गंगा की आराधना करते है। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, पानी और कपड़े दान करने से आपके सभी दुःख दूर होते है। साथ ही गंगा नदी के तट पर बैठकर महा मृत्युंजय मंत्र का जाप भी करना शुभ माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गंगा सप्तमी पर इन कामों को करने से बचें -</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस तिथि पर किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आज के दिन बुजुर्गों और महिलाओं का अपमान नहीं करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>उपवास के दौरान दिन में सोने से बचें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>तामसिक भोजन का परहेज करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/ganga-saptami-2024-ganga-saptami-today-you-get-virtue-by-donating-these-things/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Parshuram Jayanti 2024 : परशुराम जयंती और अक्षय तृतीया आज, जानें क्या है विशेष]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/parshuram-jayanti-2024-parshuram-jayanti-and-akshaya-tritiya-today-know-what-is-special/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर: आज 10 मई शुक्रवार को देश भर में परशुराम जयंती के साथ-साथ अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जा रहा है। आज वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि है। मान्यता है कि इस तिथि को भगवान शिव और उनकी पत्नी माता गौरी द्वारा नियंत्रित किया जाता है. इस तिथि को गृहप्रवेश, गृह निर्माण के [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर:</strong> आज 10 मई शुक्रवार को देश भर में परशुराम जयंती के साथ-साथ अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जा रहा है। आज वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि है। मान्यता है कि इस तिथि को भगवान शिव और उनकी पत्नी माता गौरी द्वारा नियंत्रित किया जाता है. इस तिथि को गृहप्रवेश, गृह निर्माण के लिए नीवं, शुभ कार्यों के लिए शुभ मानी जाती है. माना जाता है कि इस तिथि के दिन झगड़ों और मुकदमों से लोगों को दूर रहना चाहिए. आज यानी शुक्रवार को परशुराम जयंती, अक्षय तृतीया, मातंगी जयंती, रोहिणी व्रत भी है. बता दें कि आज तृतीया तिथि देर रात 2.50 (11 मई) तक है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस मुहूर्त में जन्म लिए थे भगवान परशुराम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भगवान परशुराम का जन्म वैशाख माह के प्रदोष काल में हुआ था। ऐसे में जिस दिन तृतीया तिथि होती है, उस तिथि को भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है। इसलिए इस साल भगवान परशुराम की जयंती 10 मई (शुक्रवार) को मनाया जाएगा। अक्षय तृतीया पर खरीदारी करने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज सार्वजनिक अवकाश घोषित</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि 10 मई को राजस्थान में भगवान परशुराम की जयंती को लेकर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इस तिथि पर राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में भगवान परशुराम की जयंती बेहद धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन अक्षय तृतीया भी है। ऐसे में इस तिथि पर नए व्यापार की शुरूआत करना शुभ माना जाता है। इस दिन हरियाणा सरकार द्वारा भी सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/parshuram-jayanti-2024-parshuram-jayanti-and-akshaya-tritiya-today-know-what-is-special/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Akshay Tritiya: अक्षय तृतीया पर इन चीजों का दान करने से खुल जाएगी किस्मत, भगवान विष्णु का मिलेगा ढ़ेर सारा आशीर्वाद]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/akshay-tritiya-donating-these-things-on-akshay-tritiya-will-open-your-luck-you-will-get-lots-of-blessings-from-lord-vishnu/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर: अक्षय तृतीया का त्यौहार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. (Akshay Tritiya) इस साल कल यानी शुक्रवार 10 मई को इस पर्व को मनाया जाएगा। इस तिथि पर सुबह स्नान और दान करने का विशेष महत्व माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार इस तिथि को ईश्वरीय तिथि बताया [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर:</strong> अक्षय तृतीया का त्यौहार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. (Akshay Tritiya) इस साल कल यानी शुक्रवार 10 मई को इस पर्व को मनाया जाएगा। इस तिथि पर सुबह स्नान और दान करने का विशेष महत्व माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार इस तिथि को ईश्वरीय तिथि बताया जाता है. ग्रंथो के मुताबिक इस दिन किए गए पुण्य कर्मों का अक्षय फल मिलता है. इस दिन ही देश भर में भगवान विष्णु के एक अवतार भगवान परशुराम की जयंती भी मनाई जाती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ज्योतिष के मुताबिक</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस तिथि को लेकर ज्योतिष का मानना है कि अक्षय तृतीया के दिन कुछ खास चीजों के दान करने से अधिक पुण्य मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन गंगा स्नान और दान करने से अक्षय पुण्य का फल तो मिलता ही है। इसके साथ-साथ किस्मत के दरवाजे भी खुल जाते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन सभी चीजों का दान जरूर करें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि अक्षय तृतीया के दिन सुबह गंगा स्नान अवश्य करना चाहिए. गंगा स्नान के बाद मिट्टी के घड़े में जल भरकर ब्राह्मण को दान देना चाहिए. इसके साथ पंखे का दान भी इस दिन करने से शुभ माना जाता है. साथ में अन्न का दान जरूर करना चाहिए. जो भी व्यक्ति इन सभी चीजों का दान करता है उसे अक्षय पुण्य मिलती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>परशुराम जयंती 10 मई को</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>देश भर में 10 मई को परशुराम जयंती की धूमधाम रहेगी। प्रदेशवासियों को इस तिथि का इंतजार हमेशा से लगा रहता है। इस साल भगवान परशुराम की जयंती शुक्रवार को है। परशुराम जयंती की तैयारियां कई दिनों से जारी है। हिंदू धर्म में परशुराम जयंती का विशेष महत्व है। परशुराम को भगवान विष्णु के 24 अवतार माने गए हैं। मान्यता के अनुसार 10 अवतारों को मुख्य अवतार बताया गया है। भगवान परशुराम इन दस अवतारों में शामिल हैं। हर वर्ष वैशाख माह में शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि को भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है। हालांकि इस दिन अक्षय तृतीया का त्यौहार भी मनाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/akshay-tritiya-donating-these-things-on-akshay-tritiya-will-open-your-luck-you-will-get-lots-of-blessings-from-lord-vishnu/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Parshuram Jayanti: 10 मई को मनाई जाएगी परशुराम जयंती, शुक्रवार को अक्षय तृतीया भी]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/public-holiday-parshuram-jayanti-will-be-celebrated-on-may-10-akshaya-tritiya-also-on-friday/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर: देश भर में 10 मई को परशुराम जयंती की धूमधाम रहेगी। (Parshuram Jayanti) देशवासियों को इस तिथि का इंतजार हमेशा से लगा रहता है। इस साल भगवान परशुराम की जयंती शुक्रवार को है। परशुराम जयंती की तैयारियां कई दिनों से जारी है। हिंदू धर्म में परशुराम जयंती का विशेष महत्व है। परशुराम को भगवान [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर:</strong> देश भर में 10 मई को परशुराम जयंती की धूमधाम रहेगी। (Parshuram Jayanti) देशवासियों को इस तिथि का इंतजार हमेशा से लगा रहता है। इस साल भगवान परशुराम की जयंती शुक्रवार को है। परशुराम जयंती की तैयारियां कई दिनों से जारी है। हिंदू धर्म में परशुराम जयंती का विशेष महत्व है। परशुराम को भगवान विष्णु के 24 अवतार माने गए हैं। मान्यता के अनुसार 10 अवतारों को मुख्य अवतार बताया गया है। भगवान परशुराम इन दस अवतारों में शामिल हैं। हर वर्ष वैशाख माह में शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि को भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है। हालांकि इस दिन अक्षय तृतीया का त्यौहार भी मनाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस मुहूर्त में जन्म लिए थे भगवान परशुराम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भगवान परशुराम का जन्म वैशाख माह के प्रदोष काल में हुआ था। ऐसे में जिस दिन तृतीया तिथि होती है, उस तिथि को भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है। इसलिए इस साल भगवान परशुराम की जयंती 10 मई (शुक्रवार) को मनाया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>10 मई को सार्वजनिक छुट्टी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि 10 मई को राजस्थान में भगवान परशुराम की जयंती को लेकर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इस तिथि पर राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में भगवान परशुराम की जयंती बेहद धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन अक्षय तृतीया भी है। ऐसे में इस तिथि पर नए व्यापार की शुरूआत करना शुभ माना जाता है। इस दिन हरियाणा सरकार द्वारा भी सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/public-holiday-parshuram-jayanti-will-be-celebrated-on-may-10-akshaya-tritiya-also-on-friday/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Varuthini Ekadashi 2024: कब रखें वरुथिनी एकादशी व्रत? दो दिन बन रहे संयोग]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/varuthini-ekadashi-2024-when-to-observe-varuthini-ekadashi-fast-coincidences-are-happening-in-two-days/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर: हिंदू धर्म शास्त्रों में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है. वैशाख माह चल रहा है, ऐसे में लोगों को एकादशी तिथि को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। बता दें कि बैसाख माह की एकादशी व्रत को लोग वरुथिनी एकादशी व्रत के नाम से जानते हैं। इस बीच तिथि को लेकर लोगों में आशंका देखा [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर:</strong> हिंदू धर्म शास्त्रों में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है. वैशाख माह चल रहा है, ऐसे में लोगों को एकादशी तिथि को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। बता दें कि बैसाख माह की एकादशी व्रत को लोग वरुथिनी एकादशी व्रत के नाम से जानते हैं। इस बीच तिथि को लेकर लोगों में आशंका देखा जा रहा है। वहीं तमाम ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस वर्ष वरुथिनी एकादशी व्रत 4 मई के दिन मनाई जाएगी। इस दिन लोग भगवान विष्णु की पूजा विशेष तौर पर करते है। तो ऐसे में चलिए जानते है इस दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>हर माह के दोनों पक्षों में मनाई जाती है एकादशी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सनातन धर्म के अनुसार हर माह के दोनों पक्षों में एकादशी मनाई जाती है। इस दिन लोग भगवान विष्णु का पूजा पाठ कर उपवास रखते हैं। चार मई को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकदाशी है. जिसे हम वरुथिनी एकादशी के नाम से भी जानते है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना का अधिक महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन विष्णु का नाम मात्र से ही भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण होती है। इस दिन भक्त श्री हरि को प्रसन्न करने के लिए विष्णु पाठ करते है. ऐसे में इस तिथि पर कौन सी शुभ समय माना गया है, इससे जानते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:image {"id":11011,"sizeSlug":"large","linkDestination":"none"} -->
<figure class="wp-block-image size-large"><img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/05/image-1024x576.png" alt="" class="wp-image-11011" /></figure>
<!-- /wp:image -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ये हैं पूजा का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू पंचांग के मुताबिक इस साल एकादशी का व्रत 4 मई को है. माना जाता है कि इस दिन लोग धन से जुड़ी समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए वरुथिनी एकादशी का व्रत रखते है. इस साल यह तिथि की शुरुआत 3 मई रात 11:24 से होगा जो अगले दिन 4 मई रात 8:38 पर खत्म होगा। इस तिथि पर व्रत और दान-पुण्य करना अति शुभ माना गया है. तो चलिए जानते है इस तिथि का शुभ मुहूर्त और इस तिथि पर क्या करें और क्या नहीं करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ये कार्य जरूर करें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:list -->
<ul><!-- wp:list-item -->
<li>इस दिन तुलसी पूजन करना बेहद ही शुभ माना जाता है। तुलसी की पूजा करने से भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>इस तिथि पर राहगीरों को पानी पिलाना भी अति शुभ माना गया है.</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>इस दिन पशुओं और पक्षियों को दाना खिलाएं।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>वस्त्र और भोजन दान करें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>फल का दान करना अति शुभ होता है।</li>
<!-- /wp:list-item --></ul>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ये कार्य करने से बचे</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:list -->
<ul><!-- wp:list-item -->
<li>इस तिथि पर तामसिक भोजन करने से बचें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>व्रत के दौरान भोजन और पानी पिने से बचें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>तिथि समाप्त होने पर ही व्रत का पारण करें।</li>
<!-- /wp:list-item --></ul>
<!-- /wp:list -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/varuthini-ekadashi-2024-when-to-observe-varuthini-ekadashi-fast-coincidences-are-happening-in-two-days/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[छत्तीसगढ़ में भव्य है माता का यह मंदिर, दर्शन मात्र से भक्तों की होती है मनोकामना पूरी]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/this-temple-of-mata-is-grand-in-chhattisgarh-devotees-wishes-are-fulfilled-just-by-darshan/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर : देश भर में बड़े ही धूमधाम से चैत्र नवरात्रि का त्योहार मनाया जा रहा है। इस बीच आज हम बात करने वाले है छत्तीसगढ़ में स्थित माता का मंदिर जहां का एक अलग ही पहचान है। बता दें प्रदेश में मां भगवती के अलग-अलग रूपों में विरजामन कई शक्तिपीठ और सिद्धिपीठ हैं. ऐसे [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर :</strong> देश भर में बड़े ही धूमधाम से चैत्र नवरात्रि का त्योहार मनाया जा रहा है। इस बीच आज हम बात करने वाले है छत्तीसगढ़ में स्थित माता का मंदिर जहां का एक अलग ही पहचान है। बता दें प्रदेश में मां भगवती के अलग-अलग रूपों में विरजामन कई शक्तिपीठ और सिद्धिपीठ हैं. ऐसे में हम आपको राजधानी रायपुर में स्थित श्री राजराजेश्वरी मां महामाया देवी के बारे में बताएंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज से 1400 साल बना था मंदिर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि राजधानी रायपुर के पुरानी बस्ती में आदि शक्तिपीठ के रुप में श्री राजराजेश्वरी मां महामाया देवी मंदिर स्थित है। जो सभी भक्तों का आस्था का केंद्र माना जाता है. इस मंदिर को ‘हैहयवंशी’ राजा ने 1482 में बनवाया था, मंदिर निर्माण के सबूत के तौर पर संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा तैयार किए गए गजट में देखने को मिलता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ये हैं मंदिर के रहस्य</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मंदिर के पुजारी मंदिर को लेकर बताते है कि यह छत्तीसगढ़ के 36 शक्तिपीठों या प्रदेश में स्थित 36 किलों में से एक है. इसके बाद पुजारी ने यह भी कहा कि आज से 1400 वर्ष पहले हैहयवंशी राजा मोरध्वज ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। इस मंदिर में मां महामाया के साथ मां समलेश्वरी की भी पूजा होती हैं. सबसे अहम बात यह है कि सूर्यास्त के दौरान सूर्य की किरणें मां महामाया के चरणों को छूती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>प्रदेश में हैं 36 गढ़</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पुरातत्व विभाग ने महामाया मंदिर परिसर में स्थित मां समलेश्वरी माता मंदिर को आठवी शताब्दी का मंदिर बताया गया है. बताया गया है कि यह मंदिर हैहयवंशी राजाओं की कुलदेवी है. जहां जहां हैहयवंशी राजाओं ने अपना महल बनाया वहां उन्होंने कुलदेवी भगवती मां महामाया देवी को जगह दिया . इस वजह से छत्तीसगढ़ का नामकरण भी इनके द्वारा निर्माण किए गए गढ़ अर्थात किला से हुआ. छत्तीसगढ़ में 36 किले यानी 36 गढ़ हैं और वहां मां महामाया देवी का मंदिर स्थित है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/this-temple-of-mata-is-grand-in-chhattisgarh-devotees-wishes-are-fulfilled-just-by-darshan/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Chaitra Navratri 2024 : छत्तीसगढ़ में ये शक्तिपीठ का विशेष महत्व, देश-विदेशों से पहुंचते हैं श्रद्धालु]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/chaitra-navratri-2024-this-shaktipeeth-has-special-significance-in-chhattisgarh-devotees-arrive-from-across-the-country-and-abroad/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर: आज से आस्था का पर्व चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में एक ऐसा जगह है, जहां देश से लेकर विदेशों तक के श्रद्धालु नवरात्री के दौरान मां का आशीर्वाद लेने पहुंचते है। बता दें कि प्रदेश के धर्मनगरी डोंगरगढ़ में आज 9 अप्रैल से नवरात्रि के शुभ [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर:</strong> आज से आस्था का पर्व चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो गई है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में एक ऐसा जगह है, जहां देश से लेकर विदेशों तक के श्रद्धालु नवरात्री के दौरान मां का आशीर्वाद लेने पहुंचते है। बता दें कि प्रदेश के धर्मनगरी डोंगरगढ़ में आज 9 अप्रैल से नवरात्रि के शुभ अवसर पर मेला लगेगा। डोंगरगढ़ में पहाड़ों पर माता बम्लेश्वरी देवी का मंदिर है। जहां नवरात्र के दौरान अधिक संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती हैं। ऐसे में मंदिर कमेटी द्वारा बताया गया कि इस साल चैत्र नवरात्रि पर देश भर से लोग माता का दर्शन करने मंदिर पहुंचेंगे। इस दौरान नवरात्र पर मंदिर परिसर में 8 से 9 हजार दिप जलाये जाएंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कई दिग्गज नेताओं ने की ज्योति कलश स्थापना</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि नवरात्रि पर लोगों के अंदर माता के लिए एक अलग ही आस्था जगी होती है। इस दौरान धर्मनगरी डोंगरगढ़ में माता बम्लेश्वरी देवी मंदिर में विदेशी श्रद्धालुओं की भी जोत जलेगी। अमरीका, सऊदी अरब, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया के कई श्रद्धालुओं ने मंदिर के अंदर आज नवरात्र के पहले दिन ज्योति कलश स्थापना किए हैं। मंदिर ट्रस्ट के मुताबिक मंदिर में कई दिग्गज नेताओं ने अपने नाम से भी ज्योति कलश जलाए है। आज मंगलवार को शाम 7 बजे नवरात्र के पहले दिन ज्योति कलश प्रज्जवलित होंगे। हालांकि मंदिर में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत मेहमानों की तरह की जा रही है। गर्मी को देखते हुए कमेटी द्वारा श्रद्धालुओं को पिने के लिए पानी और छांव की व्यवस्था है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सुरक्षा के कड़े इंतजाम व पॉलीथिन पर रोक</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>प्रदेश में कुछ दिन पहले आगजनी की ख़बर के बाद सुरक्षा के कड़े बंदोवस्त किए गए हैं। मंदिर में मां का दर्शन हेतु हजारों संख्या में भीड़ उमड़ रही है। इस वजह से नगर पालिका की तरफ से मंदिर के आसपास दो जगहों पर फायर ब्रिगेड की टीम उपलब्ध कराइ गई है। फायर ब्रिगेड टीम को राजनांदगांव से बुलाई गई है। वहीं नगर पालिका प्रशासन की तरफ से इस बार पॉलिथीन के उपयोग पर रोक लगाई गई है। उनका मानना है कि नवरात्रि मेला खत्म होने के बाद पूरे शहर में वेस्ट पॉलिथीन का जमावड़ा नजर आता है। पालिका की तरफ से इस नवरात्रि में पॉलिथीन न इस्तेमाल करने पर नजर रखी जाएगी। इसको लेकर पालिका की तरफ से स्पेशल ड्यूटी भी लगाई गई है जो ऐसी गतिविधि पर नजर बनाए रखेंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/chaitra-navratri-2024-this-shaktipeeth-has-special-significance-in-chhattisgarh-devotees-arrive-from-across-the-country-and-abroad/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Holika Dahan 2024: होलिका दहन आज, जानें सही मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/holika-dahan-2024-holika-dahan-today-know-the-correct-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। होली हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। होली से एक दिन पहले होलिका दहन होता है, जो इस साल 24 मार्च यानी आज रविवार को मनाया जाएगा. यह पर्व भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद को समर्पित है। इस दिन को लेकर लोगों के अपने-अपने विचार हैं। कहा जाता है कि [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> होली हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। होली से एक दिन पहले होलिका दहन होता है, जो इस साल 24 मार्च यानी आज रविवार को मनाया जाएगा. यह पर्व भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद को समर्पित है। इस दिन को लेकर लोगों के अपने-अपने विचार हैं। कहा जाता है कि होलिका दहन से पहले मुहूर्त देखना बहुत जरूरी है क्योंकि इसके बिना यह त्योहार पूरा नहीं होगा. तो आईए जानते हैं पूजा के नियमों के बारे में ।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>होलिका दहन शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस साल होलिका दहन कुछ समय के लिए भद्रा काल के साये में रहेगा और 24 मार्च दिन रविवार रात 11:13 बजे तक रहेगा. ऐसे में होलिका दहन का सबसे अच्छा समय रात 11:14 बजे से 12:20 बजे के बीच है। इस दौरान बिना किसी परेशानी के होलिका दहन किया जा सकता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस तरह मनाएं होलिका दहन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>होलिका दहन की पूजा से पहले पवित्र स्नान करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>स्नान के बाद जहां होलिका दहन की पूजा कर रहे हो, वहां पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पूजा के लिए गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमा बनाएं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके बाद रोली, अक्षत, फूल, फूलों की माला, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी,मूंग, बताशे, गुलाल नारियल, 5 प्रकार के अनाज और एक लोटे में पानी रख लें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>फिर इन चीजों से विधि अनुसार करें पूजा </strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>फल, गुझिया, मीठी पूरी आदि का भोग लगाएं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके साथ ही भगवान नरसिंह की भी पूजा विधि-विधान के साथ करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अंत में अपनी मनोकामनाओं को होलिका दहन के समक्ष कहें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दिन भर के शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>होलिका दहन के दिन पड़ने वाले शुभ मुहूर्त की बात करें तो दिन भर में पड़ने वाले शुभ, लाभ और अमृत मुहूर्त काफी अच्छे होने वाले हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>लाभ – सुबह 9:24 से 10:56 तक<br>अमृत – सुबह 10:56 से दोपहर 12:00 का 27 मिनट तक<br>शुभ – दोपहर 1: 59 से 3:31 तक</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ऐसे करें होलिका दहन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>होलिका दहन सूर्यास्त के बाद किया जाता है। इस दिन लोग होलिका जलाते हैं और मंत्रों का जाप करने के साथ पारंपरिक लोकगीत भी गाते हैं। होलिका दहन से पूर्व होली पर रोली, अक्षत, फूल कच्चे सूत का धागा, मूंग दाल, बताशा, हल्दी के टुकड़े, नारियल और गुलाल चढ़ाकर पूजा की जाती है। इसके पश्चात हाथों में जल लेकर होलिका की परिक्रमा की जाती है। इस दौरान घर परिवार की सुख समृद्धि की कामना भी की जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/holika-dahan-2024-holika-dahan-today-know-the-correct-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Holi 2024: अटेंशन प्लीज, कल से शुरू होगी Holi, नकली और मिलावटी रंगों से रहे सावधान]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/holi-2024-attention-please-holi-will-start-from-tomorrow-be-careful-of-fake-and-adulterated-colors/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। रंगो का त्योहार होली की शुरुआत कल यानी 24 मार्च से शुरू है। कल रविवार को होलिका दहन मनाया जाएगा। इसके बाद 25 मार्च को होली का पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा। ऐसे में होली के मौके पर हमें नकली और मिलावटी रंगों से सावधान रहने की जरुरत हैं। ऐसे में आइए [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> रंगो का त्योहार होली की शुरुआत कल यानी 24 मार्च से शुरू है। कल रविवार को होलिका दहन मनाया जाएगा। इसके बाद 25 मार्च को होली का पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा। ऐसे में होली के मौके पर हमें नकली और मिलावटी रंगों से सावधान रहने की जरुरत हैं। ऐसे में आइए जानते है किस तरह की होली खेलने से आप बीमार नहीं पड़ेंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>हर्बल रंग से ही खेले होली</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>देश भर में होली एक ऐसा पर्व है जिसमें लोग एक दूसरे के साथ जमकर रंग, गुलाल खेलते है। ऐसे में रंगों के दुष्प्रभाव से लोगों को कई बार कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बता दें कि ऐसे में लोगों को प्राकृतिक यानी हर्बल रंग से होली खेलने की लगातार अपील की जा रही है। इसके बावजूद भी कई जगहों पर अनजाने में लोगों को केमिकल युक्त रंगों का सामना करना पड़ता है। बड़े हो या छोटे सभी एक दूसरे के साथ खूब होली खेलते है। ऐसे में आपको अपने सेहत का ख्याल अवश्य रखना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>केमिकल वाले रंगों से रहे सावधान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>होली के मौके पर बाजारों में केमिकल वाले रंगों की लूट मची रहती है। ऐसे में आगर आप इन रंगों का शिकार होते हैं तो आपकी आंखे लाल हो जाती हैं। चेहरे पर कई तरह के दाग और जलन होना शुरू हो जाती है। इस दौरान खास कर विमार लोग जैसे अस्थमा या जल्द एलर्जी युक्त शरीर को इन चीजों से बचना चाहिए। हालांकि केमिकल वाले रंग अगर गलती से मुंह में अंदर प्रवेश करता है तो आपको अस्थमा, एलर्जी और चेहरा खराब भी हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। इसके साथ नेत्र रोग विशेषज्ञों ने कहा है कि होली पर रंग और पानी भरे गुब्बारे से बचें। अथवा अगर इनकी चोट अगर लगती है तो आपकी आखों की रोशनी जा सकती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बीमार लोग रहें अधिक सतर्क</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ऐसे में लोगों को लगातार इस होली हर्बल रंग के संग का स्लोगन भी सुनने को मिल रहा है। सभी से अपील की जा रही है कि लोग होली पर प्राकृतिक यानी हर्बल रंग से ही होली खेले। ताकि केमिकल वाले रंगों से बचा जाए। अपने सेहत को ठीक रखा जाए। ख़ास कर पहले से बीमार लोगों को इस अवसर पर अधिक ध्यान देने की जरुरत है। तमाम फिजिशियन द्वारा लगातार बीमार मरीजों को सचेत किया जा रहा है। ऐसे में होली पर बनाए गए तरह-तरह के पकवान में तेल और मसाले अधिक होते है। इस दौरान ऐसे भोजन से पेट संबंधी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। होली पर पानी में ज्यादा भींगने से जुकाम, खांसी, बुखार की समस्या होती है। इस कारण बीमार लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरुरत हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन बातों का रखें ध्यान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:list -->
<ul><!-- wp:list-item -->
<li>प्राकृतिक रंगों से होली खेलें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>ज्यादा तेल मसाला युक्त भोजन करने से परहेज करें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>आंखों में रंग जाने पर रगड़े नहीं बल्कि साफ पानी से धोएं।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई भी क्रीम या दवाइयां न लगाएं।</li>
<!-- /wp:list-item --></ul>
<!-- /wp:list -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/festival/holi-2024-attention-please-holi-will-start-from-tomorrow-be-careful-of-fake-and-adulterated-colors/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Holi Special Trains: यात्रीगण Attention Please… होली पर चलेंगी ये स्पेशल Train, जानें ताजा अपडेट्स]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/top-news/holi-special-trains-passengers-attention-please-these-special-trains-will-run-on-holi-know-latest-updates/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। देश भर में होली की धूम है। ऐसे में लोगों को एक जगह से दूसरे जगह जाने के लिए लोग किसी न किसी यातायात के साधन का प्रयोग करते है। लेकिन होली और दिवाली ऐसा पर्व हैं जो लोग अपने घर से बाहर रहते हैं वे अपने घर जाने के लिए कई महीने पहले [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> देश भर में होली की धूम है। ऐसे में लोगों को एक जगह से दूसरे जगह जाने के लिए लोग किसी न किसी यातायात के साधन का प्रयोग करते है। लेकिन होली और दिवाली ऐसा पर्व हैं जो लोग अपने घर से बाहर रहते हैं वे अपने घर जाने के लिए कई महीने पहले ही ट्रेन टिकट लेते हैं। लेकिन सभी लोगों का टिकट कन्फर्म हो जाए पॉसिबल ही नहीं है। इसके लिए रेलवे ने इस होली को देखते हुए यात्रीगण को कुछ हद तक राहत देने का फैसला किया है। ऐसे में होली के अवसर पर रायपुर स्टेशन से होकर चलने वाली गाड़ी की संख्या बढ़ा दी गई है। लेकिन ट्रेन की लेटलतीफी के कारण यात्री को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>होली को देखते हुए दी गई ये सुविधा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>रेलवे ने त्योहारी सीजन को देखते हुए यात्रियों को कंफर्म सीट मिल सके इस पर पूरा कार्य किया है। आगामी होली पर्व को देखते हुए रेलवे ट्रेनों की संख्या में वृद्धि की है। ऐसे में लगातार सभी स्टेशनों पर यात्रियों की आवजाही बढ़ रही है। बता दें कि होली में महज कुछ दिन ही शेष रह गए हैं। ऐसे में रेलवे ने कई ट्रेनों की संख्या को बढ़ा दी है। जिससे यात्रीगण को कन्फर्म सीट मिल सके। वहीं पिछले तीन-चार दिनों के भीतर मुख्य हावड़ा-मुंबई लाइन के अलग रेलवे के कई रूट में होली स्पेशल ट्रेनें संचालन का शेड्यूल जारी किया गया है। इससे यात्रियों को काफी हद तक सुविधा मिलेगी, लेकिन वापसी के वक्त बहुत कम होली स्पेशल की सुविधा यात्रियों को दी जा रही है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जानें ट्रेन का शेडूअल</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि होली स्पेशल सुपर फास्ट ट्रेन संबलपुर-पुणे-संबलपुर के बीच तीन फेरे के लिए संचालन की जा रही है। ट्रेन नंबर 08327 संबलपुर से पुणे के लिए 17 मार्च को रवाना हुई। अब 24 और 31 मार्च को संबलपुर से चलेगी। इसी तरह ट्रेन नंबर 08328 पुणे से 19 एवं 26 मार्च तथा 2 अप्रैल को रवाना होगी। इसमें 6 सामान्य, 9, स्लीपर, 04 एसी-III, 01 एसी-II सहित 22 कोच हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दुर्ग से पटना के लिए Holi स्पेशल गाड़ी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दुर्ग से पटना के लिए एक फेरे के लिए होली स्पेशल ट्रेन चलने वाली है। 22 मार्च को ट्रेन नंबर 08793 दुर्ग-पटना होली स्पेशल संचालन में होगी और पटना की ओर से यह ट्रेन 23 मार्च को दुर्ग के लिए रवाना होगी। इस ट्रेन में सामान्य, स्लीपर समेत 23 कोच शामिल हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>होली के कारण ट्रेन और प्लेन के बाद अब बसें भी हाउसफुल</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>होली के कारण ट्रेन और प्लेन के बाद अधिकतर यात्री बसों में अब पैर रखने की जगह नहीं बची हुई है। हालांकि 4 दिन बाद होलिका दहन है। लेकिन, अपने घर लौटने वालों की भीड़ अभी से बस स्टैण्ड में नजर आ रही है। बता दें कि खास तौर पर यूपी, बिहार, झारखंड और ओडिशा जाने वाली बसों में तीन से चार दिन की वेटिंग देखने को मिल रही है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/top-news/holi-special-trains-passengers-attention-please-these-special-trains-will-run-on-holi-know-latest-updates/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Good News : छत्तीसगढ़ में हुई छुट्टी की घोषणा, जारी किया गया रामनवमी व चेटीचंद पर सरकारी Holiday]]></title>
                    <link>https://chhattisgarh.inkhabar.com/top-news/good-news-holiday-announced-in-chhattisgarh-government-holiday-issued-on-ram-navami-and-chetichand/</link>
                    <description><![CDATA[रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब सरकारी दफ्तरों के साथ-साथ सभी बैंकों में भी कुछ पर्व त्योहार पर अवकास घोषित कर दिया गया है। ऐसे में रामनवमीं और चेटीचंद के अवसर पर सरकारी छुट्टी होगी। इन दिनों पर सार्वजनिक अवकाश रहेगा। प्रदेश की साय सरकार ने इन दो पर्व पर सार्वजनिक अवकाश देने का ऐलान किया है। [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://chhattisgarh.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-08T092526.912.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>रायपुर।</strong> छत्तीसगढ़ में अब सरकारी दफ्तरों के साथ-साथ सभी बैंकों में भी कुछ पर्व त्योहार पर अवकास घोषित कर दिया गया है। ऐसे में रामनवमीं और चेटीचंद के अवसर पर सरकारी छुट्टी होगी। इन दिनों पर सार्वजनिक अवकाश रहेगा। प्रदेश की साय सरकार ने इन दो पर्व पर सार्वजनिक अवकाश देने का ऐलान किया है। ऐसे में रामनवमी व चेटीचंद पर सभी सरकारी दफ्तरों के साथ बैंक में भी छुट्टी रहेगी। बैंक इम्पलाइज एसोसियेशन के लगातार आग्रह करने पर सरकार ने रामनवमीं को सार्वजनिक छुट्टी घोषित किया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong> 17 अप्रैल रामनवमीं पर ये रहेंगे बंद</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>छत्तीसगढ़ में साय सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। इसके अनुसार रामनवमीं के मौके पर 17 अप्रैल को राज्य भर में सार्वजनिक अवकाश रहेगा. इस दिन प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालय, स्कूल-कालेज और बैंक बंद रहेंगे. इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी किया है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन ने CM साय को लिखा था पत्र</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गौरतलब है कि, बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन ने प्रदेश के मुखिया विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर रामनवमीं जैसे पर्व त्यौहार पर सार्वजनिक छुट्टी देने की अपील लगातार कर रही थी। इसको देखते हुए मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>चेट्री चंड महोत्सव पर सामान्य अवकाश</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मुख्यमंत्री के आदेश के बाद सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आदेश जारी किया गया है। इसके साथ ही प्रदेश भर में, चेट्री चंड महोत्सव यानी 9 अप्रैल को पहले ऐच्छिक अवकाश दिया जाता था। इसको देखते हुए भी मुख्यमंत्री साय ने पिछले दिनों इसे सामान्य अवकाश घोषित किया। GAD ने इसके लिए आदेश जारी कर दिया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रामलला की प्राण प्रतिष्ठा पर मिली थी आधे दिन की छुट्टी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि इससे पहले अयोध्या में 22 जनवरी को हुए रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर प्रदेश भर में दोपहर 2:30 बजे तक सभी सरकारी दफ्तरों में अवकास रही . यह ऐलान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा किया गया था।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जानें कब हैं रामनवमी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिन्दू पंचांग के मुताबिक, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 16 अप्रैल को दोपहर 01 बजकर 23 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन यानी 17 अप्रैल को दोपहर 03 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी. इसके साथ ही देश भर में 17 अप्रैल को राम नवमी धूमधाम से मनाई जाएगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

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                    <pubDate>April 8, 2025, 9:26 am</pubDate>
                    <guid>https://chhattisgarh.inkhabar.com/top-news/good-news-holiday-announced-in-chhattisgarh-government-holiday-issued-on-ram-navami-and-chetichand/</guid>
                    <copyright>Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
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